1.5 lakh people arrived in Afghanistan from Iran, only 10% of these screened; 3.4 million people in danger, not enough kits | अफगानिस्तान में ईरान से 1.5 लाख लोग पहुंचे, इनमें से 10% की ही स्क्रीनिंग हुई; 3.4 करोड़ लोग खतरे में, पर्याप्त किट भी नहीं हैं


  • ईरान से डेढ़ लाख लोग अफगानिस्तान पहुंचे, केवल 10% लोगों की स्क्रीनिंग हुई, 3.4 करोड़ लोग मुश्किल में
  • एजेंसी का कहना है कि अगर सीमा बंद भी कर दी जाए, तो भी अफगानी देश लौटने का रास्ता खोज ही लेते हैं

दैनिक भास्कर

Mar 27, 2020, 08:03 AM IST

लंदन. ईरान में कोरोनावायरस से 157 नई मौतें हुई हैं। यहां अब तक 2234 मौतें हो चुकी हैं। यह कोरोनावायरस से प्रभावित छठा सबसे बड़ा देश हैं। ऐसे में यहां रह रहे अफगानिस्तान के लोग अपने देश लौट रहे हैं। 8 मार्च से 21 मार्च तक ईरान से करीब 1.15 लाख लोग लौट चुके हैं। इनमें से सिर्फ 10 फीसदी लोगों की ही स्क्रीनिंग हुई है। ऐसे में देशभर में फैले इन लाखों लोगों को ‘कोरोना का सुपरस्प्रेडर’ कहा जा रहा है। ये लोग हेरात प्रांत के रास्ते प्रवेश कर रहे हैं। यहां अब तक 58 पॉजिटिव केस आए हैं। पूरे देश में 84 मामले आए हैं। इनमेंं 2 की मौत हो चुकी हैं। 

स्वास्थ्य मंत्री फिरोजुद्दीन फिरोज के मुताबिक सरकार का अनुमान है कि ईरान से आए लोगों की वजह से देश में करीब 3.40 करोड़ लोगों पर कोराना का खतरा है। हालात काबू नहीं किए गए तो 1.10 लाख लोग मारे जाएंगे। उधर, राष्ट्रपति अशरफ गनी ने भीड़ न करने की अपील की है, लेकिन लोग नहीं मान रहे हैं। उधर, जापान, रूस और सिंगापुर जैसे कम प्रभावित देशों में भी सख्ती शुरू हो गई है। मॉस्को में फूड और दवा की दुकानों को छोड़कर बाकी प्रतिष्ठानों को बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। अब तक दुनियाभथर में 21,152 लोगों की मौत हो चुकी है।

हेरात पहुंचने वाले ज्यादातर लोगों में फ्लू के लक्षण मिले

एजेंसी का कहना है कि अगर सीमा बंद भी कर दी जाए, तो भी अफगानी देश लौटने का कोई न कोई रास्ता खोज ही लेते हैं। ये लोग यात्रियों से खचाखच भरी टैक्सियों, बसों, वैनों से अफगानिस्तान लौट रहे हैं। ज्यादातर लोग हेरात शहर के तंग होटल और हॉस्टल में रुके हैं। हेरात प्रांत के गवर्नर अब्दुल कयूम रहीमी ने कहा कि यहां हेल्थ वर्कर, मास्क और थर्मोमीटर की कमी है। नाममात्र के लोगों की जांच की गई है। ज्यादातर में फ्लू जैसे लक्षण दिख रहे हैं।  

जर्मनी ने बनाई नई डिवाइस, ढाई घंटे में पता चल सकेगा

जर्मनी की दिग्गज कंपनी बॉश ने कोरोना वायरस टेस्ट करने की नई डिवाइस तैयार की है। इस तकनीक से सैंपल को कहीं दूर किसी लैब में भेजे बिना ढाई घंटे के अंदर टेस्ट किया जा सकेगा कि संबंधित व्यक्ति वायरस से संक्रमित है या नहीं। इसमें समय की बचत तो होगी ही। सैंपल को ट्रांसपोर्ट करने में होने वाला खर्च भी नहीं होगा। इस डिवाइस से किए गए विभिन्न टेस्ट के नतीजे 95% सटीक रहे हैं। इस मशीन से एक दिन में 10 टेस्ट किए जा सकेंगे। हालांकि कंपनी ने कीमत नहीं बताई है।