200 cancer patients stranded with relatives in Mumbai due to lockdown, said – forced to stay on the road | लॉकडाउन से मुंबई में रिश्तेदारों संग फंसे 200 कैंसर पीड़ित, बोले- सड़क पर रहने को मजबूर


  • विभिन्न राज्यों से इलाज करने मुंबई आए मरीजों ने कहा-मुंबई में रहने का खर्च नहीं उठा सकते
  • ये मरीज और उनके रिश्तेदार स्थानीय लोगों द्वारा किए गए रहने-खाने के इंतजामों पर जिंदा हैं

दैनिक भास्कर

Mar 29, 2020, 11:42 AM IST

मुंबई. कैंसर के इलाज के लिए विभिन्न राज्यों से मुंबई आए 200 मरीज लॉकडाउन में फंसे हैं। सभी सड़क किनारे रहने को मजबूर हैं। साधन नहीं होने के कारण ये अपने घर भी नहीं जा सकते हैं। रुपए की कमी होने से मुंबई में कमरे का किराया दे नहीं सकते। ऐसे में सभी स्थानीय लोगों की कृपा पर जिंदा हैं। लॉकडाउन के बीच इनके रहने और खाने पीने का इंतजाम स्थानीय लोग ही कर रहे हैं। 

झारखंड के कैंसर पीड़ित रजिथ ने बताया, ‘‘मेरे जैसे यहां 200 से ज्यादा लोग हैं। मेरी 23 मार्च को मुंबई से लौटने की टिकट थी, लेकिन सबकुछ बंद होने से यहां फंस गया हूं।’’

महाराष्ट्र में कोरोनावायरस के आज सबसे ज्यादा 7 नए मामले सामने आए हैं

दिल्ली से हजारों मजदूर लौटने को मजबूर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने के लिए देश में 21 दिन का लॉकडाउन किया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से हजारों की संख्या में मजदूर उत्तर प्रदेश और बिहार समेत दूसरों राज्यों में अपने घरों को पैदल लौटने को मजबूर हैं। हालांकि, मजदूरों की संख्या अधिक होने पर स्थानीय प्रशासन ने बसों का इंतजाम किया था।
 
देश में संक्रमितों की संख्या एक हजार ज्यादा 
देश में कोरोनावायरस से संक्रमितों की संख्या रविवार सुबह तक covid19india.org वेबसाइट के अनुसार 1040 है। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा आज 7 नए मामले सामने आए हैं। महाराष्ट्र सरकार ने कोरोना से संक्रमितों के इलाज के लिए महात्मा फुले जन आरोग्य योजना शुरू की है। यह 1 अप्रैल से लागू होगी। सरकार के आंकड़ों में अभी संक्रमितों की संख्या 979 है। बताया जा रहा है कि इनमें से 86 ठीक हो चुके हैं, जबकि 25 की मौत हो चुकी है।

Coronavirus Covid-19 Outbreak Lockdown Day 7 Live Update 1 April – Coronavirus India Lockdown Live Updates: फ्रांस में पिछले 24 घंटों में 499 लोगों की मौत, भारत में मृतकों की संख्या हुई 35


Coronavirus India Lockdown Live Updates: फ्रांस में पिछले 24 घंटों में 499 लोगों की मौत, भारत में मृतकों की संख्या हुई 35

Coronavirus India Lockdown Live Updates: स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़े

Coronavirus India Lockdown Live Updates:  देश में कोरोनावायरस का कहर कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है. इस खतरनाक वायरस की वजह से अब तक 35 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं संक्रमितों की संख्या 1397 तक पहुंच चुकी है. नई दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के धार्मिक आयोजन के बाद देश के अलग अलग राज्यों से संक्रमित लोगों की जानकारी सामने आ रही है. पिछले 24 घंटों के भीतर कोरोनावायरस के 146 नए मामले सामने आए हैं. राहत की बात ये है कि इसके संक्रमण से अब तक 124 लोगों को ठीक किया जा चुका है. स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से मंगलवार रात ये आंकड़े जारी किए गए हैं. बता दें कि कोरोनावायरस के बढ़ते मामले को देखते हुए देश में 21 दिनों का लॉकडाउऩ जारी है. 21 दिनों का लॉकडाउऩ 14 अप्रैल तक जारी रहेगा. स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि संक्रमण को रोकने के लिए लागू किए गए देशव्यापी लॉकडाउन का पालन ठीक से नहीं होने के कारण मामले बढ़ रहे हैं. इनके साथ ही संक्रमण के खतरे वाले इलाके (हॉटस्पॉट) भी बढ़ रहे हैं.

निजामुद्दीन में धार्मिक सभा में आए लोग दिल्ली की 16 मस्जिदों में ठहरे थे: पुलिस ने सरकार को बताया

तेलंगाना में कोरोना वायरस के 15 मामले आये सामने

तेलंगाना में मंगलवार को कोविड-19 के 15 नये मामले सामने आये और इसके साथ ही राज्य में उन संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 77 हो गई जिनका इलाज चल रहा है. ये 15 नये मरीज वे लोग ही हैं जो दिल्ली में एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुए थे. स्वास्थ्य मंत्री ई राजेंद्र ने यह जानकारी दी. 

तबलीगी जमात में शामिल होने वाले 50 लोग पहुंचे जौनपुर, पृथक रखे गए

दिल्ली के निजामुद्दीन में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होकर 50 लोगों के जौनपुर लौटने की खबर मिलते ही जिले में हड़कंप मच गया। सभी को पृथक केंद्र में रखा गया है. जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि दो दिन पहले दिल्ली और नोएडा से बस द्वारा लाये लोगों की जांच पड़ताल के दौरान उनमें से 50 लोग ऐसे पाये गये जो तबलीगी जमात में शामिल होकर लौटे हैं. 

फ्रांस के अधिकारियों ने पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस से 499 लोगों की मौत दर्ज की. 

कर्नाटक में कोरोना वायरस के मामले 100 के पार, तबलीगी जमात से जुड़े 78 लोगों को किया पृथक
कर्नाटक में कोरोना वायरस के 10 नए मामले आने के साथ ही राज्य में इस घातक विषाणु से संक्रमित लोगों की संख्या 100 के आंकड़ें को पार कर गई है. स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन में मंगलवार को जानकारी दी गई कि अभी तक राज्य में कोविड-19 के 101 मामलों की पुष्टि हुई है. इनमें तीन लोगों की मौत हो गई और आठ लोगों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. 

तबलीगी जमात के धार्मिक आयोजन में शामिल छत्तीसगढ़ के 101 लोगों की पहचान
नई दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के धार्मिक आयोजन में शामिल छत्तीसगढ़ के 101 लोगों की पहचान की गई है. राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने आज यहां बताया कि नई दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज में तबलीगी जमात के धार्मिक आयोजन में राज्य के 101 लोगों के शामिल होने की जानकारी मिली है। इस आयोजन में शामिल हुए जमात के 32 सदस्य पृथक और 69 सदस्य आइसोलेशन में रखे गए हैं. 

केरल में कोविड-19 से दूसरी मौत, सात नए मामले सामने आए
केरल में मंगलवार को कोविड-19 से दूसरी मौत हो गई और संक्रमण के सात नए मामले दर्ज किये गये जिसके बाद राज्य में इस विषाणु से संक्रमित लोगों की संख्या 215 हो गई है. 

Lucknow News In Hindi : Varanasi Lucknow Coronavirus Lockdown Live | 14 Day Mandatory Quarantine For Lakhs Of Migrants Returning To UP, Bihar News and Updates | 3 दिन में दूसरे राज्यों से 1.5 लाख लोग उत्तर प्रदेश आए, योगी बोले- इन्हें 14 दिनों के लिए क्वारैंटाइन किया जाएगा


  • लॉकडाउन के चौथे दिन दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर उमड़ी भारी भीड़, सरकार ने बसों का इंतजाम कर लोगों को रवाना
  • लखनऊ पहुंचने पर करीब 200 बसों से पूर्वांचल के जिलों में लोगों को भेजा गया, गांव के हिसाब से प्रवासियों की बनेगी सूची

दैनिक भास्कर

Mar 29, 2020, 12:27 PM IST

लखनऊ. कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए देशभर में 21 दिनों के लॉकडाउन का आज 5वां दिन है। हालांकि, शनिवार को यह दिल्ली से लेकर लखनऊ तक फेल नजर आया। दिल्ली गेट से लखनऊ और फिर यहां पूर्वांचल व अन्य हिस्सों में लोगों को बसों का इंतजाम कर भेजा गया। अनुमान है कि 3 दिन के भीतर गैर राज्यों से प्रदेश में 1.5 लाख आए हैं। इन लोगों को 14 दिनों के अनिवार्य क्वारैंटाइन में रहना होगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी डीएम को निर्देश दिया है कि वे पिछले 3 दिनों में राज्य में लौटे 1.5 लाख प्रवासियों का पता लगाएं, उन्हें राज्य के शिविरों में रहने दें और उनके भोजन और अन्य रोजमर्रा की जरूरतों की व्यवस्था सुनिश्चित करें। उनके नाम, पते और फोन नंबर इन अधिकारियों को उपलब्ध कराए गए हैं और उनकी निगरानी की जा रही है। वहीं, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा- इन सभी प्रवासी मजदूरों को 14 दिनों के लिए सरकारी शिविरों में रहना होगा। उन्हें अपने घरों में लौटने की अनुमति नहीं होगी। व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कल रात ग्राम प्रधानों को 65,000 से अधिक कॉल किए गए। नोडल अधिकारियों को नियुक्त किया गया है। ग्राम निकायों को प्रवासियों की सूची तैयार करने के लिए भी कहा गया है।

देवरिया में हुई थर्मल स्कैनिंग
इस कवायद के बीच तमाम लोग अपने-अपने घरों को पहुंच चुके हैं। देवरिया में गैर राज्यों से आए मजदूरों की थर्मल स्कैनिंग हुई। उसके बाद उन्हें अपने गांवों में जाने की अनुमति दी गई। बस स्टेशनों भी मजदूरों को कतारबद्ध कर डॉक्टरों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की टीम द्वारा स्कैन किया गया। उनके नाम, पते, फोन नंबर का डाटा तैयार किया गया। एक अधिकारी ने कहा- केवल उन्हीं लोगों क्वारैंटाइन किया जाएगा, जिनमें संदिग्ध लक्षण दिखेंगे। देवरिया में अब कोई संदिग्ध नहीं मिला है।

21 जिलों में बने आश्रय स्थल
अपर मुख्य सचिव राजस्व रेणुका कुमार ने बताया कि अब तक 21 जिलों में 100 आश्रय स्थल बनाए जा चुके हैं। इन जिलों में संत कबीर नगर, भदोही, मीरजापुर, कौशांबी, कासगंज, जौनपुर, गोरखपुर, अमरोहा, चंदौली, कानपुर देहात, इटावा, फर्रुखाबाद, श्रावस्ती, चित्रकूट, महाराजगंज, हापुड़, मुजफ्फरनगर, मैनपुरी, बदायूं, लखीमपुर और रामपुर शामिल हैं। प्रदेशस्तर पर इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम की स्थापना राहत आयुक्त कार्यालय में की जा रही है। जिलों में भी स्थायी कंट्रोल रूम स्थापित करने के लिए हर जिले को 50 हजार रुपए आवंटित किए गए हैं।

बिहार मुख्यमंत्री ने कहा- 14 दिनों तक घर जाने की नहीं मिलेगी अनुमति
दिल्ली, मुंबई व राजस्थान से आने वाले तमाम मजदूर बिहार के रहने वाले हैं, जो यूपी के जरिए अपने अपने घरों को रवाना हुए हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारियों को सीमावर्ती जिलों में राहत शिविर स्थापित करने का आदेश दिया है। इन मजदूरों को 14 दिनों तक घर जाने की अनुमति नहीं होगी। नीतीश कुमार ने कहा था- विशेष बसों से लोगों को राज्यों को वापस भेजने से लॉकडाउन का उलंघन होगा। इससे कोरोनावायरस के प्रसार में बढ़ोत्तरी होगी। उन्होंने कहा, लोगों को घर वापस भेजने की कोशिश के बजाय स्थानीय स्तर पर शिविरों का आयोजन करना बेहतर है। राज्य सरकार किसी के द्वारा आयोजित इन शिविरों की लागत की प्रतिपूर्ति करेगी।

Coronavirus: AAP MLA Atishi demanded stern action against Nizamuddin Markaz


Coronavirus: AAP विधायक आतिशी ने निजामुद्दीन मरकज मामले पर दिल्ली पुलिस पर उठाए सवाल, मैप शेयर कर पूछा...

दिल्ली का निजामुद्दीन इलाका भारत में कोविड-19 के एक केंद्र के तौर पर सामना आ रहा है

नई दिल्ली:

आम आदमी पार्टी (AAP) की विधायक आतिशी ने तीन दिन का इज्तिमा (मजहबी मकसद से एक खास जगह जमा होना) आयोजित करने के लिए निजामुद्दीन मरकज के अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मंगलवार को मांग की. साथ ही उन्होंने सरकार की ओर से इस तरह से लोगों के जुटने पर रोक लगाए जाने के बावजूद दिल्ली पुलिस द्वारा अपेक्षित कदम नहीं उठाने पर भी सवाल किया. दिल्ली का निजामुद्दीन इलाका भारत में कोविड-19 के एक केंद्र के तौर पर सामना आ रहा है क्योंकि पिछले कुछ दिनों में यहां कई लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है.  इंडोनेशिया और मलेशिया समेत विभिन्न देशों के दो हजार से ज्यादा लोगों ने 13 से 15 मार्च के बीच निजामुद्दीन (पश्चिम) इलाके में तबलीगी जमात के इज्तिमे में हिस्सा लिया था. तबलीगी जमात के मुख्यालय (मरकज़) जाने वाले कम से कम 24 लोगों के कोविड-19 से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है. इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और उसने इलाके की घेराबंदी की तथा लोगों की जांच करना शुरू की. 

200 से ज्यादा लोगों के जमा होने पर रोक लगाने के दिल्ली सरकार के आदेश का हवाला देते हुए आतिशी ने निजामुद्दीन मरकज़ (केंद्र) के प्रशासकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. कालकाजी की विधायक ने ट्वीट किया, “ तीन दिन की धार्मिक सभा आयोजित करने वाले निजामुद्दीन मरकज़ के प्रशासकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए जिसमें 13-15 मार्च के बीच 1000 से ज्यादा लोग शामिल हुए थे. दिल्ली सरकार के आदेशों ने 13 मार्च को ही साफ तौर से सभाओं या 200 से अधिक व्यक्तियों के जमा होने पर रोक लगा दी थी.”

एक अन्य ट्वीट में आतिशी ने निजामुद्दीन थाने और निजामुद्दीन मरकज़ के बीच की दूरी को दिखाने के लिए एक स्क्रीनशॉट टैग किया. आप नेता ने कहा, “ हज़रत निजामुद्दीन थाना, निजामुद्दीन मरकज़ से एक दम बराबर में है जो गूगल मैप से देखा जा सकता है. दिल्ली सरकार के आदेश की अवहेलना करके 13-15 मार्च तक 1000 से ज्यादा लोगों के जुटने पर दिल्ली पुलिस ने मरकज़ के प्रशासकों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की?”

उन्होंने कहा, “12 मार्च के दिल्ली सरकार की अधिसूचना में कहा गया था कि जो भी कोविड-19 से प्रभावित देशों की यात्रा से हाल में लौटा हों, वे खुद को पृथक कर ले. तो फिर मरकज़ के प्रशासकों ने उन देशों से आने वाले लोगों को अलग थलग करना क्यों सुनिश्चित नहीं किया?” आतिशी ने दिल्ली पुलिस को भी निशाने पर लिया और सवाल किया कि उसने कार्रवाई क्यों नहीं की. उन्होंने कहा, “दिल्ली पुलिस ने 13-15 मार्च तक निजामुद्दीन मरकज में बड़े धार्मिक आयोजन के खिलाफ क्या कार्रवाई की, जब दिल्ली सरकार के आदेश थे कि 200 से ज्यादा लोगों को जमा होने से रोका जाए? केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की जरूरत है.”


Entry ban without washing hands in the village, located at a height of 8700 feet, water tank fitted for people outside the village | 8700 फीट की ऊंचाई पर बसे गांव में बिना हाथ धोए एंट्री बैन, गांव के बाहर लोगों के लिए लगी पानी की टंकी


  • करगिल के लत्तू गांव के लोगों की पहल, लिखा- पहले हाथ धोएं, फिर गांव में प्रवेश करें
  • ग्रामीणों के मुताबिक, गांव के व्यक्ति को भी बिना हाथ धोए गांव में घुसने नहीं दिया जा रहा

दैनिक भास्कर

Mar 29, 2020, 01:23 PM IST

करगिल. करगिल का गांव लत्तू, जो समुद्र तल से 8700 फीट ऊंचाई पर बसा है। पहले ठंड की स्थिति और अब बीमारी का डर लोगों को सता रहा है। इन स्थितियों के बीच इस गांव में कोरोना को लेकर जागरुकता देखने को मिल रही है। ग्रामीणों ने स्वच्छता की मुहिम शुरू करते हुए गांव के बाहर एक पानी की टंकी लगा दी है। इस पर लिखा है- ‘पहले हाथ धोएं, फिर गांव में प्रवेश करें।’ ग्रामीणों के मुताबिक बिना हाथ धोए किसी भी शख्स को गांव में घुसने नहीं दिया जा रहा है। चाहे वह गांव का हो या फिर बाहर का।

अन्य गांव भी सीख ले रहे

करगिल में कोरोना संक्रमित के शक में 145 से ज्यादा लोग क्वारेंटाइन में हैं। दो मरीजों के पॉजिटिव होने का पता चला है। इसे देखते हुए लत्तू के ग्रामीणों ने एक कमेटी बनाई है। जिसने गांव के बाहर पानी की टंकी रखवाई है। वहां साबुन और सैनिटाइजर भी रखा गया है। इस मुहिम की चर्चा करगिल के उपायुक्त बशीर उल हक चौधरी ने ट्विटर पर की है। फायदा यह हुआ कि आसपास के लोग भी यह तरीका अपनाने लगे हैं।

What is tablighi jamaat and what is the meaning of Markaz – क्या होती है तबलीगी जमात और क्या हैं मरकज के मायने?


क्या होती है तबलीगी जमात और क्या हैं मरकज के मायने?

प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली:

मरकज़ के मायने centre यानी केंद्र होता है और तबलीग का मतलब है अल्लाह और कुरान, हदीस की बात दूसरों तक पहुंचाना. वहीं जमात का मतलब ग्रुप से है. तबलीगी जमात यानी एक ग्रुप की जमात. तबलीगी मरकज का मतलब इस्लाम की बात दूसरे लोगों तक पहुंचाने का केंद्र. लगभग 75 साल पहले मेवात के मौलाना मौलाना इलियास साहब ने मरकज की स्थापना की थी इस मरकस को बनाने का उनका मकसद था कि भारत के अनपढ़ मुसलमानों में बढ़ती जहालत को खत्म करके उनको इस्लाम के बताए गए रास्ते और नमाज की तरफ लाना था ताकि यह भटके हुए लोग नमाज पढ़ें, रोजे रखें और बुराइयों से बचें, सच्चाई अख्तियार करें. इन कामों से मरकज़  को इतनी प्रसिद्धि मिली कि वह पूरी दुनिया में जाना जाने लगा. दुनिया भर से लोग यहां आने लगे और फिर बुराई से अच्छाई की तरफ लाने का केंद्र बन गया. 

मरकज में अमीर यानी हेड की हिदायत पर देश और विदेश के कोने-कोने में लोगों के ग्रुप जिसको जमात कहा जाता है, मस्जिदों में जा-जाकर इस्लाम की बातों को लोगों तक पहुंचाने का काम करने लगे. इसमें इलाक़े के हिसाब से एक कमेटी बना देते हैं. वे अपने इलाक़े में गश्त ( भ्रमण) करते हुए लोगों से बुराई को छोड़ने और नेकी की तरफ़ चलने के लिए कहती हैं. फिर वे लोग इस तरह नए सदस्यों को जोड़ते हैं और उनको अपनी कमेटी के जरिए मस्जिद से जाने वाली जमात में शरीक होने के लिए कहा जाता है. ये जमात तीन दिन से लेकर चालीस दिन या और उससे अधिक दिनों के लिए होती है. इलाक़े की मस्जिद से बनी कमेटी अपनी लिस्ट ज़िले के मुख्य केन्द्र को देती हैं और फिर वह मरकज़ में भेज दी जाती है. 

फिर ये लोग अपनी मस्जिदों से ग्रुप यानी जमात की शक्ल में ज़िले की मरकज़ में जाते हैं जहां से ये तय होता है कि किस जमात को किस इलाक़े में जाना है. और हर जमात का अमीर (हेड) बना दिया जाता है जिसके आदेश को सभी सदस्यों को मानना पड़ता है. ज़िले के मरकज़ से लेकर राज्य के मरकज़ और उसके अलावा देश के निज़ामुद्दीन स्थित मुख्य मरकज़ से संचालन होता है. 

मरकज में सिर्फ जमीन और आसमान का जिक्र होता है यहां किसी भी तरह की दुनियावी बातों पर पूरी तरह पाबंदी है. यही वजह है कि तबलीगी जमात को पूरी दुनिया में वीजा मिल जाता है. तबलीगी जमात का जलसा हर साल भोपाल के साथ-साथ देश के हर हिस्से में  होता है. इसमें भारी भीड़ इकट्ठी होती है. मरकज में मौजूद जमात देश के लिए पूरी तरह समर्पित रहती है. यही वजह है कि पूरे देश में जब कभी भी किसी भी तरह का नुकसान होता है तो वो सरकार के बजाय अपने आप को कसूरवार ठहराते हैं. उनका ये मानना है कि खुदा ने हमको दुनिया में अच्छाई के लिए भेजा है. कहीं न कहीं हम अच्छाइयों और इस्लाम के बताए रास्तों से दूर हो रहे हैं. इसलिए खुदा का यह कहर हमारे लिए है. और मगरिब की नमाज़ के बाद देश में अमन और सलामती के लिए ख़ास दुआ की जाती है.

Coronavirus Telangana Latest News | Telangana Chief Minister K Chandrashekar Rao (KCR) On Coronavirus Lockdown and Novel (COVID-19) Cases Death Toll | मुख्यमंत्री केसीआर का दावा- नए मामले सामने नहीं आए तो 9 दिन में राज्य कोरोनावायरस से मुक्त घोषित होगा


  • तेलंगाना में काेरोना के 70 पॉजिटिव मामले आए, इनमें से 11 का टेस्ट इलाज के बाद निगेटिव आया
  • चंद्रशेखर राव ने कहा- सरकार 3,200 करोड़ रु. की लागत से राज्य के किसानों का अनाज खरीदेगी

दैनिक भास्कर

Mar 30, 2020, 12:32 PM IST

हैदराबाद. तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने दावा किया है कि अगले 9 दिन में राज्य कोरोनावायरस के संक्रमण से मुक्त हो जाएगा। उन्होंने रविवार को कहा कि तेलंगाना में अभी 70 पॉजिटिव केस सामने आए हैं। इलाज के बाद इनमें से 11 का टेस्ट निगेटिव आया। इन्हें सोमवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। 58 मरीजों का इलाज चल रहा है। विदेश से लौटे 25 हजार 937 लोग निगरानी में हैं। इनके क्वारैंटाइन का समय 7 अप्रैल को पूरा होगा। अगर आगे कोई नया मामला नहीं आता है तो राज्य 7 अप्रैल तक कोरोना मुक्त घोषित होगा।

राव ने कहा कि कोविड-19 के लिए डॉक्टर्स, नर्स, मेडिकल ग्रैजुएट एक समूह बनाएंगे। राज्य की सेवा के लिए वे कभी भी ऐसा करें, उनका स्वागत है। उन्होंने कहा कि अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उनसे किसी तरह की नरमी नहीं दिखाई जाएगी। सरकार ऐसी गतिविधियों पर नजर रख रही है।

किसानों की मदद करेगी सरकार: केसीआर

राव ने कहा कि कोरोना से प्रभावित किसानों की मदद की जाएगी। सरकार ने गांवों से अनाज खरीदने का फैसला किया है। इसके लिए 3,200 करोड़ रु. आवंटित किए जाएंगे। तारीख लिखे कूपन के आधार पर इसकी खरीदारी होगी। किसानों को फसल बेचने के लिए पासबुक साथ लाना होगा। इसकी कीमत ऑनलाइन उनके खाते में भेजी जाएगी। साथ ही फल खरीदने के लिए भी 500 केंद्र बनाए जा रहे हैं।

राव ने संक्रमण रोकने के लिए गांवों की पहल को सराहा
मुख्यमंत्री राव ने कहा कि कुछ ग्रामीण अपने गांवों का ध्यान रख रहे हैं। वे किसी को अपने गांव में आने की इजाजत नहीं दे रहे, यह सराहनीय है। हालांकि, उन्हें यह समझना चाहिए कि किसे आने दें और किसे नहीं। यह अच्छा होगा कि वे गांव के बाहर पानी और साबुन का प्रबंध करें। ऐसा करने पर बाहर से आना वाला कोई भी व्यक्ति अपने आपकाे सैनिटाइज कर गांव में प्रवेश कर सकेगा।

Coronavirus News Kerala-based company sent 3.5 million pairs of surgical gloves to Serbia – Coronavirus: केरल की एक कंपनी ने सर्बिया को भेजे 35 लाख सर्जिकल दस्ताने


Coronavirus: केरल की एक कंपनी ने सर्बिया को भेजे 35 लाख सर्जिकल दस्ताने

सर्बिया में कोरोना वायरस का पहला मामला मार्च के पहले हफ्ते में सामने आया था (फाइल फोटो)

कोच्चि:

केरल स्थित एक कंपनी ने सोमवार को कहा कि उसने कोरोना वायरस के खिलाफ दुनियाभर में जारी लड़ाई में सहयोग के लिये सर्जिकल दस्तानों के 35 लाख जोड़े सर्बिया भेजे हैं. कोचीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड के एक प्रवक्ता ने कहा कि 90, 385 किलोग्राम वजन के इन दस्तानों को 7,091 डिब्बों में भरकर बोईंग 747 मालवाहक विमान से सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड भेजा गया है. प्रवक्ता ने कहा कि निर्यातक कंपनी का नाम सेंट मेरीज रबर्स लिमिटेड है. बता दें कि सर्बिया में अब तक करीब 500 लोग कोविड-19 से संक्रमित पाये गये हैं जबकि सात लोगों की मौत हुई है.सर्बिया में कोरोना वायरस का पहला मामला मार्च के पहले हफ्ते में सामने आया था. 

55% of infected youth in New York; Causes of diseases like obesity and diabetes | न्यूयॉर्क में 55% संक्रमित युवा; इसकी वजह मोटापा और डायबिटीज जैसी बीमारियां


  • चीन में वायरस पर हुई रिसर्च के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज जैसी बीमारियों से पीड़ित मोटे लोग इससे अधिक प्रभावित हो सकते हैं
  • अमेरिका में 10% से अधिक लोग डायबिटीज के मरीज, राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं, ‘कई युवा खतरे की गंभीरता महसूस नहीं करते हैं

दैनिक भास्कर

Mar 30, 2020, 01:50 PM IST

नई दिल्ली. कोविड-19 का प्रकोप झेल रहे अमेरिकियों के लिए कुछ आंकड़ों ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। जिस वायरस से बुजुर्गों अधिक प्रभावित होते हैं, उसकी चपेट में युवाओं के आने से तूफान खड़ा हो गया है। कारणों का विश्लेषण शुरू हो गया है। डिसीज कंट्रोल प्रिवेंशन सेंटर की 18 मार्च की रिपोर्ट में बताया गया था कि करीब 40%बीमार लोगों की आयु 55 साल से कम है। इनमें से आधे लोगों की आयु 20 से 44 वर्ष के बीच है।

अमेरिका में 19 से 55 वर्ष की आयु के लोगों की आबादी में संख्या 47% है। डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद अलेक्जेंड्रिया ओकेसियो कॉर्टेज (30 वर्ष) ने बताया कि ‘न्यूयॉर्क राज्य में 55% मामले 18 से 49 साल की आयु के लोगों के हैं’। इसके बाद सीडीसी ने अस्पतालों में भर्ती लोगों के विस्तृत आंकड़े नहीं दिए हैं। फैलाव के शुरुआती दौर में युवाओं के प्रभावित होने के कुछ कारण हो सकते हैं। अमेरिका में सबसे पहले न्यूयॉर्क जैसे बड़े शहरों में कोरोना ने पांव पसारे हैं। यह शहर देश के अन्य इलाकों की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक युवा है। लॉकडाउन लागू होने से पहले बार, रेस्त्रां और सबवे में युुवाओं की ज्यादा भीड़ रही होगी। ऐसे भीड़ भरे स्थानों में बीमारी जल्दी फैलती है। 

हमारे युवा खतरों के प्रति लापरवाह हैं:  ट्रम्प
युवाओं के बारे में चिंता के कई कारण हैं। चीन में वायरस पर रिसर्च से पता लगा है कि हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज जैसी बीमारियों से पीड़ित मोटे लोग अधिक प्रभावित हो सकते हैं। अमेरिका में ये सब फैक्टर हैं। इटली में लगभग 20% व्यक्ति मोटे हैं तो अमेरिका में 36%। 10% से अधिक अमेरिकी डायबिटीज के मरीज हैं। इनमें सभी बुजुर्ग नहीं हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं, ‘कई युवा खतरे की गंभीरता महसूस नहीं करते हैं’।

Government employees will not get full salary for the month of March in Maharashtra – महाराष्ट्र में सरकारी कर्मचारियों को नहीं मिलेगी मार्च महीने की पूरी सैलेरी, डिप्टी सीएम अजित पवार ने बताई वजह


महाराष्ट्र में सरकारी कर्मचारियों को नहीं मिलेगी मार्च महीने की पूरी सैलेरी, डिप्टी सीएम अजित पवार ने बताई वजह

बाद में जारी किए गए सरकारी आदेश में कहा गया कि बकाया वेतन बाद में दिया जाएगा. 

मुंबई:

महाराष्ट्र के वित्त मंत्री अजित पवार ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों समेत निर्वाचित प्रतिनिधियों को मार्च महीने का पूरा वेतन नहीं दिया जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार से बकाया राशि न मिलने के कारण यह फैसला लेना पड़ा. इससे पहले पवार ने कहा था कि कोरोना वायरस और लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले भार को देखते हुए वेतन में साठ प्रतिशत की कटौती की जाएगी. बाद में जारी किए गए सरकारी आदेश में कहा गया कि बकाया वेतन बाद में दिया जाएगा. 

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पवार ने कहा था कि मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायकों समेत निर्वाचित प्रतिनिधियों के मार्च महीने के वेतन में से 60 फीसदी कटौती की जाएगी. उप-मुख्यमंत्री पवार ने कहा, “कोरोना वायरस के कारण राज्य की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है और लॉकडाउन के कारण संसाधनों में कटौती की गई है.”वित्त विभाग द्वारा जारी एक सरकारी आदेश में कहा गया कि मार्च का वेतन दो किस्त में दिया जाएगा. सरकारी आदेश में कहा गया कि कोरोना वायरस फैलने के कारण सभी निजी प्रतिष्ठान और औद्योगिक इकाईयां बंद हैं जिसके कारण राज्य के राजस्व में कमी आई है. 

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सरकारी आदेश में कहा गया कि वेतन में कटौती अर्ध सरकारी संगठनों और विश्वविद्यालयों समेत अनुदान प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों पर भी लागू होगी. पवार ने कहा कि वित्त वर्ष के अंतिम दिन मंगलवार तक केंद्र सरकार की ओर से 16,654 करोड़ की बकाया राशि प्राप्त नहीं हुई है इसलिए दो किस्त में वेतन देने का निर्णय लेना पड़ा. उन्होंने कहा, “यदि बकाया राशि मिल जाती तो एक किस्त में ही वेतन दे दिया जाता.”

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