Why did Syed Ali Shah Geelani say goodbye to the Hurriyat Conference? This is the story behind the scenes – सैयद अली शाह गिलानी ने आखिर हुर्रियत कॉन्फ्रेंस को अलविदा क्यों कहा? यह है पर्दे के पीछे की कहानी


केन्द्रीय गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक कश्मीर घाटी में आंदोलन  के “पतन” के लिए गिलानी पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराते हैं. जबकि पाकिस्तान, जो वर्षों से उस पर निर्भर था, ने स्पष्ट किया कि उसने  (गिलानी) अपनी उपयोगिता को रेखांकित किया है.  

पिछले साल अनुच्छेद 370 को रद्द करने के बाद पाकिस्तान ने अपनी रणनीति बदल दी है. मंत्रालय में पाकिस्तान डेस्क को संभालने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि “आईएसआई का ध्यान अब कश्मीरियों के लिए नहीं बल्कि पैन इस्लामिक है. और इसके लिए वे एक ऐसा नेता चाहते हैं जो उनसे सवाल न करे और सिर्फ उनके डिक्टेट्स का पालन करे.”

गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ नौकरशाह ने NDTV को बताया “हम जानते थे कि ऐसा होगा क्योंकि गिलानी को लगातार आईएसआई और पाकिस्तान द्वारा दरकिनार किया जा रहा था.” अधिकारियों ने कहा कि विशेष दर्जे की व्यवस्था पर अलगाववादियों की प्रतिक्रिया ने पाकिस्तान को भी चकरा दिया है.

एक दशक से ज़्यादा वक्त से आईबी में कश्मीर डेस्क देख रहे और पाकिस्तान में भी रह चुके अविनाश मोहनने ने NDTV को बताया कि “पाकिस्तान को उम्मीद थी कि केंद्र के धारा 370 को खत्म करने के बाद कश्मीरी भारतीय राज्य के खिलाफ बगावत करेंगे, कुछ नहीं हुआ. गिलानी को उम्मीद थी कि पाकिस्तान इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और दोनों का एक-दूसरे से मोहभंग हो गया. अब दोनों एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं.” 

राज्य पुलिस प्रमुख दिलबाग सिंह ने NDTV को बताया कि “गिलानी का एक पत्र आंख खोलने वाला था. उसने स्वीकार किया था कि उसका रास्ता गलत था.”

खुफिया रिपोर्ट कहती है कि गिलानी अन्य अलगाववादी नेताओं द्वारा धन के दुरुपयोग से भी परेशान थे. वह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हुर्रियत संयोजक जीएम सफी को लेकर भी बहुत उत्सुक नहीं थे, क्योंकि उन पर धन की हेराफेरी के आरोप थे. गिलानी ने तब हुर्रियत में कई लोगों की इच्छाओं के खिलाफ अब्दुल्ला गिलानी को चुना. लेकिन ऐसा लगता है कि एक महीने पहले अब्दुल्ला के खिलाफ आईएसआई में विरोध था, इसलिए आईएसआई ने मोहम्मद हुसैन खतीब को संयोजक के रूप में चुना.” एक अधिकारी ने कहा, ‘गिलानी ने इसे अपमान के रूप में देखा क्योंकि उनसे सलाह नहीं ली गई थी.’

पूर्व डीजीपी के राजेंद्र कहते हैं कि ”गिलानी ने अपने अहंकार के कारण इस्तीफा दे दिया. तीन दशक की जासूसी, अलगाववाद के बाद गिलानी ने महसूस किया है कि पाकिस्तान केवल कश्मीरियों को तबाही की ओर धकेलने में रुचि रखता था.“ उनके अनुसार 1990 के बाद से पाकिस्तान ने हज़ार मौतों को प्रायोजित किया है और अब उन्हें ड्रग्स की लत लगाकर युवाओं को निशाना बनाने में व्यस्त है. युवाओं पर हुर्रियत का धीरे-धीरे प्रभाव कम हो रहा है. गिलानी के समर्थन का आधार भी वर्षों से कमजोर पड़ गया था क्योंकि उनकी कॉल की अपील भी खो गई थी. वह अपने प्रो पाक रुख में बदलाव नहीं कर सकते हैं. 

एक खुफिया एजेंसी के प्रमुख ने कहा, “पाकिस्तान पहले गिलानी का आंख बंद करके समर्थन करता था और इसीलिए उन्होंने किन्हीं अन्य अलगाववादी नेताओं को घाटी में बढ़ने नहीं दिया.” हालांकि गिलानी के उत्तराधिकारी प्रभाव नहीं डालेंगे, लेकिन आने वाले वर्षों में घाटी में अलगाव बढ़ेगा. उन्होंने कहा, क्योंकि पाकिस्तान द्वारा छोड़ी गईं नई कठपुतलियों को एक सख्त रुख अपनाने में एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होगी.

Medha Raj: Who Is Medha Raj? Democratic Presidential Candidate Joe Biden Campaign Names Indian American Medha Raj as Digital Chief of Staff | मेधा राज राष्ट्रपति पद के डेमोक्रेट उम्मीदवार बिडेन के डिजिटल कैम्पेन की चीफ बनाई गईं


  • मेधा ने जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में ग्रेजुएट और स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए किया है
  • कोरानावायरस महामारी की वजह से इस बार चुनाव प्रचार डिजिटल तरीके से ही किया जा रहा है

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 03:13 PM IST

वॉशिंगटन. भारतीय मूल की अमेरिकी मेधा राज को डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बिडेन के चुनाव कैम्पेन में डिजिटल प्रचार प्रमुख बनाया गया है। यह जिम्मेदारी इसलिए और भी अहम है, क्योंकि कोरोनावायरस महामारी की वजह से इस बार का चुनाव प्रचार पूरी तरह वर्चुअल होना है। 

बिडेन के चुनाव प्रचार अभियान के अधिकारियों का कहना है कि राज डिजिटल विभाग के सभी पहलुओं पर काम करेंगी। उनका काम प्रचार के नतीजों को अधिक से अधिक कारगर बनाने का होगा। यह जिम्मेदारी मिलने पर उन्होंने लिंक्डइन पर कहा,  “चुनाव में 130 दिन बचे हैं और हम एक मिनट भी बर्बाद नहीं करेंगे।”

पीट बुटीगीग के कैम्पेन में रही हैं राज
राज पहले पीट बुटीगीग के चुनाव प्रचार अभियान से जुड़ी रही हैं। बुटीगीग ने भी अब बिडेन को समर्थन दिया है। सीएनएन चैनल ने इस खबर को सबसे पहले दिखाया। उसका कहना है कि क्लार्क हम्फ्री  बिडेन के अभियान के डिप्टी डिजिटल डायरेक्टर बनाए गए हैं। उनकी जिम्मेदारी आम लोगों से चंदा जुटाने की होगी। वे 2016 में हिलेरी क्लिंटन के चुनाव प्रचार अभियान में काम कर चुके हैं। 

राज ने जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से किया ग्रेजुएट
राज ने इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट और स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए किया है। अमेरिका में 3 नवंबर को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होना है। 77 साल के पूर्व उपराष्ट्रपति बिडेन का मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार और मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से होगा। कुछ सबसे बड़े ओपीनियन पोल में बिडेन की ट्रम्प पर 8% की बढ़त बताई जा रही है। 

Government directed Internet companies to immediately close Chinese App – सरकार ने इंटरनेट कंपनियों को चीनी App तत्काल बंद करने का दिया निर्देश


सरकार ने इंटरनेट कंपनियों को चीनी App तत्काल बंद करने का दिया निर्देश

हाल ही में भारत सरकार ने 59 चीनी ऐप को बैन कर दिया है

नई दिल्ली:

सरकार ने मंगलवार को सभी इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों को प्रतिबंधित 59 चीनी मोबाइल एप पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश जारी कर दिए. सूत्रों ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के आपातकालीन उपबंध के तहत सरकार ने ये निर्देश जारी किए हैं.दूरसंचार मंत्रालय के एक सूत्र ने पीटीआई-भाषा से कहा कि आदेश की दो सूची हैं. पहली सूची में 35 एप का नाम है और दूसरी सूची में 24 एप का नाम है.उन्होंने कहा कि सभी इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को पहले की घोषणा के अनुसार सभी 59 चीनी एप पर रोक लगाने के निर्देश अब जारी कर दिए गए हैं.

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इंटरनेट कंपनियों को दूरसंचार विभाग के एक आदेश में कहा गया है कि 24 एप पर रोक के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के आपातकालीन उपबंध 69ए के तहत तत्काल रोक लगाने के निर्देश जारी कर दिए हैं.इसके अलावा 35 एप को बंद करने के निर्देश आज दिन में पहले ही जारी कर दिए गए थे.इन सूची में वही नाम हैं जिन पर सरकार ने सोमवार को प्रतिबंध लगाया था. इनमें टिकटॉक, यूसी न्यूज, यूसी ब्राउजर, वीवा वीडियो, मी वीडियो कॉल, बिगो लाइव और वीचैट इत्यादि शामिल हैं.

VIDEO: सिटी सेंटर: चीन पर भारत की डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक

IIT Madras will now offer an online degree in data science; Country’s first institute, 125 million jobs in this sector | आईआईटी मद्रास अब डेटा साइंस में ऑनलाइन डिग्री देगा; देश का पहला इंस्टीट्यूट बना, इस सेक्टर में सवा करोड़ नौकरियां


  • आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. राममूर्ति बोले- यह प्रोग्राम शिक्षा के क्षेत्र में गेमचेंजर होगा
  • इस कोर्स के लिए रेगुलर डिग्री कोर्स का विद्यार्थी होना जरूरी

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:03 AM IST

चेन्नई. आईआईटी मद्रास ने कोरोना काल में बीएससी का ऑनलाइन डिग्री प्रोग्राम शुरू किया है। ये डिग्री प्रोगामिंग एंड डेटा साइंस में कराई जाएगी। इस तरह आईआईटी मद्रास ऑनलाइन बीएससी डिग्री प्रोग्राम चलाने वाला देश का पहला इंस्टीट्यूट बन गया है।

आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. भास्कर राममूर्ति ने दैनिक भास्कर को बताया कि डेटा साइंस डिग्री कोर्स आज के समय की जरूरत है, जो रोजगार को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। डेटा वैज्ञानिकों की मांग और जॉब मार्केट में उपयुक्त योग्य मानव संसाधन की कमी को देखते हुए इसे लॉन्च किया है। यह प्रोग्राम भारतीय शिक्षा के क्षेत्र में आने वाले समय में गेमचेंजर साबित होगा। साल 2026 तक इस सेक्टर में सवा करोड़ रोजगार भी पैदा होंगे।

स्नातक के बाद ही कर सकेंगे कोर्स
प्रोफेसर राममूर्ति ने कहा कि यह कोर्स स्कूलिंग पूरी करके निकले बच्चों के लिए नहीं है। इस कोर्स के लिए आपको किसी भी विषय में रेगुलर डिग्री कोर्स से पास होना जरूरी है। ये कोर्स उन लोगों के लिए बहुत उपयोगी है, जो पहले से कहीं काम कर रहे हैं। खासतौर पर पढ़ाई छोड़ चुके हों। इसके अलावा इस ऑनलाइन कोर्स के लिए आपको लैब की जरूरत नहीं पड़ती और घर पर ही आसानी से प्रोग्रामिंग की जा सकती है। बीएससी डिग्री प्राप्त करने के लिए स्टूडेंट को फाउंडेशन स्तर, डिप्लोमा और डिग्री स्तर को पूरा करना होगा। इसके अलावा, तीन निकास स्तर भी हैं। स्टूडेंट किसी भी स्तर पर पाठ्यक्रम से बाहर निकल सकते हैं। वे या तो डिग्री के तीनों स्तरों को पूरा कर सकते हैं, या फिर फाउंडेशन या डिप्लोमा पूरा करने के बाद बाहर निकल सकते हैं।

कई एनआईआईटी के साथ ऑनलाइन कोर्स

आईआईटी मद्रास देशभर के कई एनआईआईटी के साथ अनेक ऑनलाइन कोर्स 2005 से ही चला रहा है। लेकिन यह पहला डिग्री कोर्स है। इसके एडमिशन की तारीख अभी तय नहीं है।

एडमिशन के लिए 4 हफ्ते का ऑनलाइन कोर्स और असाइनमेंट मिलेगा
एडमिशन के लिए चार हफ्ते का ऑनलाइन कोर्स और असाइनमेंट पूरे करने होंगे। जो छात्र वीकली असाइमेंट में पासिंग मार्क्स ला पाएंगे, उन्हें क्वालीफायर एग्जाम का मौका दिया जाएगा। जो छात्र क्वालिफायर एग्जाम में पासिंग मार्क्स लाएंगे, उन्हें फाउंडेशनल लेवल में रजिस्ट्रेशन का मौका मिलेगा। फाउंडेशनल लेवल में 8 कोर्स होंगे जबकि डिप्लोमा लेवल पर 6 प्रोग्रामिंग कोर्स और 6 डेटा साइंस कोर्स रहेंगे। डिग्री लेवल पर 11 कोर्स रखे गए हैं।

Video sharing app Tiktok removed from Google Play Store and Apple App Store in India – वीडियो शेयरिंग एप टिकटॉक, भारत में गूगल प्ले स्टोर और एपल एप स्टोर से हटाया गया


वीडियो शेयरिंग एप टिकटॉक, भारत में गूगल प्ले स्टोर और एपल एप स्टोर से हटाया गया

भारत में टिकटॉक प्ले स्टोर से हटाया गया

नई दिल्ली:

वीडियो शेयरिंग एप टिकटॉक मंगलवार को देश में बंद हो गया. इसे देश में गूगल प्ले स्टोर और एपल एप स्टोर से भी हटा दिया गया है. सरकार ने सोमवार को टिकटॉक सहित 59 चीनी एप पर प्रतिबंध लगा दिया. टिकटॉक के अलावा अन्य प्रतिबंधित एप की मौजूदा स्थिति के बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं उपलब्ध हो सकी है.कुछ उपयोक्ताओं के मुताबिक मंगलवार को कुछ समय तक वे टिकटॉक का उपयोग करने में सक्षम थे. देश में टिकटॉक के करीब 20 करोड़ उपयोक्ता थे.

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टिकटॉक खोलने पर एक संदेश सभी को दिखायी दे रहा है. संदेश में लिखा है, ‘‘ प्रिय उपयोक्ता, हम भारत सरकार के 59 एप पर प्रतिबंधों का पालन करने की प्रक्रिया में है. भारत में हमारे सभी उपयोक्ताओं की निजता और डेटा की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है.”देश में टिकटॉक की वेबसाइट भी बंद हो गयी है. टिकटॉक देश में करीब 2,000 लोगों को रोजगार प्रदान करती है.बाइटडांस कंपनी की टिकटॉक एप के अलावा ई-वाणिज्य समूह अलीबाबा के मालिकाना हक वाली यूसी ब्राउजर, यूसी न्यूज एप, टैनसेंट होल्डिंग्स की वीचैट और बायदू इंक के मानचित्र और अनुवाद मंच पर भी प्रतिबंध लगा है.

भारत में लगे इस प्रतिबंध से चीन की इंटरनेट कंपनियों को झटका लगेगा, क्योंकि भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता मोबाइल बाजार है.


नीति शोध समूह गेटवे हाउस के निदेशक ब्लेज फर्नाडीज का कहना है कि देश में चार प्रमुख तरह के चीनी एप काम कर रही हैं. ये एप आर्थिक गतिविधियों, सेवा, सौंदर्य और रणनीतिक क्षेत्रों से जुड़़े हैं.उन्होंने कहा कि ‘डिजिटल इंडिया’ पर विश्व की नजर है. बायदू, अलीबाबा और टैंसेंट चीन के ‘डिजिटल रेशम मार्ग’ का हिस्सा हैं. भारत में इन 59 एप पर प्रतिबंध से इनके बाजार मूल्यांकन और इनके प्रवर्तकों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा.उन्होंने कहा कि टिकटॉक का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) आना भी प्रस्तावित है. कंपनी के 30 प्रतिशत सक्रिय उपयोक्ता भारत से आते हैं, ऐसे में कंपनी के बाजार मूल्यांकन पर विपरीत असर पड़ेगा.


भारत में टिक टॉक के प्रमुख निखिल गांधी ने एक बयान में कहा, ‘‘भारत सरकार ने टिक टॉक सहित 59 एप को बंद करने का अंतरिम आदेश जारी किया है. हम इस आदेश का पालन कर रहे हैं. हमें संबंधित सरकारी पक्षों के समक्ष अपनी प्रतिक्रिया और स्पष्टीकरण देने के लिये आमंत्रित किया गया.”वहीं बाइट डासं समूह की अन्य एप हेलो ने कहा कि वह स्पष्टीकरण देने के लिए सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रही है. उसने जोर देकर कहा कि वह देश के सभी नियमों का कड़ाई से पालन करती है.


इस बीच भारत में विकसित टिकटॉक जैसी ही एप रोपोसो ने कहा कि प्रतिबंध के बाद कई टिकटॉक उपयोक्ता उसके मंच पर आए हैं. इसमें वह लोग भी हैं जो टिकटॉक पर काफी प्रभावशाली रहे हैं. कंपनी का दावा है कि उसके उपयोक्ताओं की संख्या 6.5 करोड़ से अधिक है.मंगलवार को छोटे व्यापारियों के संगठन कैट ने भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर विभिन्न भारतीय स्टार्टअप कंपनियों में चीन के निवेश की जांच कराने के लिए कहा.

VIDEO: रवीश कुमार का प्राइम टाइम : टिकटॉक के डिलीट होने से घबरा गया चीन

Punjab Coronavirus Punjab Government New Guidlines about Lockdown, Unlock-2.0 Corona Cases Updates Amritsar, Jalandhar, Bathinda, Ludhiana | सूबे में दुकानें खोलने का वक्त बदला, बस सेवा में बढ़ोतरी की जाएगी; रात 10 से सुबह 5 बजे तक कर्फ्यू


  • फिलहाल सुबह 8 से शाम 6 बजे तक चल रही हैं बसें, कितनी बसें बढ़ेंगी, इस पर निर्णय इस सप्ताह के अंत तक लिया जाएगा
  • होटलों व रेस्टोरेंट के खुलने के समय को भी बढ़ाया जा सकता है, अभी तक जारी समयावधि में ग्राहक नहीं आ रहे

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 09:37 PM IST

जालंधर. कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच बुधवार एक जुलाई से अनलॉक 2.0 की शुरुआत हो जाएगी। सोमवार को केंद्र सरकार ने अनलॉक 2.0 को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए। इनके मुताबिक पंजाब सरकार ने भी राज्य में सभी दुकानों के समय में बदलाव कर दिया है। 31 जुलाई तक अब सभी दुकानों को बंद करने का समय रात 8 बजे तक कर दिया है, जबकि पहले ये समय 7 बजे था। इसके अलावा होटल और रेस्टोरेंटों को रात 9 बजे तक खोल सकते हैं। अब रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक रात का कर्फ्यू रहेगा। 

फिलहाल सुबह 8 से शाम 6 बजे तक बसों का संचालन किया जा रहा है, लेकिन नई गाइडलाइन के अब बस सेवा को और बढ़ाया जाएगा। कितनी बसें बढ़ेंगी, इस पर निर्णय इस सप्ताह के अंत तक लिया जाएगा। इसके अलावा होटलों व रेस्टोरेंट के खुलने के समय को भी बढ़ाया जा सकता है, क्योंकि अभी तक जो समय होटलों व रेस्टोरेंट को खोलने के लिए दिया गया है उसमें ग्राहक नहीं आ रहे।

फेजों व सेक्टरों की अपनी मंडी को खोलने का निर्णय आने वाले दिनों में लिया जा सकता है। अनलॉक 2.0 में रोजगार को बढ़ाने के लिए नए कदम उठाए जाएंगे। स्किल मैपिंग पर काम हो सकता है। इस दौरान इंडस्ट्री को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जाएगा। इंडस्ट्री मालिकों से कहा जाएगा कि जितना हो सके, लोकल लेबर को रखें।

अनलॉक 2.0 में क्या-क्या बंद रहेगा और क्या खुलेगा?

  • स्कूल, कॉलेज और कोचिंग सेंटर 31 जुलाई तक बंद रहेंगे।
  • हवाई यात्रा नहीं कर सकेंगे।
  • सिनेमा हॉल, जिम, स्विमिंग पूल, मनोरंजन पार्क, बार, असेंबली हॉल आदि बंद रहेंगे।
  • सामाजिक, राजनैतिक, खेल, मनोरंजन, शैक्षणिक, सांस्कृतिक, धार्मिक कार्य और अन्य बड़े कार्यक्रम अभी नहीं होंगे।
  • रात का कर्फ्यू जारी रहेगा, लेकिन आवश्यक गतिविधियों के लिए छूट रहेगी।

Anandiben Patel will take oath as Madhya Pradesh Governor on Wednesday – आनंदीबेन पटेल बुधवार को लेंगी मध्यप्रदेश के राज्यपाल पद की शपथ


आनंदीबेन पटेल बुधवार को लेंगी मध्यप्रदेश के राज्यपाल पद की शपथ

आनंदीबेन पटेल (फाइल फोटो)

भोपाल:

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल बुधवार को मध्य प्रदेश के राज्यपाल पद की भी शपथ लेंगी.आनंदीबेन पटेल को 28 जून को मध्यप्रदेश के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. आधिकारिक जानकारी के अनुसार आनंदीबेन पटेल बुधवार को भोपाल आएंगी और मध्य प्रदेश के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अजय कुमार मित्तल उन्हें राजभवन में आयोजित एक सादे समारोह में शाम साढ़े चार बजे राज्यपाल के पद की शपथ दिलाएंगे. मालूम हो कि मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन का अपने गृह राज्य उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है और टंडन की अनुपस्थिति के दौरान आनंदीबेन को मध्यप्रदेश के राज्यपाल के कार्यों का निर्वहन करने के लिए नियुक्त किया गया है.

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आनंदीबेन पहले भी मध्य प्रदेश की राज्यपाल रह चुकी हैं. वह उत्तर प्रदेश की राज्यपाल बनने से पहले 23 जनवरी 2018 से 28 जुलाई 2019 तक मध्य प्रदेश की राज्यपाल रहीं.मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली प्रदेश भाजपा सरकार के मंत्रिमंडल का बहुप्रतीक्षित विस्तार होना बाकी है.इसी बीच, जब मुख्यमंत्री चौहान से सवाल किया गया कि कल बुधवार को मध्य प्रदेश की प्रभारी राज्यपाल आनंदबेन पटेल भोपाल आ रहीं हैं, क्या कल ही मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा, तो इस पर उन्होंने यहां मीडिया को कहा, ”कल (बुधवार को) नहीं होगा. कल के बाद होगा. बहुत जल्दी.’ हालांकि, उन्होंने मंत्रिमंडल विस्तार की तिथि नहीं बताई.

VIDEO: मध्यप्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार पर सस्पेंस जारी

Explainer News In Hindi : TikTok App Ban in India | India Bans 59 Chinese Apps (TikTok, Helo and WeChat) Explained; All You Need To Know | सरकार 3 साल से जानती थी कि चीन के इन ऐप्स से खतरा है, पर गलवान की झड़प के 14 दिन बाद मैसेज देने के लिए सख्ती दिखाई


  • चीन के सरकारी मीडिया ने कहा- इस फैसले से उन भारतीय कंपनियों पर असर पड़ेगा, जिनमें चीन से इन्वेस्टमेंट आया है

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 10:59 PM IST

नई दिल्ली. कोई 1500 साल पहले चीन में एक दार्शनिक हुए थे। नाम था- लाओ त्सु। वे कहते थे- हजारों मील का सफर एक छोटे कदम के साथ शुरू होता है। भारत ने भी सोमवार रात 59 चाइनीज ऐप्स पर बैन लगाकर शायद चीन के बायकॉट के लंबे सफर की शुरुआत कर दी है।

गलवान घाटी में चीन के सैनिकों के साथ झड़प के 14 दिन बाद भारत ने यह कदम उठाया है, जबकि सरकार तीन साल से जानती थी कि इन ऐप्स से खतरा है। एक्सपर्ट्स की नजर में यह फैसला चीन को मैसेज देने के लिए है। इसके साथ ही यह बहस शुरू हो गई है कि इन ऐप्स पर बैन कितना जरूरी था और इसके आखिर मायने क्या हैं?

1. पहले बात सरकार की: आखिर इन ऐप्स पर बैन कैसे लगा?
2000 में बने आईटी कानून में एक धारा है- 69A। यह धारा कहती है कि देश की सम्प्रभुता, सुरक्षा और एकता के हित में अगर सरकार को लगता है, तो वह किसी भी कम्प्यूटर रिसोर्स को आम लोगों के लिए ब्लॉक कर देने का ऑर्डर दे सकती है। यह धारा कहती है कि अगर सरकार का ऑर्डर नहीं माना गया, तो सात साल तक की सजा हो सकती है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। 59 ऐप्स पर इसी धारा के तहत बैन लगाया गया है।

सरकार ने इसकी वजह क्या बताई?
सरकार की तरफ से जारी आदेश में 7 बार सम्प्रभुता और एकता का जिक्र है। बैन लगाने के पीछे 7 वजहें भी बताई गई हैं। ये वजहें हैं-

  • इन ऐप्स से भारत की सुरक्षा, सम्प्रभुता और एकता को खतरा है।
  • 130 करोड़ भारतीयों की प्राइवेसी और डेटा को खतरा है। इसकी शिकायतें मिली थीं।
  • इन ऐप्स से यूजर का डेटा चोरी कर भारत से बाहर मौजूद सर्वर पर भेजा जा रहा है।
  • ये डेटा दुश्मनों के पास पहुंच सकता है।
  • इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर ने इन्हें बैन करने की सिफारिश की है।
  • संसद के अंदर और बाहर भी इन ऐप्स को लेकर चिंताएं हैं। जनता भी एक्शन की मांग कर रही थी।
  • इंडियन साइबरस्पेस की सुरक्षा और सम्प्रभुता के लिए ऐप्स को बैन करने का फैसला लिया गया है।

2. अब यूजर की बात: सरकार की दलीलों के अलावा ऐसे समझिए कि आपको चाइनीज ऐप्स से खतरा क्यों था?
ऐप कंपनियां यूजर से फोन बुक, लोकेशन, वीडियो का एक्सेस ले लेती हैं। उसके बाद वे यूजर की हर एक्टिविटी को ट्रैक करती हैं और उसका डेटा रखना शुरू कर देती हैं। यूजर की आर्थिक क्षमता और खरीदने का पैटर्न समझकर प्रोफाइलिंग की जाती है। यह डेटा चीनी सरकार से भी साझा होता है। 

जब डेटा चीन के पास पहुंचता है, तो वहां की सरकार को भारत के बाजार के हिसाब से स्ट्रैटजी बनाने में मदद मिलती है। ज्यादातर चाइनीज ऐप्स के सर्वर भारत में नहीं, बल्कि चीन में होते हैं। इसलिए हमेशा से यह बड़ा सवाल बना रहता है कि यूजर की प्राइवेसी कितनी सेफ है?

नामी ऐप्स कौन-से हैं, जिन पर बैन लगा है?
इनमें टिक टॉक और लाइकी जैसे एंटरटेनमेंट ऐप्स हैं। हैलो और शेयर इट जैसे सोशल मीडिया ऐप्स हैं। वी-चैट और वी-मैट जैसे चैट या डेटिंग ऐप्स हैं। यूसी ब्राउजर जैसे वेब ब्राउजर ऐप्स हैं। जेंडर, कैम स्कैनर, वायरस क्लीनर जैसे यूटिलिटी ऐप्स हैं। क्लैश ऑफ किंग्स जैसे गेमिंग ऐप्स, क्लब फैक्ट्री जैसे ई-कॉमर्स ऐप्स भी बैन किए गए हैं। यूटिलिटी कैटेगरी के 22 ऐप्स बैन हुए हैं। 

क्या बैन लगाने से ऐप्स बैन हो गए?
दरअसल, सरकार के आदेश के बाद गूगल ने अपने प्ले स्टोर और एप्पल ने अपने ऐप स्टोर से 59 चाइनीज ऐप्स को हटा लिया। यानी अब वहां से आप इन्हें डाउनलोड करने से रहे। इस बार यह बैन इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर के लेवल पर भी लगा है। यानी अगर ब्रॉडबैंड इस्तेमाल कर रहे हैं, तब भी इन ऐप्स के इस्तेमाल की गुंजाइश नहीं है। अगर आप नया फोन खरीद रहे हैं, तो हो सकता है कि उनमें कुछ ऐप्स प्री-इंस्टॉल्ड आएं, लेकिन वो भी काम नहीं करेंगे। बैन हुए किसी भी ऐप पर स्टोर आपका पर्सनल डेटा जैसे टैक्स्ट, ऑडियो और वीडियो भी आप नहीं देख पाएंगे।

3. कंपनियों की बात: क्या वाकई वे यूजर्स का डेटा दूसरों से साझा कर रही हैं?
कंपनियां इससे इनकार करती हैं। इसे टिक टॉक के उदाहरण के जरिए समझ सकते हैं। सरकार के इस बैन से सबसे ज्यादा असर टिक टॉक पर पड़ने वाला है, क्योंकि उसके भारत में 60 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड्स हैं। मंथली एक्टिव यूजर्स 12 करोड़ से ज्यादा हैं।

टिक टॉक इंडिया के सीईओ निखिल गांधी कहते हैं- हम भारतीय कानून के तहत डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा के सभी नियमों का पालन कर रहे हैं। हमने चीन समेत किसी भी देश की सरकार से भारतीय यूजर्स की जानकारी शेयर नहीं की है। हम यूजर की प्राइवेसी की अहमियत समझते हैं।

4. क्या मामला कोर्ट में भी जा सकता है? 
इन चाइनीज ऐप्स के इंडिया ऑफिस के लोग कोर्ट जा सकते हैं। जैसा कि सरकार ने कहा है कि यह कदम देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, इसलिए उम्मीद नहीं है कि चीनी कंपनियों को राहत मिलेगी। 

हालांकि, डिजिटल प्राइवेसी एक्सपर्ट नमन अग्रवाल बताते हैं कि सरकार ने अभी डिटेल्ड ऑर्डर जारी नहीं किया है। सबूत भी नहीं बताए हैं। यह अभी साफ नहीं है कि प्राइवेसी और देश की सुरक्षा को लेकर दिक्कत कितनी थी और क्या थी। ऐसे में क्या पूरे ऐप्स को बैन करना सही था? क्या सरकार ने बैन लगाने से पहले सारे रास्ते देखे, खोजे और अपनाए थे?

5. तो फिर क्या सरकार को अचानक पता चला कि ये ऐप्स ठीक नहीं हैं?
इसके लिए हमें 3 साल पीछे जाना होगा। इस बार तो चीन के साथ गलवान में हमारी झड़प हुई है, लेकिन 2017 में डोकलाम हुआ था। तब भारत-चीन की सेनाएं 74 दिन तक आमने-सामने थीं। उस वक्त रक्षा मंत्रालय ने सरहद पर तैनात जवानों और अफसरों से 42 चाइनीज ऐप्स डिलीट करने को कहा था।

दिलचस्प बात ये है कि सोमवार रात सरकार ने जिन 59 ऐप्स को बैन किया, उनमें से 38 ऐप्स वही हैं, जो 2017 में रक्षा मंत्रालय के राडार पर आ चुके थे। 2017 से भी पहले दिसंबर 2015 में रक्षा मंत्रालय ने चीन के हैकर्स से खतरा बताते हुए दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक हेडक्वार्टर में वाय फाय और ब्लू टूथ डिवाइस के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। 

6. क्या ये ऐप्स पहले भी बैन हुए थे?
टिकटॉक को पिछले साल मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर बैन किया गया था। फिर उसे सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई थी। तब सुप्रीम कोर्ट में टिक-टॉक ने कहा था कि बैन से उसे रोज 3.5 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। यानी साल में 1200 करोड़ रुपए से ज्यादा।

7. इन ऐप्स में काम करने वाले इम्प्लॉइज का क्या होगा?
ये भी बड़ा सवाल है। टिक टॉक की ही बात करें तो 2019 तक इसके 250 से ज्यादा इम्प्लॉइज भारत में थे। ब्लूमबर्ग की हाल ही की रिपोर्ट के मुताबिक, टिक टॉक की पैरेंट कंपनी बाइट डांस भारत समेत दुनियाभर में 10 हजार लोगों की भर्ती करने वाली थी। टिक टॉक के भारत में सबसे ज्यादा यूजर्स हैं, इसलिए भर्ती करने की उसकी कोशिशों को झटका लग सकता है।

टिक टॉक इंडिया के सीईओ निखिल गांधी के मुताबिक, टिकटॉक 14 भाषाओं में है। इससे लाखों ऑर्टिस्ट, कहानीकार, टीचर और परफॉर्मर्स जुड़े हैं। यह उनके जीने का जरिया बना है। इनमें से कई ने पहली बार इंटरनेट का इस्तेमाल किया था।  

8. भारत ने अब यह फैसला क्यों लिया, चीन के साथ कूटनीति पर इसका क्या असर पड़ने वाला है?
भारत का यह फैसला चीन के साथ कूटनीतिक रिश्तों पर और तल्खी ला सकता है। चाइनीज ऐप्स पर बैन के एक दिन बाद चीन के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया। कहा, ‘यह चिंता की बात है और हम इस घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं।’

एक्सपर्ट्स इसे राजनीतिक फैसला ज्यादा मानते हैं। जैसे- डिजिटल पॉलिसी से जुड़े पोर्टल मीडियानामा के फाउंडर निखिल पाहवा ने ट्वीट किया कि यह राजनीतिक फैसला है। चीन को संदेश भेजने के लिए यह फैसला लिया गया है। यह फैसला एक साल पहले क्यों नहीं लिया गया था? 

9. क्या भारत की उन कंपनियों पर इसका कोई असर पड़ेगा, जिनमें चीन से निवेश आया है?
चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स की मानें तो आगे ऐसा ही होने जा रहा है। ग्लोबल टाइम्स में छपे एक आर्टिकल के मुताबिक, भारत के इस कदम का असर भारत की ही उन टेक्नोलॉजी कंपनियों और इंटरनेट स्टार्टअप्स पर पड़ेगा, जिनमें चीन से इन्वेस्टमेंट आया है। 

यिंग्के लॉ फर्म के इंडिया इन्वेस्टमेंट सर्विस सेंटर के एग्जीक्यूटिव पार्टनर शा जून भी यही बात कहते हैं। उन्होंने ग्लोबल टाइम्स से कहा कि भारत का यह फैसला बचकाना और जज्बात में लिया गया है। यह भारत में चीन की तरफ से आगे होने वाले इन्वेस्टमेंट के लिए अच्छा संकेत नहीं है। आंकड़े बताते हैं कि 2019 के आखिर तक भारत की 19 कंपनियों में चीन की अलीबाबा और टेंसेंट जैसी कंपनियों ने इन्वेस्ट कर रखा था।

10. और आखिर में अच्छी खबर क्या हो सकती है?
जो चाइनीज ऐप्स बैन हुए हैं, उनके ऑप्शन के तौर पर भारत में विकसित ऐप्स पर यूजर्स शिफ्ट हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, सोमवार रात से अब तक टिक टॉक जैसे भारत के ऐप चिंगारी के 1 लाख से ज्यादा डाउनलोड हो चुके हैं। इस पर अब हर घंटे 20 लाख से ज्यादा व्यूज आ रहे हैं। उद्योगपति आनंद महिंद्रा  ने सरकार के फैसले से दो दिन पहले ही ट्वीट किया था- मैंने कभी भी टिक टॉक का इस्तेमाल नहीं किया था, लेकिन अभी-अभी चिंगारी को डाउनलोड किया है।

डिजिटल प्राइवेसी एक्सपर्ट नमन अग्रवाल के मुताबिक, जो चाइनीज ऐप्स बैन हुए हैं, उनमें भी इंडियन टैलेंट का इस्तेमाल हो रहा था। इस बैन के बाद इंडियन टैलेंट का पहले से ज्यादा इस्तेमाल हो पाएगा या नहीं, यह कहना अभी मुश्किल है। 


Mumbai Corona update:903 new cases of covid-19 in Mumbai, 93 more patients died – मुंबई में कोविड-19 के 903 नए मामले, 93 और मरीजों की हुई मौत  


मुंबई में कोविड-19 के 903 नए मामले, 93 और मरीजों की हुई मौत  

प्रतीकात्मक तस्वीर

मुंबई:

मुंबई में मंगलवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 903 नए मामले सामने आए, जिसके साथ यहां संक्रमित लोगों की कुल संख्या बढ़कर 77,197 हो गई. बृह्नमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने यह जानकारी देते हुए बताया कि कोविड-19 के 93 और मरीजों की मौत हो जाने से इस घातक वायरस से मृतकों की संख्या बढ़कर 4,554 हो गयी है. जान गंवाने वाले 93 लोगों में 36 लोगों की मौत पिछले 24 घंटों में हो गई और बाकी 54 लोगों की मौत पहले ही हो चुकी थी लेकिन उनकी गणना मंगलवार को हुई. 

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बीएमसी ने बताया कि सोमवार को 625 मरीजों को स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दी गई. शहर में अब तक 44,170 मरीज इस रोग से ठीक हो चुके हैं. मुंबई में 28,473 मरीजों का इलाज चल रहा हैं, जबकि 818 नए संदिग्ध मरीजों को अस्पतालों में भर्ती किया गया है. 

VIDEO: अनलॉक2 को लेकर सरकार ने जारी की गाइडलाइंस, 1 जुलाई से लागू

Dr. Nigar Johar becomes first woman to achieve three star rank in Pakistan Army | डॉ. निगार जौहर बनीं लेफ्टिनेंट जनरल, पाक आर्मी में थ्री स्टार रैंक हासिल करने वाली पहली महिला


  • साल 2017 में निगार को मेजर जनरल बनाया गया था, तब वह यह रैंक हासिल करने वाली तीसरी महिला थीं
  • निगार पाकिस्तान के श्वाबी जिले के खैबर पख्तूनख्वा की रहने वाली हैं, एक डॉक्टर होने के साथ-साथ वह शूटर भी हैं

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 06:12 PM IST

इस्लामाबाद. डॉ. निगार जौहर पाक आर्मी में लेफ्टिनेंट जनरल बनीं हैं। वह पाकिस्तान की पहली महिला हैं, जिन्हें पाक आर्मी में थ्री स्टार रैंक मिली है। इसके साथ ही उन्हें पाक सेना की पहली महिला सर्जन जनरल भी नियुक्त किया गया है। साल 2017 में निगार को मेजर जनरल बनाया गया था। तब वह यह रैंक हासिल करने वाली तीसरी महिला थीं। निगार पाकिस्तान के श्वाबी जिले के  खैबर पख्तूनख्वा की रहने वाली हैं।

निगार एक डॉक्टर होने के साथ-साथ माहिर शूटर भी हैं। लेफ्टिनेंट जनरल जौहर पाकिस्तान आर्मी के मेडिकल कोर में पोस्टेड हैं। वह साउथ एशिया के सबसे बड़े आर्मी अस्पताल की कमान संभाल रही हैं, जहां हर दिन 700 से ज्यादा रोगी इलाज के लिए आते हैं। निगार को 2015 में सीएमएच झेलम का कमांडेंट नियुक्त किया गया था। इस मुकाम पर पहुंचने वाली वह पहली महिला थीं।

पिता भी आर्मी में कर्नल रहे

निगार पाकिस्तान के पूर्व सेना अधिकारी रिटायर्ड मेजर मोहम्मद आमिर की भतीजी हैं। वे इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) में थे। उनके पिता कर्नल कादिर भी आईएसआई में थे। करीब 30 साल पहले एक रोड एक्सीडेंट में उनकी मौत हो गई। इस हादसे में उनकी पत्नी की भी जान गई थी। 

निगार को 2015 में इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के एक वीडियो में दिखाया गया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि “पाकिस्तान मेरा देश है और मैं यहां पैदा हुई। मुझे यहां आगे बढ़ने का मौका मिला। यह पहला ऐसा देश है जिसकी आर्मी में महिला जनरल ऑफिसर है।”