30 People Dead In Punjab Jalandhar From Toxic Liquor; Chief Minister Amarinder Singh Order A High-level Probe | पंजाब पुलिस ने मुख्यमंत्री कैप्टन के हुक्म की तामील की होती तो 30 जिंदगियां मौत में नहीं बदलती

30 People Dead In Punjab Jalandhar From Toxic Liquor; Chief Minister Amarinder Singh Order A High-level Probe | पंजाब पुलिस ने मुख्यमंत्री कैप्टन के हुक्म की तामील की होती तो 30 जिंदगियां मौत में नहीं बदलती


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जालंधर3 घंटे पहले

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रोपड़ में पुलिस द्वारा पकड़ी गई शराब की भट्ठियां। यह फाइल फोटो बीती 12 जून को की गई कार्रवाई की है, जब पुलिस ने 10 घंटे के ऑपरेशन के दौरान 7 भटि्ठयां और 2 लाख लीटर लाहन पकड़ी थी।

  • तस्करों ने कर्फ्यू के 53 दिन के भीतर तस्करों ने करीब 500 करोड़ रुपए की शराब पार लगा दी, 1800 की पेटी 3000 हजार रुपए में बेची गई
  • आप नेता के पत्र से संज्ञान ले सीएम ने दिए थे अवैध शराब की बिक्री नहीं रोक पाने वाले पुलिस असफराें पर कार्रवाई के आदेश
  • ताजा मामले में अमृतसर देहात के एसएसपी विक्रमजीत दुग्गल ने थाना प्रभारी बिक्रमजीत सिंह को सस्पेंड कर 4 मेंबरी एसआईटी बनाई

पंजाब के तीन जिलों अमृतसर, तरनतारन और गुरदासपुर में जहरीली शराब की वजह से बीते दो दिन में 30 लोगों की जान चली गई। एक तो कोरोना की महामारी की वजह से सूबे में रोज 10-11 लोगों की जान जा रही है, अब ऊपर से यह जहरीली अवैध शराब का संकट। हालांकि इस मामले की न्यायिक जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट तो आएगी-तब आएगी, पर उससे पहले ही सौ का जोड़ यह है कि इस मसले पर न तो पंजाब पुलिस प्रशासन गंभीर है और न ही प्रदेश की सरकार। अगर शराब के अवैध कारोबार को सच में गंभीरता से लिया गया होता तो शायद आज इतना बड़ा संकट खड़ा नहीं हुआ होता।

ठेके बंद थे, पर खूब फला-फूला अवैध शराब का कारोबार

गौरतलब है कि पंजाब में सरकार ने लोगों को कोराना की महामारी से बचाने के लिए जब कर्फ्यू का ऐलान किया तो हर काम ठप हो गया था। इसी बीच शराब के ठेके बंद थे, पर सूबे में अवैध शराब का धंधा खूब फला-फूला। जब तक कैप्टन सरकार को केंद्र से शराब बेचने की इजाजत मिली, तब तक तस्करों ने करोड़ों रुपए कूट डाले। हरियाणा व राजस्थान से शराब की तस्करी जारी रही, वहीं बॉर्डर के इलाकों में भी अवैध शराब निकालने का धंधा जोरों पर रहा। कर्फ्यू के दौरान सूबे में शराब तस्करी की संबंधी पड़ताल के बाद दैनिक भास्कर ने खुलासा किया था कि तस्करों ने कर्फ्यू के 53 दिन के भीतर करीब 500 करोड़ रुपए की शराब पार लगा दी। 1800 रुपए शराब की पेटी 3000 हजार में बेची गई।

इतना ही नहीं, इसके बाद 12 जून को भी रोपड़ एसएसपी स्वप्न शर्मा समेत पंजाब पुलिस की 22 टीमों ने लगभग 10 घंटे के लंबे ऑपरेशन में पंजाब-हिमाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित गांव मजारी में शराब की 7 चालू भटि्ठयां और दो लाख किलो लाहन बरामद की थी। माना जा रहा है कि यह अब तक की सूबे में सबसे बड़ी कार्रवाई थी।

उठते रहे हैं पुलिस की शह के आरोप

हालांकि, इस दौरान 22 जिलों के विभिन्न थानों में 15 मई तक पुलिस ने तस्करी के करीब 1200 मामले दर्ज किए और 900 से ज्यादा लोग गिरफ्तार और करीब 2 लाख लीटर लाहन (कच्ची शराब), सैकड़ों बोतलें शराब भी बरामद की। बावजूद इसके 500 करोड़ का अवैध शराब का कारोबार पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत से नहीं हो रहा था, इस बात की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। आम आदमी पार्टी के सुनाम से विधायक अमन अरोड़ा ने शराब माफिया के सरकारी तंत्र से गठजोड़ के बारे में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा तो कैप्टन ने डीजीपी दिनकर गुप्ता से इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने के आदेश दिए थे।

आदेश आदेश ही बनकर रह गया, अब तक नहीं हुई काली भेड़ों पर कार्रवाई

कैप्टन ने दो-टूक चेतावनी दी थी कि उन सब-डिवीजनों के डीएसपी और एसएचओ के विरुद्ध तुरंत एक्शन लें, जिनके इलाके में ऐसी गतिविधियां सामने आती हों। डीजीपी ने सभी पुलिस कमिश्नरों और जिला पुलिस प्रमुखों को 23 मई तक जिला और पुलिस थाना स्तर पर शराब तस्करों की पहचान करने के लिए जरूरी हिदायतें जारी की। आपदा प्रबंधन एवं महामारी अधिनियम की धाराओं समेत अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई करने को कहा गया। पुलिस प्रमुख ने यह चेतावनी भी दी कि इस उद्देश्य में असफल होने की सूरत में संबंधित थाना प्रमुख का अन्य जगह तबादला किया जाएगा और विभागीय कार्रवाई होगी। इसके अलावा ऐसा अधिकारी भविष्य में एसएचओ बनने और सार्वजनिक डीलिंग की नियुक्ति के लिए अयोग्य होगा। दूसरी ओर यह भी सत्य है कि कहीं भी पुलिस विभाग की काली भेड़ों पर ऐसी कार्रवाई की कोई खबर अभी तक सामने नहीं आई है। इसी का नतीजा है कि शराब तस्कर आए दिन लोगों की जिंदगी से खेल रहे हैं।

कर्फ्यू के दौरान पुलिस पर हमले भी किए शराब तस्करों नेइतना ही नहीं, शराब तस्करों की तरफ से पुलिस पर हमले की खबरें भी आती रही हैं। कोरोना कर्फ्यू के तीसरे दिन की ही बात है, जब जालंधर में शराब तस्करों ने गश्त कर रही पुलिस पार्टी पेट्रोल बम फेंक मारा तो अमृतसर में खुलेआम गोली चला दी गई थी। इसी तरह सूबे के कई इलाकों से ऐसी घटनाएं गाहे-बगाहे आती ही रहती हैं।

फिर उठी पुलिस वालों के काम पर अंगुली

हालिया मामले में मृतकों के परिजनों ने इलाके में अवैध शराब का कारोबार पुलिस की मिलीभगत से चल रहे होने की बात ही है। इनका कहना है कि सस्ती शराब के चक्कर में युवाओं की जिंदगी से खेला जा रहा है और पुलिस कुछ नहीं कर रही। पीड़ितों की मानें तो अकेले मुच्छल गांव में ही 30 घर देसी शराब निकालकर बेचते हैं।

इस लापरवाही के उजागर होने के बाद अमृतसर देहात के एसएसपी विक्रमजीत दुग्गल ने थाना प्रभारी बिक्रमजीत सिंह को सस्पेंड करते हुए एसपी (डी) गौरव तुर्रा की अध्यक्षता में 4 मेंबरी एसआईटी बना दी है। साथ ही तरनतारन के डीसी कुलवंत सिंह धूरी का कहना है कि मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं।

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