A target of 1.75 lakh crores business by 2025 from defense production, emphasis on reducing imports and increasing exports; FDI investment limit to be increased from 49 to 74% | 2025 तक डिफेंस प्रोडक्शन से 1.75 लाख करोड़ के कारोबार का लक्ष्य, सरकार का जोर इम्पोर्ट कम करने और एक्सपोर्ट बढ़ाने पर

A target of 1.75 lakh crores business by 2025 from defense production, emphasis on reducing imports and increasing exports; FDI investment limit to be increased from 49 to 74% | 2025 तक डिफेंस प्रोडक्शन से 1.75 लाख करोड़ के कारोबार का लक्ष्य, सरकार का जोर इम्पोर्ट कम करने और एक्सपोर्ट बढ़ाने पर


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नई दिल्ली2 मिनट पहले

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केंद्र सरकार का कहना है कि नई डिफेंस प्रोडक्शन पॉलिसी के जरिए डिफेंस प्रोडक्शन इंडस्ट्री को विकसित किया जा सकेगा। इसमें लड़ाकू विमानों के रिकंस्ट्रक्शन से लेकर नए लड़ाकू विमान, हथियार, रक्षा उपकरण तैयार करना भी शामिल है। 

  • कई तरह के हथियारों के आयात पर लगेगी रोक, ऐसे हथियार देश में बनेंगे और दूसरे देशों को भी निर्यात करने पर फोकस
  • अगले पांच साल में डिफेंस और एरोस्पेस क्षेत्र में 35,000 करोड़ रुपये के इक्यूपमेंट और अन्य सेवाओं के निर्यात की प्लानिंग

केंद्र सरकार ने देश में डिफेंस प्रोडक्शन से 2025 तक 1.75 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य रखा है। सरकार इसके जरिए कोरोनाकाल में अर्थव्यवस्था को पहुंचे नुकसान की भरपाई करना चाहती है। डिफेंस प्रोडक्शन को लेकर सोमवार को रक्षा मंत्रालय ने डिफेंस प्रोडक्शन एंड एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी का मसौदा जारी किया।

ड्राफ्ट के मुताबिक, अगले पांच साल में डिफेंस और एरोस्पेस क्षेत्र में 35,000 करोड़ रुपये के इक्यूपमेंट और अन्य सेवाओं के निर्यात की प्लानिंग है। सरकार का मानना है कि इस नई पॉलिसी के जरिए डिफेंस प्रोडक्शन इंडस्ट्री को विकसित किया जा सकेगा। इसमें लड़ाकू विमानों के रिकंस्ट्रक्शन से लेकर नए लड़ाकू विमान, रक्षा उपकरण, हथियार तैयार करना भी शामिल है।

डिफेंस प्रोडक्शन में एफडीआई के जरिए निवेश की सीमा बढ़ाई गई
केंद्र सरकार ने देश में बने सैन्य उत्पादों की खरीददारी के लिए इस बार अलग से बजट पास किया है। इसके अलावा डिफेंस प्रोडक्शन के क्षेत्र में एफडीआई (विदेशी निवेश) की सीमा 49% से बढ़ाकर 74% कर दी है।

कई हथियारों के आयात पर रोक लगेगी
नई पॉलिसी के तहत कई हथियारों के इम्पोर्ट पर रोक लगाई जाएगी। ये ऐसे हथियार होंगे जो मेक इन इंडिया के तहत भारत में ही बनेंगे। यही नहीं इसका एक्सपोर्ट भी किया जा सकेगा। अगले पांच साल में भारतीय सुरक्षा बलों के सैन्य उत्पादों पर करीब 130 अरब डॉलर खर्च करने का अनुमान है। ऐसे में इसका काफी लाभ मिल सकेगा।

घरेलू डिजाइन पर जोर दिया जाएगा
मेक इन इंडिया के तहत जो भी रक्षा उत्पाद देश में तैयार होंगे, उसके लिए घरेलू डिजाइन पर ही जोर दिया जाएगा। कोशिश होगी कि नए सिरे से बेहतर उत्पाद तैयार किया जा सके। इसके लिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर ज्यादा फोकस दिया जाएगा। एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन से भी इसे जोड़ा जाएगा।

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