AGR Case : Supreme Court told telecom companies – Reassessment of outstanding amount will be contempt of court | सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आदेश नहीं माना तो टेलीकॉम कंपनियों के एमडी को जेल भेज देंगे


  • टेलीकॉम कंपनियों पर एजीआर के 1.47 लाख करोड़ रुपए बकाया, कोर्ट ने कहा- पूरी रकम चुकानी होगी
  • दूरसंचार विभाग ने टेलीकॉम कंपनियों को बकाया भुगतान के लिए 20 साल का वक्त देने पर विचार करने की अपील की थी
  • कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से पूछा- यह मामला फिर से खोलने की इजाजत किसने दी?
  • जो कुछ भी हो रहा है वह चौंकाने वाला है, पूरे देश को गुमराह किया जा रहा है: सुप्रीम कोर्ट

दैनिक भास्कर

Mar 18, 2020, 12:38 PM IST

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) मामले में कोर्ट ने कहा है कि टेलीकॉम कंपनियों पर बकाया राशि का फिर से आकलन (रीएसेसमेंट) करना कोर्ट की अवमानना होगी। जरूरत पड़ी तो हम सभी टेलीकॉम कंपनियों के एमडी को कोर्ट बुलाकर यहीं से जेल भेज देंगे। सरकार ने एजीआर के रीएसेसमेंट की इजाजत दी तो यह धोखा होगा। अगर कंपनियों को सेल्फ एसेसमेंट की इजाजत देंगे तो हम भी इस फ्रॉड में पार्टी बन जाएंगे। यह कोर्ट की प्रतिष्ठा का सवाल है। अदालत ने कहा कि जब टेलीकॉम डिपार्टमेंट की डिमांड मानी जा चुकी है तो फिर से आकलन कैसे किया जा सकता है। कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से पूछा कि रीएसेसमेंट और इस मामले को फिर से खोलने की इजाजत किसने दी? जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच ने कहा कि अदालत ने तो रीएसेसमेंट की इजाजत नहीं दी तो क्या हम मूर्ख हैं? इस मामले में जो कुछ भी हो रहा है वह चौंकाने वाला है। पूरे देश को गुमराह किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि कंपनियों ने कमाई की है, उन्हें भुगतान भी करना होगा। टेलीकॉम कंपनियों ने सेल्फ-एसेसमेंट या री-एसेसमेंट किया तो उन्हें अवमानना का दोषी माना जाएगा।

टेलीकॉम कंपनियों को ब्याज, पेनल्टी चुकानी होगी: कोर्ट
एजीआर मामले में टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। विभाग ने एजीआर के बकाया भुगतान के लिए टेलीकॉम कंपनियों को 20 साल का समय देने पर विचार करने की अपील की थी। कोर्ट ने कहा है कि 24 अक्टूबर 2019 के फैसले के मुताबिक ही टेलीकॉम कंपनियों को ब्याज और पेनल्टी चुकानी होगी। कंपनियों को भुगतान का समय देने की सरकार की याचिका पर अगली सुनवाई में विचार किया जाएगा। अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी। कोर्ट ने एजीआर मामले में छप रही खबरों पर भी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि अब ऐसा हुआ तो टेलीकॉम कंपनियों के एमडी जिम्मेदार होंगे।

टेलीकॉम कंपनियों पर एजीआर के 1.47 लाख करोड़ करोड़ चुकाने हैंं

कंपनी कुल बकाया (रुपए) अब तक कितना भुगतान किया (रुपए)
वोडाफोन-आइडिया 53,038 करोड़ 6,854 करोड़
भारती एयरटेल 35,586 करोड़ 18,000 करोड़
टाटा टेली 13,823 करोड़ 2,190 करोड़
रिलायंस जियो, रिलायंस कम्युनिकेशंस, बीएसएनएल, एमटीएनएल और अन्य पर बकाया     45,000 करोड़ रिलायंस जियो अपनी बकाया राशि 195 करोड़ रुपए भुगतान कर चुकी है।

एजीआर : सरकार और कंपनियों का कैलकुलेशन अलग-अलग था, इसलिए विवाद शुरू हुआ
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 24 अक्टूबर 2019 को टेलीकॉम विभाग के पक्ष में फैसला दिया था। टेलीकॉम कंपनियों और सरकार के बीच पिछले 14 साल से एजीआर को लेकर विवाद था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले टेलीकॉम ट्रिब्यूनल ने 2015 में टेलीकॉम कंपनियों के पक्ष में फैसला दिया था। ट्रिब्यूनल ने कहा था कि किराए, स्थायी संपत्ति को बेचने पर होने वाले प्रॉफिट, डिविडेंड और ब्याज जैसे नॉन कोर रिसोर्सेस से मिली रकम को छोड़कर बाकी रेवेन्यू एजीआर में शामिल होगा। विदेशी मुद्रा विनिमय (फॉरेक्स) एडजस्टमेंट को भी एजीआर में शामिल किया गया। हालांकि, फंसे हुए कर्ज, विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव और कबाड़ की बिक्री को इससे अलग रखा गया। विवाद इसलिए था क्योंकि सरकार किराए, स्थायी संपत्ति को बेचने पर होने वाले प्रॉफिट और कबाड़ बेचने से मिलने वाली रकम को भी एजीआर में शामिल करती है। 24 अक्टूबर 2019 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की गणना को ही सही माना था। टेलीकॉम कंपनियों को इसी आधार पर ब्याज और पेनल्टी समेत बकाया फीस चुकाने का आदेश दिया था। कंपनियों को एजीआर का 3% स्पेक्ट्रम फीस और 8% लाइसेंस फीस के तौर पर सरकार को देना होता है।