America: Trump will release advertisement tomorrow to woo Indian people voters in election | अमेरिका: चुनाव में भारतवंशी वोटर्स को लुभाने के लिए कल विज्ञापन जारी करेंगे ट्रम्प


  • ट्रम्प भारतवंशी वोटर्स को प्रभावित करने के लिए फेसबुक, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डिजिटल विज्ञापन लॉन्च करेंगे 
  • अमेरिका में 14 लाख भारतीय मूल के वोटर्स हैं, 2016 चुनाव में 84% भारतीय अमेरिकियों ने ट्रम्प के खिलाफ वोट दिया था 

Dainik Bhaskar

Mar 10, 2020, 12:43 PM IST

न्यूयॉर्क (मोहम्मद अली). अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आगामी नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर भारतीय मूल के अमेरिकी मतदाताओं को अपने पक्ष में लाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। भारत दौरे से लौटने के तुरंत बाद ट्रम्प ने उन्हें प्रभावित करने के लिए तीन डिजिटल विज्ञापन लॉन्च करने की योजना बनाई। ये विज्ञापन बुधवार को फेसबुक, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लॉन्च किए जाएंगे। अमेरिका में ऐसा पहली बार हो रहा है कि रिपब्लिकन राष्ट्रपति के चुनावी कैंपेन में भारतवंशी समुदाय के लिए एड कैंपेन आ रहा है। इसकी वजह यह है कि चुनाव में 14 लाख भारतीय मूल के अमेरिकी निर्णायक हो सकते हैं। सबसे बड़ी और दिलचस्प बात यह है कि 2016 में हुए पिछले चुनाव में 84% भारतीय अमेरिकियों ने ट्रम्प के खिलाफ वोट दिया था। 

22 भारतवंशियों को प्रशासन में जगह, अब तक सबसे बड़ा गैर-अमेरिकी दल
राष्ट्रपति बनने के बाद से ट्रम्प लगातार भारतवंशियों में पैठ बना रहे हैं। वे प्रशासन में 22 भारतवंशियों को शामिल कर चुके हैं। यह किसी भी प्रवासी समूह का अब तक का सबसे बड़ा दल है। इनमें निक्की हेली यूएन में अमेरिकी राजदूत, सीमा वर्मा को मेडीकेयर और मेडीकेटेड सर्विस का प्रशासक बनाया । राज शाह को व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर है, वहीं अजीत पाई फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन के चेयरमैन हैं।

भारतवंशी: 2016 में 84% वोट ट्रम्प के खिलाफ थे:

  • 14 लाख रजिस्टर्ड वोटर, सबसे अधिक वोटिंग प्रतिशत। एशियन अमेरिकन और पैसिफिक आइलैंडर्स डेटा के मुताबिक 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में 12 लाख भारतवंशी रजिस्टर्ड वोटर थे। इस बार 14 लाख होने की उम्मीद है। पिछली बार प्रवासियाें में सबसे ज्यादा 62% वोटिंग भारतवंशियों की रही है। 
  • 2016 के चुनाव में 84% भारतीयों ने ट्रम्प का विरोध किया था। 62% भारतवंशी खुद को डेमोक्रटिक बताते हैं। 2016 के चुनाव में 80% से ज्यादा भारतीयों ने ट्रम्प की प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को वोट दिया था। 
  • फिलहाल अमेरिका में 5 भारतीय अमेरिकी सांसद हैं। ये सभी डेमोक्रेटिक हैं। इनमें रो खन्ना (कैलिफोर्निया), प्रमिला जयपाल (वॉशिंगटन), राजा कृष्णमूर्ति (इलिनोइस), तुलसी गैबॉर्ड (हवाई) और कमला हैरिस (कैलिफोर्निया) शामिल हैं।

विज्ञापन कैंपेन: ट्रम्प, मेलानिया और ताजमहल: 

  • ट्रम्प पहले विज्ञापन में मेलानिया के साथ ताज महल के सामने दिख रहे हैं। इसमें वे कह रहे हैं कि भारतीय बिजनेस में टाइटन हैं और इनोवेशन और टेक्नोलॉजी की दुनिया में मास्टर हैं। मैं आपके लिए हमेशा संघर्ष करता रहूंगा।
  • दूसरे विज्ञापन में ट्रम्प मोदी के साथ हैं। इसमें वे कह रहे हैं कि अमेरिका भारत को प्यार करता है। अमेरिका भारत के साथ मजबूत साझेदारी की इच्छा रखता है। 

इवांका की टि्वटर डिप्लोमेसी
भारत में बने मीम्स पर इवांका ने संजीदा जवाब दिए हैं। सिंगर दिलजीत दोसांझ ने इवांका के ताजमहल विजिट की तस्वीर में  खुद को इवांका के साथ दिखाया था। इवांका ने लिखा- शुक्रिया, मुझे शानदार ताजमहल दिखाने के लिए। यह अनुभव मैं कभी नहीं भूल पाउंगी। दूसरे मीम पर लिखा- मैं भारतीयों की गर्मजोशी की सराहना करती हूं। मैंने कई नए दोस्त बनाए हैं।
 

भास्कर एक्सपर्ट : प्रो. संगेय मिश्रा, न्यूजर्सी की ड्रू यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंस और इंटरनेशनल रिलेशंस विभाग में प्रोफेसर

ट्रम्प की नीतियां अप्रवासी भारतीय विरोधी रही हैं, ऐसे में भारतीयों का उनकी तरफ शिफ्ट होना मुश्किल है

1990 के दशक में भारतवंशी क्रमशः डेमोकेट्स और रिपब्लिकन को 60:40 अनुपात में समर्थन देते रहे,  लेकिन 9/11 के हमले के बाद अमेरिका में अप्रवासी समुदाय के खिलाफ हमले बढ़ गए। रिपब्लिकन पार्टी ने खुद को ईसाई धर्म का प्रचार करने वाले और अप्रवासियों के प्रति नफरत रखने वाले समूहों से जोड़ लिया। भारतीयों का रिपब्लिकन पार्टी की तरफ झुकाव कम होता गया। 2016 में तो 20% से कम भारतीयों ने रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन किया। इसकी वजह यह रही कि रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रम्प ने अपने प्रचार में अप्रवासियों के खिलाफ सख्त नीति बनाने की बात जोरशोर से उठाई। 
 

अभी भी बड़े पैमाने पर ट्रम्प को समर्थन मिलना फिलहाल संभव नहीं दिख रहा है। क्योंकि, आव्रजन पर ट्रम्प की नीतियों ने उच्च शिक्षित पेशेवर भारतीय अमेरिकियों के हितों को चोट पहुंचाई है। उन्होंने  एच-1बी वीसा की संख्या सीमित करने के ट्रम्प प्रशासन के फैसले की आलोचना की है। इसके अलावा, ट्रम्प प्रशासन ने एच-1बी वीसा पाने वालों के जीवनसाथी के वर्क परमिट को रद्द करने की इच्छा भी व्यक्त की है। हालांकि ऐसा भी हो सकता है कि कुछ भारतवंशी डोनाल्ड ट्रम्प को मोदी से संबंधों के नजरिए से देखें।