Corona has devastated three densely populated areas of the world, now knocked down in Mumbai’s Dharavi slum, 1.5 million poor live here | दुनिया के तीन घनी आबादी वाले क्षेत्रों में तबाही मचा चुका है कोरोना, अब मुंबई के धारावी झुग्गी बस्ती में दी दस्तक, यहां 15 लाख गरीब रहते हैं


  • मुंबई के धारावी झुग्गी बस्ती में अभी तक छह कोरोना पॉजिटिव सामने आ चुके हैं, एक की मौत हो चुकी है, मुंबई में कुल 30 संक्रमितों की जान जा चुकी है
  • लोम्बार्डी में सबसे ज्यादा 8 हजार लोगों की मौत हुई, न्यूयॉर्क में 2500 लोग दम तोड़ चुके हैं; विशेषज्ञ बोले, आग की तरह धारावी में फैल जाएगा कोरोना 

दैनिक भास्कर

Apr 05, 2020, 07:53 PM IST

मुंबई. कोरोनावायरस ने दुनियाभर को अपनी चपेट में ले रखा है। अब तक 12 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। 65 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा काफी तेजी से बढ़ रहा है। कोरोना का सबसे ज्यादा प्रभाव घनी आबादी वाले इलाकों में देखा गया है। फिर वह चीन का वुहान शहर हो जहां से इस वायरस की शुरूआत हुई या इटली का लोम्बार्डी और अमेरिका का न्यूयॉर्क। इन तीनों जगहों पर अभी तक कोरोना ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। लेकिन अब इस वायरस ने एशिया के सबसे बड़े झुग्गी बस्ती यानी मुंबई की धारावी इलाके में दस्तक दे दी है। यहां महज 613 हेक्टेयर में करीब 15 लाख लोग झुग्गियों में रहते हैं। ये ज्यादातर दिहाड़ी मजदूर और गरीब तबके से हैं। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक यहां अभी तक संक्रमण के 6 मामले सामने आ चुके हैं। एक की मौत हो चुकी है। पूरे मुंबई का आंकड़ा देखें तो यहां सबसे ज्यादा 30 लोग दम तोड़ चुके हैं। यही कारण है कि धारावी में कोरोना का मामला सामने आते ही डर का माहौल कायम हो गया है। दुनियाभर के विशेषज्ञों ने इसको लेकर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार ने अगर तुरंत जरूर कदम नहीं उठाए तो यहां लोम्बार्डी, वुहान और न्यूयॉर्क से ज्यादा बुरी हालत देखने को मिलेगी। पेश है भास्कर की खास रिपोर्ट…  

चीन के वुहान की यह ताजा तस्वीर है। अब यहां हालात काबू में है। लोग सुरक्षा के लिए पन्नी से बने जैकेट पहन रहे।

वुहान में सवा करोड़ लोग रहते, यहीं से कोरोना की शुरूआत हुई

चीन के हुबेई प्रांत में स्थित वुहान से ही कोरोनावायरस की शुरूआत हुई। यहां की आबादी करीब सवा करोड़ है। मध्य चीन में सबसे ज्यादा आबादी वाला क्षेत्र है। यह शहर करीब 8 हजार किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला  है। जब कोरोना संक्रमण फैला तो यहां 80 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हो गए थे। अब हालात यहां सामान्य है। 1300 से ज्यादा मौतें वुहान और आस-पास के क्षेत्रों में हुईं। हालांकि यहां सुविधाएं काफी बेहतर रहीं इसके चलते चीनी सरकार  ने आसानी से संक्रमण पर काबू पा लिया। यहां के लोगों में स्वच्छता के प्रति भी काफी जागरूकता थी। 

यह तस्वीर इटली के लोम्बार्डी की है। यहां कोरोना ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई। 8 हजार लोग अभी यहां दम तोड़ चुके हैं।

इटली के लोम्बार्डी में सबसे ज्यादा मौतें
इटली का लोम्बार्डी शहर कोरोना से मरने वालों का सबसे बड़ा केंद्र साबित हुआ। 420 किलोमीटर की दूरी में फैले इस शहर में करीब एक करोड़ लोग रहते हैं। यह इटली का सबसे घनी आबादी वाला क्षेत्र है। कोरोना से यहां करीब 8 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। 63 हजार लोग संक्रमित हो चुके हैं। लोम्बार्डी में भी स्वास्थ्य चिकित्सा की सुविधाएं भारत के मुकाबले काफी बेहतर है। पूरे विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इटली को स्वास्थ्य मामलों में दुनिया में दूसरा सर्वश्रेष्ठ देश माना है। इसके बावजूद यहां संक्रमण ने ऐसा पांव पसारा की हजारों लोगों की मौत हो गई। पूरा सिस्टम धड़ाम हो गया।  

न्यूयॉर्क में डॉक्टर्स की मदद के लिए हेल्थ वर्कर्स का कैंप लगा हुआ है। लोग जरूरी सामान की यहीं से सप्लाई करते हैं। 

न्यूयॉर्क में अब तक 2 हजार से ज्यादा लोगों की मौत
यूनाइटेड स्टेट अमेरिका में अब तक कोरोना के तीन लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। 8 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। यहां का सबसे घनी आबादी वाला इलाका न्यूयॉर्क है। यहां की आबादी करीब 80 लाख है। वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक न्यूयॉर्क में अब तक  65 हजार लोगों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। जबकि मरने वालों की संख्या 2 हजार 254 है। यह आंकड़ा काफी तेजी से बढ़ रहा है। यहां भी स्वास्थ्य सेवाएं भारत के मुकाबले काफी बेहतर है और लोगों में हाईजिन की नॉलेज है। लोग खुद से साफ-सफाई और बचाव का ख्याल रखते हैं।  

यह तस्वीर मुंबई की धारावी झुग्गी बस्ती की है। गंदगी देखकर अंदाजा लगा सकते हैं कि यहां कोरोना फैलने की सबसे ज्यादा संभावना है। 

धारावी में क्यों चिंता का सबसे बड़ा केंद्र ?
लोम्बार्डी, वुहान, न्यूयॉर्क की अपेक्षा धारावी कोरोना के लिए सबसे बड़ा चिंता का विषय बन चुका है। ऐसा इसलिए क्योंकि महज ढ़ाई किलोमीटर के दायरे में यहां करीब 15 लाख लोग रहते हैं। ये मजदूर, गरीब तबसे के लोग हैं। भारत के कई ऐसे जिले हैं जहां इतनी आबादी नहीं होगी। सुविधाओं और स्वच्छता के मामले में इसका स्तर सबसे नीचे है। एक-एक झुग्गी में दस से 15 लोग रहते हैं। ऐसे में कोरोना के लिए सबसे जरूरी सोशल डिस्टेंसिंग यहां कभी मेनटेन नहीं हो सकती है। बड़ी संख्या में लोग एक ही जगह स्नान करते हैं। शौच करते हैं। हर किसी का एक-दूसरे के घर आना-जाना होता है। यही कारण है कि यहां संक्रमण काफी तेजी से फैल सकती है। अगर ऐसा होता है तो यह काफी भयावह स्थिति होगी। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे भी इस बात को स्वीकार करते हैं। मीडिया से बात करते हुए टोपे कहते हैं, “अब तक ये बीमारी एक खास वर्ग तक सीमित थी। इसे आम जनता में नहीं फैलना चाहिए। हमारा उद्देश्य भी यही है। हमने अब तक जो कदम उठाए हैं, वो इन्हीं उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए तय किए थे। लेकिन जब धारावी जैसी सघन आबादी वाली जगह से मरीज सामने आते हैं तो ये हमारे लिए चिंता का विषय है। अब सरकार कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग से लेकर प्रोटोकॉल से जुड़े सभी कदमों को उठाएगी ताकी इसे यहीं रोका जाए।”    

धारावी के एक-एक झुग्गी में 10 से 15 लोग रहते हैं। यहां एक शौचालय का 200 से ज्यादा लोग प्रयोग करते हैं।

पहले मरीज के फ्लैट में रुके थे तबलीगी जमात के लोग
धारावी में जिस 56 वर्षीय युवक की जान इस खतरनाक वायरस की वजह से गई, वह दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में तबलीगी जमात के कार्यक्रम में हिस्सा लेकर आए लोगों के संपर्क में आया था। जानकारी के मुताबिक, जमात में शामिल होकर 22 मार्च को मुंबई लौटीं पांच महिलाएं मृतक के ही एक अन्य घर में रुकी थीं। बीएमसी ने मृतक के 15 हाई रिस्क कॉन्टैक्ट्स का कोरोना टेस्ट करवाया था। निजामुद्दीन मरकज में तबलीगी जमात के कार्यक्रम में करीब 13 हजार लोगों ने हिस्सा लिया था, जिनमें से 1000 से ज्यादा के कोरोना संक्रमित होने की जानकारी अभी तक सामने आई है। धारावी में पहला मामला 1 अप्रैल को आया था और इसके बाद से इसकी संख्या लगातार बढ़ रही है। 

डॉ. कृतिका कपाल्ली, असिस्टेंट प्रोफेसर, स्टेनफॉर्ड यूनिवर्सिटी

डॉ. कृतिका बोलीं, आग की तरह फैल जाएगा कोरोना
इबोला, एचआईवी जैसी कई संक्रामक बीमारी पर काम करने वाली डॉ. कृतिका कपाल्ली ने धारावी को लेकर चिंता जाहिर की है। डॉ. कृतिका स्टेनफॉर्ड यूनिवर्सिटी के संक्रामक रोग विभाग में असिसटेंट प्रोफेसर हैं। उन्होंने धारावी में पहला मामला सामने आने के बाद ही ट्विट किया कि “मैं इसे लेकर पिछले कई महीनों से चिंतित थी। भारत की आबादी और धारावी जैसे बस्ती को देखते हुए यह चिंता जायज है। अब यह जंगल की आग की तरह फैल सकता है। अकल्पनीय ढंग से मौत और तबाही ला सकता है।”