Coronavirus Across nation, trace contacts of Tabligh meeting at Markaz Nizamuddin in delhi news and updates | निजामुद्दीन की मरकज बिल्डिंग से 2 हजार से ज्यादा लोग निकाले गए, यहां से गए लोगों में 120 संक्रमित मिले


  • निजामुद्दीन मरकज के धार्मिक कार्यक्रम में देश के 20 से ज्यादा राज्यों से लोग शामिल हुए थे, अब इनकी तलाश की जा रही है 
  • ऐसी आशंका जताई जा रही है कि करीब 350 से ज्यादा लोग कोरोना संदिग्ध हो सकते हैं, केंद्र सरकार ने आदेश दिया है कि इन्हें खोजकर अलग-थलग किया जाए

दैनिक भास्कर

Apr 01, 2020, 09:23 AM IST

नई दिल्ली. निजामुद्दीन की मरकज बिल्डिंग कोरोनावायरस का केंद्र बन गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां से सोमवार सुबह तक सभी 2000 से ज्यादा जमातियों को बाहर निकाल लिया गया है। उधर, यहां से निकले लोगों की तलाश में 20 से ज्यादा राज्यों में अभियान छेड़ा गया है। इनमें से कई लोगों को ट्रेस कर लिया गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि मरकज से गए 120 लोग कोरोना पॉजिटिव मिल चुके हैं। इनमें से 77 अकेले तमिलनाडु में हैं। 9 मरीज अंडमान  निकोबार, 4 आंध्र प्रदेश और दिल्ली में अभी तक 24 मरीज पॉजिटिव पाए गए हैं। उधर, तेलंगाना में 6 मरीज मिले। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि यह मामले और बढ़ सकते हैं।

दिल्ली सरकार मंगलवार शाम तक मरकज से 1,548 लोगों को निकाल चुकी थी। कोरोना के लक्षण वाले 500 से ज्यादा लोग अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी क्वारैंटाइन में हैं। 441 लोगों में से 417 को बिना जांच करवाए कोरोना पेशेंट मानकर इलाज शुरू हो गया है। सरकार की चिंता इसलिए बढ़ी हुई है कि मरकज से गए दो हजार से अधिक विदेशी जमाती देशभर में इधर-उधर घूम रहे हैं। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को इन्हें ढूंढ़कर तुरंत देश से बाहर निकालने का आदेश दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, मरकज से गए संक्रमितों के संपर्क में 20 राज्यों के 16 शहरों में कम से कम 10 हजार लोग आए हैं। राज्यों को भी इन लोगों की सूची भेज दी गई है। मरकज में संक्रमण का खुलासा होने के बाद केंद्र ने देशभर के 10 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में कोरोना के 16 हॉटस्पॉट चिह्नित किए हैं। सोमवार तक ऐसे 10 हॉटस्पॉट थे। ये वे जगहें हैं, जहां संक्रमण का सामुदायिक फैलाव हो सकता है।

20 राज्यों में संक्रमण का खतरा
मरकज में 1 से 15 मार्च के बीच हुए कार्यक्रम में देश-विदेश के 5 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए थे। लेकिन, इसके बाद भी करीब 2000 से ज्यादा लोग यहां रुके रहे, जबकि ज्यादातंर लॉकडाउन से पहले अपने घरों को लौट गए। तेलंगाना में इस कार्यक्रम में शामिल होकर लौटे सबसे ज्यादा छह लोगों की मौत हुई है। यहां से संक्रमण का कनेक्शन दिल्ली समेत 20 राज्यों से जुड़ रहा है। इनमें तमिलनाडु, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, असम, उत्तरप्रदेश, तेलंगाना, पुडुचेरी, कर्नाटक, अंडमान निकोबार, आंध्रप्रदेश, श्रीनगर, दिल्ली, ओडिशा, प.बंगाल, हिमाचल, राजस्थान, गुजरात, मेघालय, मणिपुर और छत्तीसगढ़ शामिल है।

मरकज में शामिल होने के लिए 2100 विदेशी पहुंचे थे

  • गृह मंत्रालय ने कहा- इस साल मरकज में शामिल होने के लिए 2100 विदेशी पहुंचे थे। इनमें इंडोनेशिया, मलेशिया, थाइलैंड, नेपाल, म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका और किर्गिस्तान के लोग शामिल हैं। आमतौर पर मरकज में पहुंचने वाले विदेशी निजामुद्दीन में बंगलेवाली मस्जिद में अपने पहुंचने की सूचना देते हैं। अब तक मरकज में शामिल होने वाले 2,137 लोगों की पहचान करके उनकी मेडिकल जांच की जा चुकी है। 1339 लोगों को नरेला, सुल्तानपुरी, बक्करवाला, झज्जर और एम्स में क्वारैंटाइन किया गया है। 303 में कोरोना के लक्षण थे, जिन्हें दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों में दाखिल कराया है।
  • गृह मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि 21 मार्च तक हजरत निजामुद्दीन मरकज में 1 हजार 746 लोग ठहरे हुए थे। इनमें 216 विदेशी और 1530 भारतीय थे। मरकज के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में 824 विदेशी 21 मार्च तक तब्लीगी गतिविधियों में शामिल थे। राज्यों की पुलिस को देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद 824 विदेशियों की जानकारी दी गई थी, ताकि सभी की मेडिकल स्क्रीनिंग और क्वारैंटाइन के इंतजाम किए जा सकें। 28 मार्च को सभी राज्यों को भारतीय तब्लीगी जमात के लोगों की जानकारी इकठ्ठा करने की सलाह दी गई थी, ताकि उन्हें जांच के बाद क्वारैंटाइन किया जाए।

आयोजकों पर एफआईआर दर्ज 
दिल्ली पुलिस ने लॉकडाउन का उल्लंघन करते हुए धार्मिक सम्मेलन आयोजित किये जाने पर आयोजनकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है और मरकज को सील कर दिया है। पुलिस ने वीडियो जारी कर बताया है कि हमने 23 मार्च को ही मरकज के वरिष्ठ लोगों को कार्यक्रम न करने की सलाह दी थी।  मरकज बिल्डिंग में 1 से 15 मार्च तक धार्मिक कार्यक्रम हुआ था, जिसमें 5 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए थे। लेकिन कोरोना की वजह से देश में किए गए लॉकडाउन के बाद भी यहां दो हजार से ज्यादा लोग रुके रहे।