Coronavirus: an initiative to beat the corona from inside the prison wall – Coronavirus: जेल की दीवार के अंदर से कोरोना को मात देने की कवायद

Coronavirus: an initiative to beat the corona from inside the prison wall – Coronavirus: जेल की दीवार के अंदर से कोरोना को मात देने की कवायद


वाराणसी:

कोरोना से लड़ने के लिए पूरे देश में जागरूकता लाई जा रही है. इसका असर भी दिख रहा है. लोग अपने अपने तरीके से इसे रोकने की कोशिश में लगे हैं. ऐसे में भला जेल के कैदी कैसे पीछे रह सकते हैं. बनारस के सेन्ट्रल जेल के कैदी भी इस महामारी से लोगों को बचाने में अपनी भूमिका निभाना चाहते थे लिहाजा अब वे इस महामारी की वजह से आई मास्क की कमी को पूरा करने के लिए जेल में मास्क बनाने में जुट गए हैं. इनके ये मास्क कारगर भी हैं और सस्ते भी. 

जेल के अंदर कैदियों को वक्त का पता वहां लगे घंटे के बजने से होता है, पर जेल के कैदी दीवार के अंदर कैद होने के बाद भी बाहर आई हर मुसीबत से वाकिफ़ हैं. तभी जेल के अंदर के सिलाई केंद्र में मास्क बनाने का काम तेजी से चल रहा है. मास्क बनाने वाले इन कैदियों में से एक सलीम हैं जो लखनऊ में हुई एक हत्या के जुर्म में तेरह साल से बंद हैं. लेकिन जब बाहर कोरोना का कहर पता चला तो उन्होने फ़ौरन मदद करने के लिए अपने साथियों को इकट्ठा किया और मास्क बनाना शुरू कर दिया. मो सलीम बड़ी मासूमियत से बताते हैं कि “बाहर  जो महामारी फैली है तो हम टेलर हैं और हमारे साथी 16 लोग हैं तो वो भी जानते हैं. तो हम लोगों ने सोचा की बाहर महामारी फैली है तो जेल में भी लोग उसे इस्तेमाल करें और बाहर भी इस्तेमाल करें ताकि बचाव कर सकें. हम सबकी कोशिश है कि महामारी में सबका सहयोग मिले. 

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जेल में 16 कैदी वक्त के पाबंद होने के आलावा भी एक जूनून की तरह कोरोना से बचने के लिए मास्क बनाने में जुटे हैं. प्रतिदिन यहां डेढ़ सौ से दो सौ मास्क तैयार हो रहे हैं, जो जेल की ज़रूरत पूरी होने के बाद जेल के बाहर कैंटीन से दूसरे लोग भी ले रहे हैं. डिप्टी जेलर सेन्ट्रल जेल वाराणसी डीपी सिंह बताते हैं कि “हम लोगों ने सोचा कि मास्क इतनी मात्रा में बाजार से नहीं मिल पाएगा तो हमारे यहां सिलाई कमान चलती है, तो हमने बंदियों से कहा क्यों न मास्क तैयार किए जाएं. वो तैयार हो गए तो मास्क बनाने का काम शुरू हो गया. अभी हम अपने कैदियों और जो उनसे मिलने आ रहे हैं उनको दे रहे हैं. बाद में आसपास के इलाके में भी देंगे. 

वाराणसी के सेन्ट्रल जेल में तकरीबन 1700 सज़ायाफ्ता कैदी बंद हैं. इनसे मिलने के लिए भी दर्जनों लोग रोज़ आते हैं. लिहाजा जेल प्रशासन मिलाई के लिए जहां इनको इन्हीं के कैदी के बने मास्क पहनवा रहा है तो गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मी भी पूरी एहतियात के साथ इन्हें चेक कर रहे हैं. लेकिन इससे कहीं सबसे बड़ा काम दहेज़ उत्पीड़न में बंद मोईनुद्दीन और उनके साथी कर रहे हैं जो इस बिमारी के वक्त अपने साथी कैदियों को इस बात की ताक़ीद कर रहे हैं कि बाहर से उनके परिजन इस वक्त मिलाई करने न आएं जिससे ये बिमारी जेल के चारदीवारी के अंदर न आ सके. जेल की भीतरी दिवार के अंदर कैद बंदियों की बातें बाहरी दुनिया में कोरोना वायरस के  खतरे से अनजान बाहरी दुनिया के लोगों से ज़्यादा बड़ी नज़र आती हैं. 

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