Coronavirus completely clutches lungs, US doctors release 3-D video; Said- people see it and stay in homes to escape | फेफड़ों को जकड़ लेता है कोरोना; डॉक्टर ने बताया- लोग इसे देखें और बचने के लिए घरों में ही रहें


  • ​​​​​​अमेरिका के डॉक्टरों ने 59 साल के संक्रमित मरीज के फेफड़ों का वीडियो जारी किया
  • डॉक्टरों ने इसके जरिए यह समझाने की कोशिश की है कि कैसे कोरोनावायरस इंसान के फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है

दैनिक भास्कर

Mar 27, 2020, 05:26 PM IST

वॉशिंगटन. कोरोनावायरस 3 महीने से ज्यादा समय से दुनिया में फैल रहा है। वैज्ञानिक और डॉक्टर्स अभी तक इसकी दवा नहीं बना पाए, लेकिन इस बीच चल रहे शोध और जांच से हैरान करने वाली जानकारी मिल रही है। अमेरिका के द वॉशिंगटन डीसी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने 3डी वीडियो जारी किया है। यह 59 साल के एक कोरोना संक्रमित मरीज के फेफड़ों का है। डॉक्टरों ने इसके जरिए यह समझाने की कोशिश की है कि कैसे कोरोनावायरस इंसान के फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। इसे पता करने के लिए सीटी इमेजिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया। अभी तक यह टेक्नोलॉजी केवल कैंसर की जांच या फिर ऑपरेशन के समय प्रयोग में लाई जाती थी। पहली बार किसी कोरोना संक्रमित मरीज की इससे जांच हुई है। 

द वॉशिंगटन डीसी हॉस्पिटल के डॉक्टर की. मॉर्टमैन बताते हैं कि जिस मरीज का यह वीडियो जारी किया गया है वह कुछ दिन पहले बिल्कुल ठीक था। संक्रमित होने के बाद उसकी हालत काफी गंभीर है। आईसीयू में इलाज चल रहा है। वायरस ने उसके दोनों फेफड़ों को पूरी तरह से जकड़ लिया है। फेफड़ों में जो पीले धब्बे हैं, वह संक्रमण की स्थिति को बता रहे हैं। इसकी वजह से फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया था। 

हाई ब्लड प्रेशर के अलावा कोई बीमारी नहीं थी
डॉ. मॉर्टमैन बताते हैं, ’59 साल का यह संक्रमित मरीज पहले बिल्कुल ठीक था। उसे केवल हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत थी। लेकिन संक्रमित होते ही उसके दोनों फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया। उसे हाई सेटिंग वाले वेंटिलेटर पर रखा गया। लेकिन यह पर्याप्त नहीं था। फिर एक अन्य मशीन का प्रयोग किया गया, जो उसके शरीर में रक्त संचार करने में मदद करती है।’ डॉ. मॉर्टमैन कहते हैं, ‘यह कोई 70 या 80 साल का बीमार व्यक्ति नहीं था। इसे मधुमेह की बीमारी भी नहीं थी। इसके बावजूद वायरस ने इसके पूरे शरीर को काफी कमजोर बना दिया। अगर एक सप्ताह बाद फिर से इनके फेफड़ों का 360वीआर इमेज निकाला जाए तो हो सकता है इससे कहीं ज्यादा बदतर हालात मिले।”

वायरस शरीर में पहुंचता है तो इंसान की रोग प्रतिरोधक शक्ति (Imunity) उससे डटकर मुकाबला करती है।

काफी तेजी और आक्रमक तरीके से फैलता है वायरस

डॉ. मॉर्टमैन कहते हैं, ‘फेफड़ों पर पीले रंग का धब्बा संक्रमण और सूजन की स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं। 3डी इमेज से यह स्पष्ट है कि संक्रमण केवल एक ही हिस्से में नहीं है, बल्कि उसने दोनों फेफड़ों को पूरी तरह से जकड़ लिया। यह बताता है कि इंसान के शरीर में संक्रमण कितनी तेजी से और आक्रामक रूप से फैलता है। जब वायरस शरीर में पहुंचता है, तो इंसान की रोग प्रतिरोधक शक्ति (Imunity)उससे डटकर मुकाबला करती है। इसके चलते शरीर के अंग में सूजन आ जाती है। अगर इम्यून सिस्टम कमजोर हुआ तो वायरस हावी होने लगता है। फेफड़ों में भी इसी वजह से सूजन आ जाती है। यह ब्लड और ऑक्सीजन को फेफड़ों तक पहुंचने में रोकता है। यह फेफड़े से कार्बन डाइऑक्साइड को निकलने से भी रोकता है। मतलब फेफड़ा का काम करना बंद हो जाता है।”

सिर्फ 2-4 फीसदी मरीज हो पाएंगे रिकवर

  • डॉक्टर मॉर्टन ने अमेरिका के सीएनएन को बताया है कि जिन मरीजों के फेफड़ों पर इस तरह के असर पड़ेंगे, उन्हें सही होने में काफी समय लगेगा। इनमें से केवल 2-4% मरीज ही रिकवर हो पाते हैं।
  • डॉ. मॉर्टन कहते हैं कि 3 डी ईमेज कोरोना के लक्षण को स्पष्ट करने के लिए काफी है। खांसी और सांस की तकलीफ होना चिंता की बात है। इससे बचने का अभी केवल एकमात्र उपाय सोशल डिस्टेंसिंग है। इसलिए मैं चाहता हूं कि लोग इसे देखें और समझें कि वायरस क्या कर सकता है। लोगों को इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है।