Coronavirus: Government now strategizes rapid antibody blood test in hotspots – Coronavirus: सरकार ने अब हॉटस्पॉट इलाकों में रैपिड एंटीबॉडी ब्लड टेस्ट की रणनीति बनाई

Coronavirus: Government now strategizes rapid antibody blood test in hotspots – Coronavirus: सरकार ने अब हॉटस्पॉट इलाकों में रैपिड एंटीबॉडी ब्लड टेस्ट की रणनीति बनाई


Coronavirus: सरकार ने अब हॉटस्पॉट इलाकों में रैपिड एंटीबॉडी ब्लड टेस्ट की रणनीति बनाई

प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली:

Coronavirus Update: अब देशभर में कोरोना वायरस के हॉटस्पॉट और वहां की चुनौतियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने ख़ास योजना बनाई है. हॉटस्पॉट इलाकों में सरकार ने रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट को मंजूरी दे दी है. इसके लिए गाइड लाइन भी तैयार है. आख़िर एंटीबॉडी टेस्ट है क्या और स्वास्थ्य मंत्रालय को कैसे मदद मिलेगी? किसी को कोरोना है या नहीं इसको लेकर सटीक जानकारी का आधार…स्वैब के ज़रिए RT- PCR टेस्ट होता है जो गले या नाक से लिया जाता है. इसकी रिपोर्ट आने में 18 से 24 घंटों का वक़्त लगता है. पर अब हॉटस्पॉट इलाकों में जहां से कोरोना के ज़्यादा मामले आ रहे हैं वहां रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट की योजना है. 

ICMR के साइंटिस्ट डॉ मनोज मुरहेकर ने बताया कि  एंटीबॉडी शरीर में 7-10 में आता है. इसलिए रैपिड एंटीबाडी अर्ली डाइग्नोसिस के लिए ठीक नहीं. ये बताता है कि कोई वायरस से एक्सपोज़ था या नहीं.लेकिन हॉटस्पॉट एरिया में ये कारगर है. काफी लोगों को कम वक्त में कर पाएगा. 

यह प्रेग्नेंसी टेस्ट की तरह है. इसमें भी फिंगर से ब्लड सैंपल ले सकते हैं. आधा से एक घंटे में रिजल्ट आ जाता है. देशभर में कोरोना के कई हॉटस्पॉट हैं. हॉटस्पॉट वह इलाका होता है जहां कम वक्त में ही कोरोना के ज़्यादा मामले आ रहे हैं. साथ ही, जहां सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इलनेस यानी ‘सारी’ के मरीज़ ज़्यादा हैं और टेस्ट के बाद वो भी पॉजिटिव हो रहे हैं. 

हॉटस्पॉट में दिल्ली, केरल, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, लद्दाख के इलाके शामिल हैं. हॉटस्पॉट्स में मरीज़ों से लेकर संदिग्धों तक की तादाद ज़्यादा होती है. ऐसे में रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट की तकनीक का सहारा लेने की बात है. ब्लड सैंपल के ज़रिए इस टेस्ट से ये पता नहीं लगेगा कि कोई कोविड पॉजिटिव है या नहीं बल्कि इसके जरिए ये ज़रूर पता चल जाएगा कि शख्स वायरस के संपर्क में आया तो था पर शरीर ने एंटीबॉडी बना लिया. लिहाज़ा डरने की ज़रूरत नहीं. 

ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टिट्यूट के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर गगनदीप कांग ने कहा कि हॉटस्पॉट में जो अभी सरकार कह रही है, एंटीबॉडी टेस्ट को लेकर, तो अगर हमें किसी में एंटीबॉडी मिल जाए तो ये पता चलेगा कि उनको पहले sars coronavirus 2 का इन्फेक्शन हुआ है. दो हफ्ते बाद शुरू होता है, काफी वक्त तक रहता है. जब एंटीबाडी मिलता है तो ये मान सकते हैं कि उनको कोरोना वायरस से अब प्रोटेक्शन हो गया है. वो न तो वायरस फैलाएंगे और अगर एक्सपोज़र हो जाए तो वो अब बीमार नहीं होंगे. 

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चुनौती बड़ी है और ऐसे में बीमारी पर काबू पाने को लेकर संभावनाएं तलाशने की कोशिश हर स्तर पर चल रही है.

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