Coronavirus Meghalaya Update, COVID-19 News; Shillong Bethany Hospital Doctor, All You Need To Know | जो डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे थे, उन्हीं की मौत के बाद अंतिम संस्कार को लेकर विवाद, लोगों ने दाह संस्कार नहीं करने दिया; दो दिन बाद शव दफन हुआ


  • डॉ सायलो शिलॉन्ग के पहले कोरोना पॉजिटिव मरीज थे, वे उनके बीथेनी हॉस्पिटल में लगातार मरीजों का इलाज कर रहे थे
  • आशंका है कि डॉ सायलो उनके दामाद के जरिए कोरोना संक्रमित हुए थे, उनके दामाद पायलट हैं और वे न्यूयॉर्क में फंसे भारतीयों को लेकर आए थे

दैनिक भास्कर

Apr 16, 2020, 05:01 PM IST

शिलॉन्ग. लंबे विवाद के बाद आखिरकार गुरुवार को मेघालय में कोरोना से मरनेवाले पहले मरीज का अंतिम संस्कार पूरा हुआ। डॉक्टर जॉन एल सायलो शिलॉन्ग के बीथेनी हॉस्पिटल के डायरेक्टर थे और वह राज्य के पहले कोरोना पॉजिटिव मरीज भी थे।

सोमवार को डॉ. सायलो की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई और मंगलवार को देर रात 2 बजे के करीब उनकी मौत हो गई। बुधवार को जब उनका शव जलाया जाना था तो शमशान के आसपास रहनेवाले लोग घरों से बाहर निकल आए और विरोध करने लगे। उन्हें डर था कि अंतिम संस्कार से जो धुआं निकलेगा उससे आसपास रहनेवालों को संक्रमण हो सकता है।

डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन के मुताबिक, किसी भी संक्रमित व्यक्ति की मौत होने पर उसके शव को जलाया ही जाना चाहिए। डॉ सायलो के मामले में भी स्थानीय प्रशासन यही करनेवाला था और जलाने के बाद अस्थियां ताबूत में रखकर उसे क्रिश्चियन परंपरा के मुताबिक डॉ सायलो के फॉर्म हाउस में दफनाना था। लेकिन स्थानीय लोगों के विवाद के बाद ऐसा हो नहीं सका। सरकार और स्थानीय प्रशासन के मनाने के बाद गुरुवार को म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के कर्मचारियों ने उन्हें ईसाईयों के कब्रिस्तान में दफनाया।

सायलो 69 साल के थे और उन्हें अस्थमा और डायबिटीज थी। सायलो के अलावा उनके परिवार के 6 और लोग भी पॉजिटिव आए हैं। ये सभी शिलॉन्ग में हैं, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं। हालांकि ये कौन है इसका खुलासा नहीं किया गया है।

डब्ल्यूएचओ के नियमों के मुताबिक, किसी भी कोरोना संक्रमित की मौत के बाद उसके शव को पहले जलाया जाना जरूरी है, बाद में उसकी अस्थियां ताबूत में रखकर परंपरा मुताबिक दफानायी जा सकती है।

सायलो शिलॉन्ग और गुवाहाटी-शिलॉन्ग के बीच नॉन्गपॉ में 2 अस्पताल चलाते थे और लगातार मरीजों का इलाज कर रहे थे। आशंका जताई गई है कि इन सभी को सायलो के दामाद के जरिए कोरोना संक्रमण हुआ है, जो एयर इंडिया में पायलट हैं। न्यूयॉर्क में फंसे भारतीयों को लाने के लिए जो फ्लाइटें चलाईं गईं थीं, उनमें बतौर पायलट वे भी शामिल थे।

वह 17 मार्च को दिल्ली से इम्फॉल आए थे और फिर 20 मार्च को फिर दिल्ली लौट गए थे। उन्हें इसी दिन इटली में फंसे भारतीयों को लेने विमान लेकर जाना था, लेकिन उनकी जगह कोई और चला गया। 24 मार्च को वह शिलॉन्ग आ गए। उन्होंने क्वारंटाइन पूरा करने का दावा किया और दो बार उनका कोरोना टेस्ट निगेटिव आया। फिलहाल उनका तीसरा टेस्ट होना है।

फिलहाल शिलॉन्ग प्रशासन ने संक्रमण का सोर्स पता करने 2000 लोगों की लिस्ट बनाई है और उनके टेस्ट किए जा रहे हैं। टेस्ट के लिए नमूने गुवाहाटी और बरपाटा मेडिकल कॉलेज में भेजे जा रहे हैं। टेस्ट उन मरीजों के भी हो रहे हैं, जिनका इलाज डॉ सायलो कर रहे थे।