Coronavirus Rajasthan Jaipur Jodhpur Cases Live | (COVID-19) Corona Cases In Jaipur Kota Banswara Bikaner Bhilwara Lockdown Situation Latest Today News Updates | बोले- यूपी के साथी चले गए, हमारा नंबर कब आएगा


  • लॉकडाउन के बीच कोचिंग हब कोटा सिटी में फंसे है विभिन्न राज्यों के करीब 25 हजार स्टूडेंट्स
  • यूपी के आठ हजार कोचिंग कर रहे छात्रों को लेने पहुंची 252 बसें, दो दिन से हो रही है घर वापसी
  • यूपी के अलावा अभी कोटा में झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश व अन्य राज्यों के छात्र भी फंसे हुए हैं

विष्णु शर्मा

विष्णु शर्मा

Apr 18, 2020, 11:10 PM IST

कोटा. राजस्थान में कोरोना वायरस के संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। देश में लॉकडाउन अब तीन मई तक बढ़ा दिया गया है। इससे देश के कोचिंग हब कोटा हजारों छात्र फंस गए हैं। राजस्थान और यूपी सरकार ने पहल करते हुए करीब आठ हजार छात्रों को घर पहुंचाने के लिए यूपी से 252 बसें शुक्रवार शाम को कोटा भेज दी गई। इसमें यहां कोचिंग करने आए यूपी के छात्रों को बसों के लिए शुक्रवार रात से भेजना शुरू कर दिया गया। शनिवार को भी यह सिलसिला जारी था। लेकिन, इन सब के बीच ऐसे छात्र भी है। जो कि यूपी के अलावा दूसरे राज्यों से यहां पढ़ने के लिए आए है। अपने साथी छात्रों को छोड़ने बस स्टैंड पर पहुंचे तो उनका मन भी उदास नजर आया। चिंता की लकीरें और घर पहुंचने की छटपटाहट उनके चेहरे पर साफ देखी जा सकती है। ऐसे ही छात्रों बातचीत कर जानी उनके मन की बात-

 

छत्तीसगढ़ के संजय ने कहा- जब साथियों को बैग पैक कर बस स्टैंड छोड़ा, तब लगा क्या हम घर जाएंगे

संजय छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के रहने वाले हैं।

छत्तीसगढ़ में कोरिया जिले से रहने वाले संजय कुमार ने बताया कि वह पिछले साल जून माह में नीट की तैयारी करने कोटा आया था। लॉकडाउन के दौरान हॉस्टल में रह रहे हैं इसलिए कोई दिक्कत नहीं हो रही है। उनके यहां हॉस्टल में ही खाना बनता है। कई साथी लॉकडाउन से पहले घर लौट गए। अब घर जाने का मन बहुत करता है लेकिन फिर लगता है कि जब व्यवस्था नहीं हो रही है तो यहीं सही। दो दिनों में यूपी वाले साथी भी घर चले गए। हम ही उनका बैग पैक करके बस स्टैंड पर छोड़कर आए। हॉस्टल लगभग खाली हो चुका है। ऐसे में अब सोच रहे हैं कि हमारा नंबर कब आएगा। राजस्थान और कोटा में लगातार कोरोना के केस बढ़ने पर मम्मी-पापा के फोन आते है। वे चिंता करते हैं और पूछते हैं कि तुम्हारे वहां तो कोरोना केस बढ़ रहे हैं क्या? लेकिन उन्हें सच बता देंगे तो उनकी चिंता बढ़ जाएगी। ऐसे में यही कहता हूं कि हां थोड़ा-बहुत बढ़ रहा है। लेकिन यह नहीं बताता हूं कि पास में ही बढ़ रहा है। जबकि हकीकत यह है कि मैं जिस  कुन्हाड़ी क्षेत्र में हॉस्टल में रह रहा है। वहीं, सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं।

झारखंड के रहने वाले कुंवर प्रताप बोले- लॉकडाउन की वजह से घर नहीं जाने का मलाल है, मम्मी बात करती है तो रो पड़ती है

झारखंड में धनबाद के रहने वाले कुंवर प्रताप सिंह।

झारखंड में धनबाद के रहने वाले कुंवर प्रताप सिंह कोटा में पिछले साल जुलाई में आए थे। वह यहां नीट की तैयारी कर रहे हैं। वह कहते हैं- मैं कल बस स्टैंड पर अपने साथी अभिषेक त्रिपाठी को छोड़ने गया था। हॉस्टल के कुछ फ्रेंड्स लॉकडाउन के पहले ही घर चले गए थे। लेकिन, हम यहीं फंस गए थे। ऐसे में थोड़ा मेंटल स्ट्रेस हो गया था। मैं कुन्हाड़ी में हॉस्टल में रहता हूं। यहीं नजदीक कोरोना पॉजिटिव केस मिले हैं। हम लोग यहां हॉस्टल में 30 बच्चे रह गए थे। घर वालों ने भी उनकी घर वापसी के लिए दो बार फ्लाइट की टिकट बुक करवाई। लेकिन, कैंसिल हो गई। इसके बाद ट्रेन भी कैंसिल हो गई। रोज घर बात होती है। मम्मी कभी-कभी इमोशनल हो जाती है क्योंकि, मैं इस वक्त घर से बाहर रह गया हूं। हमारे मन में भी यह चल रहा है कि हमें भी घर जाना है। वहां परिवार के साथ रहेंगे तो मेंटल स्ट्रेस खत्म हो जाएगा। वहां अच्छे से पढ़ाई भी होगी।

राजस्थान में अलवर के स्टूडेंट ने कहा- राज्य सरकार सबकी व्यवस्था कर रही है, हमारी कब करेगी

अलवर जिले में बहरोड़ तहसील के रहने वाले रजत यादव।

अलवर जिले में बहरोड़ तहसील के रहने वाले रजत यादव ने कहते हैं-  लॉकडाउन अचानक से हुआ। ऐसे में मैं घर जाने की तैयारी नहीं कर सका। अब काफी साथी घर लौट चुके है। ऐसे में हॉस्टल सूना हो गया है। साथियों में कोराना संक्रमण का भी थोड़ा भय है। पढ़ाई भी बाधित हो रही है। लॉकडाउन के दौरान परिवार वालों ने पास बनवाने के प्रयास किए। लेकिन किसी ने पास नहीं बनाया। वे निजी कार से कोटा में उसे लेकर आने को तैयार हुए। लेकिन तब भी प्रशासन ने इजाजत नहीं दी। समझ नहीं आता है कि जब राजस्थान सरकार बाहर से आए छात्रों की सुध ले रही है। उनकी घर वापसी में मदद कर रही है। लेकिन खुद राजस्थान के विभिन्न जिलों से कोटा में फंसे स्टूडेंट्स को उनकी घर वापसी के लिए कोई प्रयास नहीं कर रही है।