Coronavirus Rajasthan Jaipur Jodhpur Cases Live | (COVID-19) Corona Cases In Jaipur Kota Banswara Bikaner Bhilwara Lockdown Situation Latest Today News Updates | यूपी लौट रहे स्टूडेंट्स ने कहा- लॉक डाउन के बीच घर जाने का एक्साइटमेंट लेकिन कोरोना की वजह से नर्वस भी


  • कोटा में फंसे यूपी के 7 हजार 500 छात्रों को लेने राजस्थान पहुंची 252 बसें

  • अभी भी अन्य राज्यों से पढ़ने आए बच्चे फंसे हुए है कोटा के हॉस्टल व पीजी में

विष्णु शर्मा

विष्णु शर्मा

Apr 18, 2020, 12:08 AM IST

कोटा. लॉक डाउन के दौरान राजस्थान में फंसे उत्तरप्रदेश के करीब साढ़े 7 हजार कोचिंग छात्रों को लेने के लिए शुक्रवार को यूपी सरकार ने 252 बसें शुक्रवार शाम को कोटा भेजी है। ये सभी छात्र मेडिकल व इंजीनियरिंग की तैयारियों के लिए कोटा से कोचिंग कर रहे है और यहीं हॉस्टलों व पीजी में रह रहे है। जिन्हें बसों से उनके घरों तक पहुंचाया जाएगा। राजस्थान और यूपी सरकार ने गुरुवार को यह फैसला लिया था। इसके बाद यहां फंसे छात्रों के लिए शुक्रवार को 102 बसें झांसी और 150 बसें आगरा से रवाना की गईं। शुक्रवार देर रात को ये बच्चे बसों से यूपी के लिए रवाना हो गए। इस बीच भास्कर संवाददाता ने इन स्टूडेंट्स से बातचीत कर जानीं उनके मन की बात। पेश है ग्राउंड रिपोर्ट

कोटा में पढ़ाई कर रहे यूपी के इन स्टूडेंट्स को एक दिन पहले ही मैसेज कर दिया गया था कि आपको लेने यूपी से बसें आएंगी। अपना सामान पैककर तैयार रहें

घर जाने की खुशी है, लेकिन थोड़ा नर्वस हूं कि लंबे सफर में कोरोना ना छू जाएं

भास्कर संवाददाता ने बस स्टैंड पर घर जाने को तैयार बैठे अभिषेक त्रिपाठी से बातचीत की। वह यूपी में कन्नौज के रहने वाला है और कोटा में एक इंस्टीट्यूट से नीट की तैयारी कर रहा है। अभिषेक के मुताबिक उनको 16 अप्रेल की शाम को कोचिंग से मैसेज आया कि आप अपना बैग तैयार रखिए। कल आपको घर ले जाने के लिए बसें आ रही है। इससे वह काफी खुश था।

लेकिन, हॉस्टल से निकलने के बाद थोड़ा सा नर्वस फील कर रहा है। क्योंकि घर काफी दूर है। कोई रास्ते में कोरोना संक्रमित टच में ना आ जाएं। अभिषेक ने बताया कि लॉक डाउन के दौरान बस यूं ही टाइम कट रहा था। पढ़ाई नहीं हो पा रही थी। दोस्त भी सब अंदर से घबरा हुए थे कि कहीं कोई संक्रमित ना हो जाए। इस दौरान मम्मी पापा से रोजाना आठ-दस बार बात होती थी। वे कहते थे कि जब मन में आए तभी बात कर लेना। मैं कोटा लगभग एक साल पहले आया था। लॉक डाउन में परेशानी कोई नहीं आई। लेकिन थोड़ा सा डर गया हूं।

यूपी रोडवेज की 252 बसें देर शाम तक कोटा पहुंची। यहां उन्हें सेनेटाइज किया गया। वहीं यूपी जाने वाले छात्रों की स्क्रीनिंग की गई। तब वे देर रात तक रवाना हुए

लॉक डाउन है कोई खास बात नहीं है क्योंकि यदि परेशान होंगे तो गड़बड़ ज्यादा होगी

लखनऊ निवासी गौरव ने बताया कि हमें कोई प्रॉब्लम नहीं हो रही है। यहां रहते तो भी कोई टेंशन नहीं थी। कल पता चला कि बसें आ रही है और घर जा सकते है इसलिए जा रहे है। वरना यहां भी हॉस्टल में ठीक थे। मैं जेईई की तैयारी कर रहा हूं। मैं यहां जुलाई में आया था। मम्मी पापा से लगातार बात हो रही थी। उन्होंने हमारी पूरी लोकेशन देखी हुई थी। इसलिए कोई टेंशन नहीं थी। थोड़ा बहुत एक्साइटमेंट जरुर है। मैं पहले भी यहां कोटा में रह चुका है। बस नार्मल है। लॉक डाउन जरुर है लेकिन कोई खास बात नहीं है। यदि परेशान होंगे तो और गड़बड़ होगा। शांति रखेंगे तो सारे काम हो जाएंगे।

हॉस्टल में बाहर से खाना आ रहा था, इसलिए संक्रमण का डर था, अब बस सुरक्षित घर पहुंच जाएं 

यूपी में प्रतापगढ़ निवासी आकांक्षा सिंह कोटा में पिछले दो साल से एमबीबीएस की तैयारी कर रही है। वह यहां 11 वीं क्लास से पढ़ रही हूं। आकांक्षा ने बताया कि घर जाने के लिए बसें आएंगी। यह मैसेज मिलने पर काफी एक्साइटमेंट है। घर जाना अच्छा लग रहा है क्योंकि हॉस्टल में थोड़ा दिक्कत रहता था। यहां लॉक डाउन के दौरान खाना बाहर से आता था। इसलिए डर था कि कहीं संक्रमण ना हो जाएं।

लेकिन अब मन में यही है कि हम सुरक्षित घर पहुंच जाएं। ताकि वहां खाना घर का मिल सकेगा। आकांक्षा ने बताया कि लॉक डाउन के दौरान कोई दिक्कत नहीं हुई। हां, कोरोना संक्रमण की खबरें पढ़कर थोड़ा टेंशन चल रहा था। थोड़ा डिस्टर्ब रहते थे। लेकिन हम फ्रेंड्स पढ़ाई पर फोकस रहते थे। लॉक डाउन के दौरान पेरेंट्स से बातचीत होती थी। लेकिन उन्होंने कभी नेगेटिव बात नहीं की।

लॉक डाउन की वजह से घर नहीं जाने का मलाल है, दो फ्लाइट व ट्रेन भी कैंसिल हो गई

झारखंड में धनबाद के रहने वाले कुंवर प्रताप सिंह कोटा में पिछले साल जुलाई में आया था। मैं यहां नीट की तैयारी कर रहा है। बस स्टैंड पर अपने साथी अभिषेक त्रिपाठी को छोड़ने बस स्टैंड आए कुंवर प्रताप सिंह ने बताया कि हॉस्टल के कुछ फ्रेंड्स लॉक डाउन के पहले ही घर चले गए थे। लेकिन हम यहीं फंस गए थे। ऐसे में थोड़ा सा मैंटल स्ट्रेस हो गया था। कुन्हाड़ी में हॉस्टल में रहता हूं। यहीं नजदीक कोरोना पोजिटिव केस मिले है। हम लोग यहां हॉस्टल में 30 बच्चे रह गए थे।

कुंवर प्रताप सिंह के घर वालों ने भी उसकी घर वापसी के लिए दो बार फ्लाइट की टिकट बुक करवाई। लेकिन कैंसिल हो गई। इसके बाद ट्रेन भी कैंसिल हो गई। रोजाना पेरेंट्स से बातचीत होती है। जिसमें मम्मी कभी कभी इमोशनल हो जाती थी क्योंकि मैं इस वक्त घर से बाहर रह गया हूं। हमारे मन में भी यह चल रहा है कि हमें भी घर जाना है। वहां परिवार के साथ रहेंगे तो मैंटल स्ट्रेस खत्म हो जाएगा। वहां अच्छे से पढ़ाई भी होगी।