Coronavirus: This is the reason behind the lack of safety wear in the country and delay in supply – Coronavirus: देश में सेफ्टी वियर की कमी और सप्लाई में देरी के पीछे यह है कारण


Coronavirus: देश में सेफ्टी वियर की कमी और सप्लाई में देरी के पीछे यह है कारण

देश में कोरोना वायरस से मुकाबला करने के लिए सेफ्टी वियर की बहुत कमी है.

भारत में कोरोनो वायरस (Coronavirus)के बढ़ते प्रकोप को लेकर कई सबूत इशारा कर रहे हैं कि सुरक्षा पोशाख (सेफ्टी वियर) के आदेश देने में सरकार ने बहुत देरी की. इससे देश में इस सामना की कमी हो सकती है और इससे स्वास्थ्य क्षेत्र के हजारों पेशेवरों को खतरा हो सकता है. इसके अलावा ऐसा लगता है कि जब ये कॉन्ट्रेक्ट समाप्त हो गए, तो देश की विशाल जरूरतें पूरी करने के लिए सरकार बमुश्किल एक दर्जन छोटी घरेलू कंपनियों के पास गई है.

भारत में COVID-19 के खिलाफ लड़ाई के मोर्चे पर डटे सुदूर उत्तर के कश्मीर से लेकर पूर्व में सिलीगुड़ी तक के डॉक्टरों ने शिकायत की है. उन्हें यहां तक कि निजी सुरक्षा उपकरण (PPE) – स्पेशलाइज्ड ओवरआल, दस्ताने, काले चश्मे, मास्क तक की कमी का सामना करना पड़ रहा है. इसके कारण उन्होंने हड़ताल पर जाने की धमकी दी है.

यह शिकायतें भारत के लिए अनोखी नहीं हैं. कोरोनो वायरस से जूझ रहे देशों को सेफ्टी वियर की गंभीर कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे आगे के लिए योजना बनाना एक महत्वपूर्ण जरूरत बन गई है.

हालांकि, NDTV ने पाया है कि भारत सरकार ने हाल ही में एक हफ्ते पहले, देश में तीन हफ्ते के लॉकडाउन में पीपीई के लिए ऑर्डर देने की बात कही थी. इस समय तक भारत में इस बीमारी के कदम रखने के बाद कम से कम आठ हफ्ते गुजर चुके थे और इससे 1,637 संक्रमित हो चुके थे व 38 की मौत हो चुकी थी.

इसके अलावा लॉकडाउन के साथ प्रोटेक्टिव वियर के पहले आर्डर के साथ इसके निर्माण और आपूर्ति में जबरदस्त व्यवधान आ गया है. इस पर सरकार स्वयं मानकर चल रही है कि अस्पतालों में सेफ्टी वियर वितरित करने में लगभग महीने भर की देरी हो सकती है.

सरकार की ओर से कदम उठाने में की गई देर से सुरक्षा पोशाखों के विकल्प सीमित कर दिए हैं, जिससे सरकार लगभग पूरी तरह से घरेलू निर्माताओं पर निर्भर हो गई है. 

हालात के संकेत लॉकडाउन से सिर्फ एक दिन पहले 23 मार्च को सामने आए, जब सरकार ने सेफ्टी वियर के लिए अपनी आवश्यकता को रेखांकित करते हुए एक डोमेस्टिक टेंडर के अंतिम संशोधन को अपलोड किया.

यह टेंडर केंद्र और राज्य सरकारों के लिए सेफ्टी वियर के लिए नोडल एजेंसी के रूप में नियुक्त और सरकार द्वारा संचालित एचएलएल लाइफकेयर की वेबसाइट पर डाल दी गई है. उसने दस्तावेज़ के पहले वर्जन को संशोधित किया है जिसमें 3 मार्च की तारीख दर्ज है.

अंतिम वर्जन में 10 लाख कवरआल, 10 लाख प्रोटेक्टिव गॉगल्स, 40 लाख एन -95 मास्क, दो करोड़ ट्रिपल-लेयर सर्जिकल मास्क, 20 लाख नाइट्राइल दस्ताने और 10 लाख बोतल हैंड सैनिटाइजर की मांग की गई है.

उसी दिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि वह फरवरी से सेफ्टी वियर निर्माताओं के संपर्क में था, और छह भारतीय फर्मों की ओर से पेश किए गए सेम्पलों को हाल ही में क्वालिटी कंट्रोल टेस्ट में पास किया गया था.

जरूरत के मुताबिक 24 मार्च को ग्लोबल टेंडर अपलोड किया गया. 30 मार्च को मंत्रालय ने एक अधिक विस्तृत बयान दिया, जिसमें दावा किया गया कि 11 भारतीय कंपनियों को 21 लाख कवरआल आपूर्ति करने के लिए अनुबंध दिया गया है. बारहवें दिन पांच लाख कवरआल की आपूर्ति के लिए उस पर हस्ताक्षर किए गए थे.

बयान में कहा गया है कि सरकार ने दक्षिण कोरिया और सिंगापुर से 30 लाख कवरआल आयात करने के आदेश दिए थे. ये आपूर्ति कब होगी, इसकी कोई तारीख नहीं बताई गई.

हालांकि इस कथन में भी न तो कंपनियों ने नाम लिए गए और न ही यह उल्लेख किया कि उनको कब आर्डर  दिए गए थे. सामग्री के उत्पादन का उल्लेख किया गया था- प्रतिदिन 6000-7000 पीस. सरकार का कहना है कि एक हफ्ते में उत्पादन दोगुना 15000 पीस प्रतिदिन होने की उम्मीद है. एक दिन में 15000 पीस के उत्पादन की दर से 26 लाख पीस का ऑर्डर पूरा होने में अभी भी 173 दिन यानी करीब छह महीने का समय लगेगा.

NDTV ने सेफ्टी वियर बनाने वाली 14 भारतीय कंपनियों की कपड़ा मंत्रालय की एक सूची की समीक्षा की. यह कंपनियां सरकार द्वारा अनुबंधित की गई हैं. प्रत्येक के उत्पादन और गुणवत्ता की देखरेख के लिए एक सेट नोडल अधिकारियों को सौंपा गया है. 

इस सूची में शामिल एक सेफ्टी वियर निर्माता ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान लॉजिस्टिक बाधाओं को दूर करना है. यह सूची 24 मार्च की है. इन 14 कंपनियों में से दो कवरआल और मास्क में इस्तेमाल होने वाला कपड़ा बनाती हैं. शेष 12 में से 11 कंपनियों से हमने संपर्क किया – इन कंपनियों को या सीधे या फिर नोडल अधिकारियों के जरिए काम सौंपा गया है. इन 11 कंपनियों में से नौ ने कहा कि उन्हें लॉकडाउन के दिन या फिर इसके ठीक बाद 24 मार्च को उत्पादन शुरू करने के लिए हरी झंडी मिली थी.

वड़ोदरा में स्थित श्योर सेफ्टी लिमिटेड और बेंगलुरु की एमरेलिस हेल्थकेयर लिमिटेड जैसी कुछ कंपनियां 24 मार्च से 500 से 1500 पीस प्रतिदिन की दर से कवरआल का उत्पादन कर रही हैं.

अन्य कंपनियों में जैसे तमिलनाडु स्थित अनिरुप इंडस्ट्रीज और शिवा टेक्सयार्न लिमिटेड ने दो दिन पहले ही उत्पादन शुरू किया है. यह कंपनियां प्रतिदिन क्रमशः 100 और 500 पीस का उत्पादन कर रही हैं. यह संख्या भारत की विशाल आवश्यकताओं को पूरा करने में किसी गिनती में नहीं आती है.

सेफ्टी गियर के दो निर्माताओं, नोएडा स्थित एससीजी एंटरप्राइजेज और कोलकाता स्थित फ्रंटियर प्रोटेक्टिव वेयर से जुड़े नोडल अधिकारियों ने कहा कि उन्हें अभी उत्पादन शुरू करना है.

जैसे ही इन कंपनियों ने उत्पादन शुरू किया, उन्हें लॉकडाउन के एक और असर का सामना करना पड़ा. बैंक फायनेंस रुकने से नई बाधा आई. 29 मार्च को एक पत्र में कपड़ा मंत्रालय के सचिव ने वित्त मंत्रालय को लिखा, “लॉकडाउन के कारण… कंपनियों को अब आवश्यक सामान के निर्माण के लिए संसाधन जुटाने के लिए कार्यशील पूंजी की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है. मैं आभारी रहूंगा यदि आप इन कंपनियों की कार्यशील पूंजी सीमा के भीतर अपने लोन को बढ़ाने के लिए उनके बैंकों से अनुरोध करेंगे.”

सेफ्टी वियर बनाने वाले 10 निर्माताओं की संलग्न सूची कपड़ा मंत्रालय द्वारा सौंपी गई नोडल अधिकारियों की सूची में नामित 14 फर्मों से मेल खाती है.

वित्त मंत्रालय ने इंडियन बैंक्स एसोसिएशन को दो दिन बाद 31 मार्च को पत्र लिखा. मंत्रालय ने एसोसिएशन के सदस्य बैंकों से इन कंपनियों के लिए सहायता मांगी. NDTV ने खरीद में देरी पर स्वास्थ्य मंत्रालय से जवाब मांगा है. मंत्रालय की प्रतिक्रिया का इंतजार है.

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