Dr. Prakash Keswani, who is engaged in the treatment of Corona-infected patients, said- Stayed regardless of death | डॉक्टर की जुबानी, संघर्ष की कहानी: जान की परवाह किए बगैर संक्रमित का इलाज किया, घर लौटकर अलग कमरे में रहता था


दैनिक भास्कर

Mar 18, 2020, 02:26 AM IST

जयपुर से सुरेन्द्र स्वामी. कोरोनावायरस ने दुनियाभर में 7500 से ज्यादा जिंदगियां निगल लीं और 1.90 लाख लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। संक्रमित मरीजों को बचाने में जुटे हैं, वो डॉक्टर, जिन्हें अपनी जान की परवाह नहीं है। इन्हीं में से एक हैं जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में पदस्थ डॉ. प्रकाश केसरवानी, जिन्हें संक्रमित मरीज का इलाज करने का जिम्मा मिला। डॉक्टर ने बताई इस जानलेवा बीमारी से संघर्ष की कहानी।

डॉ. प्रकाश केसवानी ने बताया, ‘ जब पूरी दुनिया में कोरोनावायरस फैलने और इसकी चपेट में लाखों लोगों के आने की खबरें आ रहीं थीं, तो उस वक्त सपने में भी नहीं सोचा था कि जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल जयपुर में भी कोरोनावायरस के मरीज के इलाज करने की जिम्मेदारी मिलेगी। बात 2 मार्च की है। एसएमएस अस्पताल में एक मरीज की जांच रिपोर्ट पॉजीटिव आई, यानी उसमें कोरोनावायरस के लक्षण मिले। ऐसे में एक बार तो मेरे मन में भी घबराहट थी और मन में सवाल चल रहे थे कि इस बीमारी का तो इलाज ही नहीं है। लेकिन, मैंने हिम्मत नहीं हारी और कोरोना के मरीज को ठीक करने की ठानी। दूसरी तरफ उसका इलाज करने की वजह से मेरे घर वाले भी चिंतित हो गए थे। इसके बावजूद हमने जिंदगी-मौत की परवाह किए बिना कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर भंडारी के साथ मिलकर वैश्विक स्तर की गाइडलाइन के आधार पर उसका इलाज करना शुरू किया। इसके लिए हमने कई बीमारियों और उनके इलाज का अध्ययन किया।’ 

‘घरवालों के चेहरे पर चिंता की लकीरें दिखती थीं’

उन्होंने कहा, ‘परिवार की अपनी चिंताएं थीं। मैं जब भी शाम को घर पहुंचता था, तो मेरे परिवार के सदस्यों के चेहरों पर उदासी और चिंता की लकीरें दिखाई देती थीं। सोशल मीडिया पर चल रहीं कोरोनावायरस से जुड़ी खबरों की वजह से भी परिवार वाले चिंतित होते थे। वे हर समय एक ही बात कहते थे कि जरा संभलकर रहना। मैं उनसे हर समय एक ही बात कहता था कि किसी को भी डरने या घबराने की जरूरत नहीं है। आप लोग मुझसे मास्क लगाकर बात कर सकते हैं। ऐसे समय में मैंने भी कई सावधानियां बरतीं। अस्पताल से घर जाने के बाद मैं एक अलग कमरे में ही रहता था। खाना-पीना भी वहीं करता था। मैंने हमेशा कहा कि किसी को डरने या घबराने की जरूरत नहीं है। डॉक्टर को लोगों ने भगवान का दर्जा दे रखा है और मेरा काम जिंदगी-मौत से लड़ रहे मरीज को बचाना है। परिवार ने भी ऐसे वक्त में मेरा पूरा साथ दिया। हर तरह से अध्ययन करके हमने और हमारी टीम ने एंटीवायरल दवाओं के जरिए मरीज को ठीक कर कोरोना को हरा दिया।’