DRDO built a personal sanitization chamber and face mask | गुजरात में तैयार हुआ सस्ता स्वदेशी वेंटिलेटर, डीआरडीओ ने बनाया पर्सनल सैनिटाइजेशन चैंबर और फेस मास्क

DRDO built a personal sanitization chamber and face mask | गुजरात में तैयार हुआ सस्ता स्वदेशी वेंटिलेटर, डीआरडीओ ने बनाया पर्सनल सैनिटाइजेशन चैंबर और फेस मास्क


  • विदेश से आने वाले वेंटिलेटर की कीमत 6 लाख रु. होती है जबकि स्वदेशी वेंटिलेटर 1 लाख रु. में होगा तैयार
  • पुणे की कंपनी ने कोरोना मरीज का सैंपल लेने के लिए बनाया स्वाब, अभी इसे इटली, अमेरिका और जर्मनी से मंगाया जाता है

दैनिक भास्कर

Apr 04, 2020, 09:38 PM IST

नई दिल्ली. कोरोनावायरस के खिलाफ छिड़ी इस जंग में देश का हर शख्स अपना योगदान दे रहा है। सामाजिक संस्थानों से जुड़े लोग गरीबों की मदद कर रहे हैं। शैक्षणिक, शोध संस्थानों और निजी संस्थानों से जुड़े वैज्ञानिक इलाज को लेकर तमाम तकनीक तैयार कर रहे हैं। शनिवार को देश के वैज्ञानिकों ने तीन नए इनोवेटिव प्रोडक्ट तैयार करने में कामयाबी हासिल की। एक तरफ जहां गुजरात के वैज्ञानिकों ने बेहद सस्ता वेंटिलेटर बनाया तो दूसरी ओर पुणे के वैज्ञानिकों ने कोरोना का सैंपल लेने वाला स्वाब डेवलप किया। डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने सर्जिकल सूट और फेस मास्क के बाद अब सेल्फ सैनिटाइजेशन चैंबर तैयार किया है। खास बात यह है कि तीनों प्रोडक्ट कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में देश की काफी मदद कर सकते हैं। 

स्वाब तैयार करने वाले डॉ. मिलिंद कुलकर्णी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी। 

अब विदेश से स्वाब लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी
पुणे की सेंटर फॉर मटेरियल्स फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी (सीमेट) के वैज्ञानिकों ने कम लागत वाला स्वदेशी पॉलिमर स्वाब तैयार करने में कामयाबी हासिल की है। केंद्र के डॉ. मिलिंद कुलकर्णी के मुताबिक, स्वाब का उपयोग कोरोनावायरस परीक्षण के लिए एकत्रित किए जाने वाले सैंपल को रखने में काम आता है। अभी इसे इटली, अमेरिका और जर्मनी से मंगाया जाता है। डॉ. मिलिंद ने बताया कि चूंकि, पूरी दुनिया इस समय कोरोना संकट से जूझ रही है। खासतौर पर इटली, अमेरिका और जर्मनी में इस वक्त कोरोना के सबसे ज्यादा मामले हैं। वहीं, भारत में भी संक्रमण के मामले काफी बढ़ चुके हैं। इसलिए आने वाले दिनों में स्वाब की कमी हो सकती है। मुसीबत की इस घड़ी में यह स्वदेशी स्वाब देश के काफी काम आ सकता है। डॉ. मिलिंद के अनुसार, अभी स्वदेशी स्वाब का प्रोटोटाइप तैयार हुआ है। अब इसके क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी की जा रही है। इसकी जिम्मेदारी यूरोलॉजिस्ट डॉ. केएन श्रीधर को दी गई है। डॉ. मिलिंद के अनुसार, आने वाले दिनों में लाखों स्वाब की जरूरत पड़ेगी। उनकी मशीन एक मिनट में 1 हजार से 2 हजार स्वाब तैयार करने में सक्षम है।   

गुजरात में 10 दिनों के अंदर यह वेंटिलेटर तैयार हुआ है। इसकी कीमत 1 लाख रुपये है।

10 दिनों में गुजरात सरकार को मिल जाएगा 1 हजार वेंटिलेटर
गुजरात के राजकोट की ज्योति सीएनसी कंपनी ने स्वदेशी वेंटिलेटर तैयार करने में कामयाबी हासिल की है। इसे धामन-1 नाम दिया गया है। इसके सभी हिस्से स्वदेशी हैं। कंपनी का दावा है कि इसकी कीमत महज 1 लाख रुपये है जबकि विदेश से आने वाला 1 वेंटिलेटर कम से कम 6.50 लाख रुपये का मिलता है। मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने शनिवार को गांधीनगर में धामन -1 को लॉन्च किया। रुपाणी ने बताया कि अगले 10 दिनों में कंपनी गुजरात सरकार को 1000 एयर-1 वेंटिलेटर देगी। कंपनी के पराक्रम सिंह जडेजा ने बताया, ”इसे डॉ. राजेंद्र सिंह परमार की टीम ने महज 10 दिनों में तैयार किया है। डॉ. परमार ने 5 साल तक अमेरिका में काम किया है। इस वेंटिलेटर को बनाने में 150 विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम जुटी थी। इसका परीक्षण अहमदाबाद के असरवा सिविल अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीज पर किया गया। वेंटिलेटर पांच घंटे से अधिक समय तक रोगी पर अच्छा काम कर रहा है।” 

डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने पर्सनल सैनिटाइजेशन चैंबर तैयार किया है। इसे हॉस्पिटल के प्रयोग में लाया जा सकता है। 

डीआरडीओ ने बनाया सैनिटाइजेशन चैंबर और फेस प्रोटेक्शन मास्क
कोरोनावायरस से निपटने के लिए तैयार डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेसन (डीआरडीओ) ने एक फुल बॉडी डिसइन्फेक्शन चैंबर बनाया है। इसे सैनिटाइजेशन चैंबर भी कहा जा रहा है। साथ ही फेस प्रोटेक्शन मास्क भी बनाया है, जिसे हॉस्पिटल में सप्लाई भी किया जा रहा है। दिल्ली के अहमदनगर में डीआरडीओ की लेबोरेटरी ‘व्हीकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टैबिलसमेंट’ने इस सैनिटाइजेशन चैंबर को डिजाइन किया है। डीआरडीओ ने कहा कि यह एक पोर्टेबल सिस्टम है। इस चैंबर में व्यक्ति को एक बार में पूरी तरह से सैनिटाइज किया जाएगा। इसमें एक पैडल के माध्यम से खुद को सैनिटाइज किया जाता है। चैंबर में पंप के माध्यम से हाइपो सोडियम क्लोराइड की तेज फुहार डाली जाती है। यह स्प्रे 25 सेकंड तक चलता है। इस चैंबर में व्यक्ति को अपनी आंखे बंद रखनी होती हैं। इस चैंबर में 700 लीटर का टैंक है। एक बार में करीब 650 लोगों को सैनिटाइज किया जा सकता है।

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