India is able to produce medicines for three-four months without the help of China, so there is no possibility of increase in the prices of medicines. | चीन की मदद के बिना भारत तीन-चार महीने तक दवाओं का उत्पादन करने में सक्षम, ऐसे में दवाओं के दाम बढ़ने की आशंका नहीं


  • दवा बनाने के लिए जरूरी कच्चा माल अब समुद्र और वायु दोनों रास्तों से आना शुरू 
  • कंपनियों के पास इस वक्त दवा बनाने के लिए कम से कम 3-4 महीने का कच्चा माल है

दैनिक भास्कर

Mar 29, 2020, 06:17 AM IST

मुंबई (विनोद यादव). कोरोना संकट के बीच चीन की मदद के बिना भारत तीन से चार महीने तक दवाओं का उत्पादन करने में सक्षम है। लिहाजा, दवाओं के दाम बढ़ने की आशंका नहीं है। इसकी दो प्रमुख वजह है। अब चीन से दवा बनाने के कच्चे माल का कन्साइनमेंट समुद्र और वायु दोनों रास्तों से आना शुरू हो गया है। इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईडीएमए) के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर अशोक कुमार मदान ने भास्कर को बताया कि चीन से दवा बनाने का कच्चा माल अब आ रहा है। समुद्र के रास्ते से आने वाला सामान 18 दिनों में पहुंचता है। बंदरगाह पर जहाज के आने पर उसे क्वारेंटाइन कर दिया जाता है।

इसमें भी कई दिन लगते हैं।

दवाओं के दाम बढ़ने की आशंका नहीं

इसके अलावा हवाई जहाज से भी सामान आना शुरू हो गया है। हवाई जहाज से अधिक वैल्यू वाला सामान आता है। कंपनियों के पास इस वक्त दवा बनाने के लिए कम से कम तीन से चार महीने का कच्चा माल है। इसमें एक्टिव फार्मास्यूटिकल्स इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) और फॉर्मूलेशन दोनों हैं। वहीं, इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस (आईपीए) के महासचिव सुदर्शन जैन ने कहा- ‘कोरोना की वजह से देश में दवाओं के दाम बढ़ने की बिल्कुल भी आशंका नहीं है। सरकार खुद इसे कंट्रोल करती है। दवा बनाने के कच्चे माल की कीमत चाहे जितनी भी बढ़ जाए, पर साल में न्यूनतम प्रतिशत ही दाम बढ़ाने की अनुमति मिलती है। 

इस दवा काे स्टॉक किया जा रहा

आईडीएमए के अनुसार, लोगों ने हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्विन दवा खरीद कर रखनी शुरू कर दी थी। इससे दवा की कमी महसूस हुई। लेकिन, अब कंपनियां इसे बना रही हैं। दवाओं का कच्चा माल जरूर महंगा हो गया है। जैसे हमारे एंटीबायोटिक। ये 90% चीन से ही आते हैं। इसके बाद पैरासिटामॉल का नंबर आता है।