Jaipur News In Hindi : 100 phone calls are heard daily to help the migrant Rajasthanis trapped in other states and migrants stuck here. | दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी राजस्थानियों और यहां अटके प्रवासियों की मदद के लिए रोजाना सुनते है 100 फोन कॉल्स, आधा घंटे में सॉल्व करते है प्रॉब्लम


  • लॉक डाउन में राजस्थान व अन्य राज्यों में फंसे प्रवासियों की मदद के लिए बनाया हेल्प वॉर रुम
  • प्रदेश के 26 सीनियर आईएएस और आईपीएस को बनाया अन्य राज्यों का नोडल अधिकारी
  • गंभीर हेल्थ व मेडिकल इश्यू, फूड सप्लाई और किसी प्रवासी की मृत्यु केसों में मदद की प्राथमिकता 

विष्णु शर्मा

विष्णु शर्मा

Apr 18, 2020, 04:59 PM IST

जयपुर. कोरोनावायरस संक्रमण के चलते देशभर में 15 अप्रेल से लॉक डाउन 2.0 की शुरुआत हो चुकी है। लॉक डाउन की इस अवधि को 3 मई तक बढ़ा दिया गया है। इस दौरान देश के दूसरे राज्यों में रह रहे प्रवासी राजस्थानियों और राजस्थान में रह रहे दूसरे राज्यों के प्रवासियों की समस्याओं के निराकरण और निस्तारण के लिए राजस्थान सरकार ने 26 आईएएस-आईपीएस अफसरों की विशेष ड्यूटी लगाई है। कार्मिक विभाग ने इन अफसरों को संबंधित राज्यों का नोडल अधिकारी नियुक्त किया है, जो कि गंभीर आपात समस्याओं में फोन कॉल्स के जरिए इन प्रवासियों की मदद करते है। इनमें गंभीर हेल्थ व मेडिकल इश्यू, फूड सप्लाई और किसी प्रवासी की मृत्यु केसों को प्राथमिकता दी जा रही है।

ये है राज्य और उनके नोडल अफसर 

क्रमांक संख्या राज्य का नाम प्रभारी अधिकारियों  के नाम व पदनाम
1 दिल्ली

टी.जे. कविथा, आईएफएस

धीरज श्रीवास्तव, आयुक्त

उत्तरप्रदेश/उत्तराखंड

प्रवीण गुप्ता, आईएएस

संजय अग्रवाल आईपीएस

3 बिहार/झारखंड

अर्पणा अरोड़ा, आईएएस

विजय कुमार सिंह, आईपीएस

4 पश्चिम बंगाल

श्रेया गुहा, आईएएस

सुष्मित विश्वास, आईपीएस

5 गुजरात

गायत्री ए. राठौड़, आईएएस

गोविंद गुप्ता, आईपीएस

6 मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़

डॉ. दीप नारायण पांडेय, आईएएस

भूपेंद्र साहू, आईपीएस

7 महाराष्ट्र

मुग्धा सिन्हा, आईएएस

विकास कुमार, आईपीएस

8 पंजाब व जम्मू एवं कश्मीर

नवीन महाजन, आईएएस

सुनील दत्त, आईपीएस

9  हरियाणा व हिमाचल प्रदेश

हेमंत कुमार गेरा, आईएएस

रुपिदर सिंघ, आईपीएस

10 आंध्र प्रदेश व तेलंगाना

पी.रमेश, आईएएस

जंगा श्रीनिवास राव, आईपीएस

11 तमिलनाडु/केरल/ कर्नाटक

डॉ. आर. वेंकटेश्वरन, आईएएस

बीजू जॉर्ज जोजफ, आईपीएस

12 उड़ीसा

विष्णु चरण मल्लिक आईएएस

उत्कल रंजन साहू आईपीएस

13 असम तथा सभी उत्तर पूर्वी राज्य

अश्विनी भगत, आईएएस

संजीव कुमार नार्जरी, आईपीएस

रोजाना मदद के लिए आते है लगभग 100 फोन कॉल्स, आधा घंटे में करते है निस्तारण

राजस्थान के सीनियर आईपीएस और राज्य आपदा कार्रवाई बल (एसडीआरएफ) में एडीजी सुमित विश्वास को पश्चिम बंगाल के लिए राज्य का नोडल प्रभारी नियुक्त किया है। उनका काम है ऐसे लोगों की समस्याएं सुनकर मदद करना है जिनमें राजस्थान के लोग पश्चिम बंगाल में फंसे है या फिर पश्चिम बंगाल के प्रवासी राजस्थान में फंसे हुए है। एडीजी सुमित विश्वास के मुताबिक पिछले तीन दिनों में रोजाना सौ-डेढ़ सौ फोन कॉल्स आते है। इनमें ज्यादातर शरणार्थी मजदूर है।उनकी ज्यादातर प्रॉब्लम भाेजन नहीं मिलना और घर पहुंचने की इच्छा है। इनमें ज्यादातर अवसाद में है। ऐसे में एडीजी सुमित और उनकी कोर टीम ऐसे फोन कॉल्स को प्राथमिकता से सुनकर आधा घंटे में उनका निस्तारण करते है।क्योंकि हमारी प्राथमिकता है कि कोई भी शरणार्थी डिप्रेशन की वजह से कोई गलत कदम नहीं उठा लें। फोन कॉल पर हम उनकी काउंसलिंग कर सकारात्मक प्रयास कर रहे है। उन्हें समझाकर संतुष्ट करते है। 

पश्चिम बंगाल में फंसे राजस्थानी व्यक्ति की दवा खत्म होने पर आया मदद को फोन 

एडीजी सुमित विश्वास के मुताबिक वे सभी फोन सुनते है। इसके लिए राजस्थान में फंसे प्रवासियों की भोजन व ठहरने की समस्या को स्थानीय अधिकारियों से बातचीत कर हल करते है। वहीं, आज पश्चिम बंगाल में फंसे एक प्रवासी राजस्थानी का फोन आया। जिसकी मानसिक बीमारी की दवा खत्म हो गई। उसने फोन कर दवा उपलब्ध करवाने के लिए मदद मांगी। तब उन्हें आसपास के केमिस्ट से संपर्क कर दवा लेने की सलाह दी गई। इसके बाद हमारी टीम ने पश्चिम बंगाल में कलेक्टर के आपदा राहत कंट्रोल रुम में फोन कर संपर्क करवाया और उन्हें दवा उपलब्ध करवाने की जानकारी दी गई। इस तरह उसकी दवा उपलब्ध करवाई गई।

कोटा में फंसे करीब आठ हजार बच्चों को शुक्रवार देर रात लगभग 252 बसों से यूपी भेजा गया। ये सभी बच्चे यूपी में विभिन्न जिलों के रहने वाले थे।

कोचिंग में पढ़ने आए बच्चों को कोटा से यूपी भेजने के लिए की गई कवायद हुई सफल

लॉक डाउन के दौरान ही कोटा में फंसे करीब आठ हजार बच्चों को शुक्रवार देर रात लगभग 252 बसों से यूपी भेजा गया। ये सभी बच्चे यूपी में विभिन्न जिलों के रहने वाले थे। यहां कोटा में मेडिकल, इंजीनियरिंग की कोचिंग करने आए हुए थे। राज्य सरकार ने प्रवासी लोगों की मदद के लिए आईएएस प्रवीण गुप्ता और आईपीएस संजय अग्रवाल को उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड का नोडल अफसर नियुक्त किया था। इन दोनों अफसरों ने राज्य सरकार की तरफ से यूपी तक इन बच्चों को पहुंचाने में अहम रोल निभाया। इसके लिए यूपी सरकार से संपर्क साधा। आखिरकार यूपी सरकार की सहमति मिलने पर शुक्रवार शाम को 252 बसें कोटा पहुंची। तब विभिन्न हॉस्टलों व पीजी गेस्ट हाउस में ठहरे आठ हजार स्टूडेंट्स को यूपी भेजा गया। उनकी बस स्टैंड पर ही स्क्रीनिंग करवाई गई। बसों को सेनेटाइज किया गया।

कई राज्यों के करीब 25 हजार बच्चे यहां लॉक डाउन की वजह से फंसे हुए है उन्हें भी अपने यूपी के साथियों के जैसे घर जाने का इंतेजार

विभिन्न राज्यों से कोचिंग करने आए करीब 25 हजार बच्चे फंसे है कोटा में

जानकारी के अनुसार कोटा में करीब 15 नामी और 150 अन्य कोचिंग सेंटर्स है। जहां प्रोफेशनल्स कोर्सेस की तेयारियों के लिए राजस्थान के अलावा उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, हरियाणा, पंजाब और अन्य राज्यों के करीब 25 हजार बच्चे यहां लॉक डाउन की वजह से फंस गए है। उन्हें भी अपने यूपी के साथियों के जैसे घर जाने का इंतेजार है। बताया जा रहा है कि राज्य सरकार के इन नोडल अफसरों ने संबंधित सरकारों से बातचीत की है। लेकिन कोई हरी झंडी नहीं मिली है।

कोटा में फंसा अलवर का छात्र बोला- राज्य सरकार हमें कब घर पहुंचाने में मदद करेगी

कोटा में ही कोचिंग कर रहे अलवर बहरोड़ के रहने वाले छात्र संजय यादव ने फोन पर बताया कि वह भी लॉक डाउन की वजह से कोटा में फंस गया है। उनके परिजनों ने काफी प्रयास किए। लेकिन अधिकारियों ने पास जारी नहीं किया। इससे वह घर नहीं जा सका। संजय के मुताबिक राजस्थान सरकार बाहरी छात्रों को घर भेजने के लिए काफी प्रयास कर रही है। लेकिन राजस्थान के ही अन्य जिलों के बच्चों की सरकार को कोई परवाह नहीं है।