Jammu Kashmir High Court Hearing Via Video Conferencing Amind Lockdown Due To Novel Coronavirus (COVID-19) Outbreak | बेडरूम से कुछ कदम चले, फोन चालू किया और सीधे वर्चुअल कोर्ट रूम में पहुंच गए; बस यूनिफॉर्म पहनना जरूरी

Jammu Kashmir High Court Hearing Via Video Conferencing Amind Lockdown Due To Novel Coronavirus (COVID-19) Outbreak | बेडरूम से कुछ कदम चले, फोन चालू किया और सीधे वर्चुअल कोर्ट रूम में पहुंच गए; बस यूनिफॉर्म पहनना जरूरी


  • देशभर में हुए लॉकडाउन के बाद जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मामलों की सुनवाई हो रही; यह पहली बार है जब पूरा हाईकोर्ट घर से काम कर रहा
  • कोर्ट की कार्यवाही का समय और तरीका वैसा ही है, जजों के स्क्रिन पर आते ही वकील घर में ही खड़े होकर उनका अभिवादन करते हैं

मोहित कंधारी

मोहित कंधारी

Apr 02, 2020, 04:47 PM IST

जम्मू. तारीख-30 मार्च, लॉकडाउन का छठा दिन: कोरोनावायरस से जुड़े मामलों में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की मदद करने के लिए एमिकस क्यूरी (किसी विशेष मामले में कोर्ट की सलाहकार) नियुक्त की गईं सीनियर एडव्होकेट मोनिका कोहली रोज की तरह ही अपनी ड्यूटी कर रही हैं। फर्क बस इतना है कि आज वे जल्दबाजी में नहीं है, न ही उन्हें रोजाना की तरह ट्रैफिक में फंसने की कोई चिंता है। उन्हें कोर्ट रूम पहुंचने के लिए अपने बेडरूम से बस कुछ कदम ही चलने की जरुरत है। एक मिनट के अंदर ही वे खुद को पांच अन्य वकीलों के साथ वर्चुअल कोर्ट रूम में मौजूद पाती हैं। ये पांचों वकील भी अपने-अपने घरों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही कोर्ट की कार्यवाही में हिस्सा ले रहे हैं।

सुबह 10 बजते ही चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सिंधु शर्मा स्क्रिन पर नजर आती हैं। यह पहली बार है, जब 2 महिला जजों की डिविजन बेंच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई कर रही हैं। दोनों ही जज कोरोनावायरस को फैलने से रोकने के लिए देशभर में हुए लॉकडाउन के बीच जनहित वाले मुद्दों की सुनवाई जम्मू के अपने-अपने घरों से कर रहीं हैं। जज समेत ये पांचों वकील अपने-अपने घरों से इस कार्यवाही में मौजूद हैं, लेकिन नियमों के मुताबिक ये सभी अपनी यूनिफार्म में हैं।

राज्य में कई लॉकडाउन हुए, लेकिन हाईकोर्ट पहली बार वर्क फ्रॉम होम कर रहा 
जम्मू-कश्मीर में लॉकडाउन नई बात नहीं है। 90 के दशक के बाद से घाटी में बढ़ते उग्रवाद के बाद यहां लॉकडाउन होता रहा है, लेकिन यह पहली बार है, जब राज्य में हाईकोर्ट पर लॉकडाउन का असर पड़ा है। पूरा हाईकोर्ट वर्क फ्राम होम कर रहा है। हालांकि इससे पहले भी कई मौकों (आतंकियों से जुड़े मामलों) पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हाईकोर्ट में सुनवाई होती रही है। लेकिन तब जज और वकील, हाईकोर्ट में ही मौजूद रहते थे।

जनता कर्फ्यू (22 मार्च) के बाद से ही जम्मू की सड़कों और बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है।

“कोर्ट की सुनवाई का तरीका वैसा ही है, जजों के स्क्रिन पर आते ही वकील घर में ही खड़े होकर उनका अभिवादन करते हैं”
मोनिका कोहली, पहली बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट की कार्यवाही में हिस्सा ले रही थीं। उन्होंने इस अनुभव को साझा करते हुए बताया, मेरे लिए यह एक अद्भुत अनुभव था। एक सभ्य समाज का हिस्सा होने के नाते सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखते हुए अपने दायित्वों को निभाना वाकई दिलचस्प लगा। वे बताती हैं, “कोर्ट की कार्यवाही वैसे ही चली, जैसे चलती है। हमेशा की तरह जैसे ही हमने डिविजन बेंच की दोनों जजों को हमारी स्क्रिन के सामने पाया, तो सबसे पहले हमने खड़े होकर उनका अभिवादन किया। कार्यवाही शुरू हुई और मैंने देश में 21 दिन के लॉकडाउन के कारण जम्मू में फंसे यात्रियों की परेशानियों और चिंताओं को चीफ जस्टिस के सामने रखा। चीफ जस्टिस ने सरकार के अफसरों को इन लोगों की सुविधाओं को मुहैया करने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिए। एक-एक करके, सभी वरिष्ठ वकीलों ने कोर्ट रूम में मौजूद अपने मामलों को डिविजन बेंच के सामने रखा और इन सभी मामलों में बेंच द्वारा जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए गए।

“लॉकडाउन से पहले ही कोर्ट परिसर में सोशल डिस्टेंसिंग का सख्त पालन शुरू हो चुका था”
मोनिका कोहली बताती हैं, “चीफ जस्टिस गीता मित्तल ने जम्मू और कश्मीर में कोरोनावायरस के फैलाव को रोकने के लिए पहले से ही जरूरी उपायों की शुरुआत कर दी थी। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के ऐलान से पहले ही उन्होंने कोर्ट परिसर में वकीलों की भीड़ पर रोक लगा दी थी। हर दिन कोर्ट परिसर में सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखने के लिए सख्त निर्देशों के सर्कुलर जारी किए जाते थे। कोर्ट पहुंचने वाले लोगों की स्क्रीनिंग भी की जाती थी।”

जनता कर्फ्यू से पहले ही जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर सख्त सर्कुलर जारी कर दिए गए थे। 

कोहली ने बताया, “जब पहली बार ईरान में फंसे कश्मीर घाटी के कुछ छात्रों ने ईमेल के जरिए चीफ जस्टिस से संपर्क किया, तो उन्होंने इन ईमेल को एक जनहित याचिका के तौर पर लिया और प्रशासन को जरूरी कदम उठाने के लिए कहा। उन्होंने कोरोनोवायरस को राज्य में फैलने से रोकने के लिए समय-समय पर केंद्र शासित प्रदेश सरकार और विदेश मंत्रालय को नोटिस भी जारी किए।

“सभी जरूरी मामलों की सुनवाई वीडियो कॉल पर हो रही”
मोनिका कोहली बताती हैं, “चीफ जस्टिस ने सोशल डिस्टेंसिंग बनाते हुए बेहद जरूरी मामलों को ही प्राथमिकता दी। उन्होंने कोर्ट परिसर में लोगों की आवाजाही को कम करने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यवाही पर जोर दिया।” मोनिका कोहली न्यायपालिका में सिस्टम को मॉर्डन करने और अपग्रेड करने के लिए भी चीफ जस्टिस की तारीफ करती हैं। वे बताती हैं कि चीफ जस्टिस कई अन्य जरूरी मामलों में भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई कर रही हैं। एक मामले में बीएसएनएल के मुख्य महाप्रबंधक को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट की कार्यवाही में हिस्सा लेने का कहा गया था। चीफ जस्टिस ने उन्हें जल्द से जल्द जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड्स और ऑब्जर्वेशन होम्स के 24 स्थानों को लीज लाइन कनेक्शन देने के निर्देश दिए थे।

प्रवासी मजदूरों को लॉकडाउन में जरूरी सुविधा देने से जुड़े मामले पर 3 अप्रैल को सुनवाई  
मोनिका बताती हैं, “सभी जरूरी मामलों को सुनते हुए, डिवीजन बेंच ने सभी संबंधित एजेंसियों को यह निर्देश भी जारी किया था कि जहां भी संदिग्ध मामले आ रहे हैं और लोगों को क्वारेंटाइन किया जा रहा है, ऐसी सभी जगहों पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा का पूरा-पूरा ध्यान रखा जाए। डिविजन बेंच ने अधिकारियों को प्रवासी मजदूरों की जरूरतों, उनके रहने-खाने का इंतजाम और उनकी सेहत की देखभाल का भी निर्देश दिया है। साथ ही यह भी कहा है अगर इस दिशा में कामकाज नहीं हो रहा है तो अगली सुनवाई में इस मुद्दे को ध्यान में लाया जाए। कोरोनावायरस से जुड़े मामलों में यह सुनवाई 3 अप्रैल को होगी।

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