Kashmiri girls are becoming RJs, running gyms and now are not shy to talk about periods | कश्मीरी लड़कियां आरजे बन रहीं, जिम चला रहीं; अब पीरियड्स पर बात करने में भी नहीं शर्माती

Kashmiri girls are becoming RJs, running gyms and now are not shy to talk about periods | कश्मीरी लड़कियां आरजे बन रहीं, जिम चला रहीं; अब पीरियड्स पर बात करने में भी नहीं शर्माती


  • डॉ. ऑकाफीन निसार हेल्थ सेंटर चलाती हैं, ये श्रीनगर के एक छोटे कस्बे में महिलाओं को पीरियड्स के बारे में जागरूक कर रही हैं
  • आमीन जिम चलाती हैं, उनके क्लब में एक हजार से ज्यादा महिलाएं रजिस्टर हैं और तमाम रोक-टोक के बाद भी यह आंकड़ा रोजाना बढ़ रहा है

कश्मीर से हीरा अजमत

कश्मीर से हीरा अजमत

Mar 09, 2020, 10:06 AM IST

श्रीनगर. कश्मीर को इंसान जन्नत मानता है। पर इसी जन्नत में महिलाओं के लिए पीरियड्स पर बात करना और जिम जाने का नाम लेना हमेशा मुश्किलों भरा रहा है। खेल के मैदान में उतरना भी महिला के लिए आसान नहीं रहा। लेकिन धीरे-धीरे ही सही अब यहां की तस्वीर बदल रही है। आगे बढ़ाने के मामले में महिलाएं नजीर पेश कर रही हैं। अब वे पीरियड्स पर खुलकर चर्चा कर रही हैं, जिम जा रही हैं और खेल भी रही हैं। महिलाओं के लिए धरती के इस स्वर्ग में फूल खिलने लगे हैं और बदलाव की खुशबू से कश्मीर की फिजा महकने भी लगी है। पेश है ऐसी ही कुछ महिलाओं की किस्से, जो खुद ही बता रही है बदलाव की कहानी…

डॉ. ऑकाफीन निसार, श्रीनगर के साइदा कदल में हेल्थ सेंटर चलाती हैं 
पीरियड्स, एक ऐसा मुद्दा जिसपर कश्मीर के कई इलाकों में आज भी खुलकर बात नहीं की जाती। ऐसे में श्रीनगर के एक छोटे से इलाके साइदा कदल में हेल्थ सेंटर चलाने वाली डॉ. ऑकाफीन निसार ने महिलाओं को जागरूक करने की पहल की है। 29 साल की डॉ. निसार ने ‘पनिन फिक्र’ नाम के एक अभियान की शुरुआत की। पनिन फिक्र का मतलब है खुद की फिक्र करना।

डॉ. निसार बताती हैं कि ‘एक महिला सभी की चिंता करती है, लेकिन खुद का ध्यान कभी नहीं रख पाती। मैं चाहती हूं कि इस इलाके की महिलाएं मासिक धर्म को लेकर फैली भ्रांतियों से ऊपर उठें और अपनी चिंता करें। अभियान की शुरुआत जनवरी 2019 में दो नर्सेज और चार आशा कार्यकर्ताओं के साथ एक सब-सेंटर में हुई थी। इस सेंटर के जरिए 4000 की आबादी को सेवाएं दी जाती हैं।’

डॉ. निसार महिलाओं को जागरूक करने के लिए हेल्थ सेंटर चलाती हैं।

2017 में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के डॉक्टर्स ने स्टडी की, जिसमें पाया कि कश्मीरी महिलाओं में माहवारी (पीरियड्स) की समस्याएं आम हैं। 10% महिलाओं को अनियमित माहवारी होती है। पीएमएस (48%) और मेनोरेजिया (24%) के बाद 51% महिलाओं में डिस्मेनोरिया सबसे आम मासिक धर्म डिसऑर्डर था। डॉ. निसार हर वीकेंड अपने क्लीनिक में एक सेशन भी करती हैं, जिसके जरिए महिलाओं को उनके मासिक धर्म स्वास्थ्य के बारे में जागरूक किया जाता है।

डॉ. निसार ने टीम के साथ मिलकर रिसर्च की तो पाया कि जागरूकता की कमी और पैड का महंगा होना महिलाओं की परेशानियों का मुख्य कारण है। मुहिम के जरिए टीम ने दो सस्ते पैड बनाने वाली कंपनियों का चुनाव किया। यहां से मिलने वाले दो नैपकिन्स की कीमत 5 रुपए होती है। शुरू में लोगों की प्रतिक्रियाएं जानने के लिए पैकेट्स को फ्री में बांटा गया, लेकिन बाद में इन्हें रियायती दरों पर दिया जाने लगा। डॉ. निसार बताती हैं कि माहवारी को लेकर सामाजिक परेशानियों और अंधविश्वास की कीमत महिलाएं अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा के जरिए चुकाती हैं। किसी को तो बदलाव के लिए आगे आना होगा।

महरीन अमीन, जिम संचालक
25 साल की महरीन अमीन, हवाल में इस्लामिया कॉलेज के नजदीक एक जिम चलाती हैं। अमीन बताती हैं कि फिटनेस को आज भी समाज में गंभीरता से नहीं लिया जाता और इसलिए मेरे काम को हर बार अनदेखा कर दिया जाता है। मेरे काम के चलते कई बार मुझे भद्दे कमेंट्स और गालियां मिलती हैं, लेकिन जब तक मेरे क्लाइंट्स और परिवार खुश हैं, मुझे फर्क नहीं पड़ता।

आमीन के क्लब में एक हजार से ज्यादा महिलाएं रजिस्टर हैं और तमाम रोक-टोक के बाद भी यह आंकड़ा रोज बढ़ रहा है। ट्रेनर बताती हैं कि फिटनेस और हेल्थ को लेकर घाटी में लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है, सभी जान गए हैं कि जिम का मतलब केवल सिक्स पैक एब्स नहीं होता।

महरीन अमीन जिम चलाती हैं।

अंजुमन फारुख, प्रोफेशनल मार्शल आर्ट खिलाड़ी
15 नेशनल मैचों में 14 गोल्ड मेडल और 2 सिल्वर मेडल जीत चुकीं थांग ता(मार्शल आर्ट) प्लेयर और कोच अंजुमन फारुख लड़कियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देती हैं। अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने वाली अंजुमन ने अपने शौक और खेल प्रेम के लिए सामाजिक परेशानियां उठाईं। बीमार पिता की असमय मौत के बाद घर में आर्थिक मुश्किलें बढ़ गईं थीं, लेकिन अंजुमन ने इसे भी अपनी ताकत बनाया।

 
27 साल की चैंपियन बताती हैं, ‘लड़की होने के कारण मुझे कई दिक्कतें हुईं पर मैंने कभी हार नहीं मानी। थांग ता मेरा जुनून था, जो बाद में मेरा पेशा भी बना।’ अंजुमन फिलहाल एक सरकारी स्कूल में फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर हैं और लड़कियों को ट्रेनिंग देती हैं। उन्होंने साल 2011 में पहली बार वर्ल्ड कप खेला था और गोल्ड जीतने वाली पहली सीनियर लड़की थीं।

महक जुबैर, रेडियो जॉकी
रेडियो-शो खुश-खबर की होस्ट महक जुबैर को लोग आरजे महक और महक मिर्ची के नाम से भी जानते हैं। महक रेडियो मिर्ची एफएम में मॉर्निंग शो को होस्ट करती हैं। अपनी जॉब के बारे में बताते हुए महक ने कहा, यह दुनिया का सबसे अच्छा काम है, लेकिन उतना ही चुनौतीपूर्ण भी। आप लगभग हर दिन ऑन एयर होते हैं, फिर चाहे इलाके में मौसम खराब हो या हड़ताल हो। शो खुश-खबर में महक कश्मीर और उसके नागरिकों के बारे में अच्छी बातें पेश करती हैं। 

रेडियो-शो खुश-खबर की होस्ट महक जुबैर 

महक कहती हैं कि उथल-पुथल से भरी घाटी में हर रोज अच्छी खबरें निकालने में बहुत परेशानी होती थी। एक न्यूज चैनल के साथ बतौर सिटीजन जर्नलिस्ट करियर की शुरुआत करने वाली महक रेडियो जॉब से बेहद खुश हैं। वो बताती हैं कि मुझे बात करना बहुत पसंद है और रेडियो इसका सबसे अच्छा जरिया है। 

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