Latest News Update; India-China border situation, Line of Actual Control, Rafale combat aircraft, commanders conference | चीन सीमा के हालात पर मीटिंग करेंगे एयर चीफ मार्शल और उनके 7 कमांडर इन चीफ; राफेल का ऑपरेशनल स्टेशन बनाए जाने पर भी फोकस


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नई दिल्ली13 मिनट पहले

न्यूज एजेंसी के मुताबिक, राफेल में 150 किलोमीटर तक टारगेट हिट करने वाली मीटियर मिसाइल भी रहेगी। इससे चीन एयरफोर्स के मुकाबले भारतीय एयरफोर्स को काफी बढ़त हासिल होगी।

  • 22 जुलाई से शुरू हो रही वायुसेना की कमांडरों की कॉन्फ्रेंस में सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होगी
  • भारत को इसी महीने के आखिरी में राफेल फाइटर जेट्स का एक बेड़ा मिलना है, इनकी जल्द तैनाती पर भी बात होगी

चीन के साथ तनाव के बीच वायुसेना के कमांडर्स इस हफ्ते अहम बैठक करेंगे। इसमें लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पास पूर्वी लद्दाख में जारी हालात पर चर्चा होगी। इसके साथ ही इस महीने मिलने वाले राफेल फाइटर जेट के लिए जल्द से जल्द ऑपरेशनल स्टेशन बनाए जाने पर भी चर्चा की जाएगी। कमांडरों की यह मुलाकात 22 जुलाई से शुरू हो रही कॉन्फ्रेंस के दौरान होगी और यह दो दिन तक चलेगी। वायुसेना अधिकारी ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि कॉन्फ्रेंस के दौरान सुरक्षा से जुड़े कई मसलों पर चर्चा की जाएगी।

सूत्रों ने बताया कि एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया की अध्यक्षता में होने वाली इस कॉन्फ्रेंस में उनके सभी 7 कमांडर इन चीफ शामिल होंगे। इस दौरान चीन के साथ सीमा पर तनाव और पूर्वी लद्दाख और उत्तरी सीमाओं पर वायुसेना की तैनाती को लेकर चर्चा होगी।

वायुसेना ने फॉरवर्ड बेस पर तैनात किए मॉडर्न तकनीक वाले फाइटर जेट्स
एयर फोर्स ने मॉडर्न टैकनीक वाले अपने फाइटर जेट मिराज-2000, सुखोई-30, मिग-29 एडवांस और फॉरवर्ड बेस पर तैनात किए हैं। यहां से दिन और रात दोनों ही ऑपरेशन को अंजाम दिया जा सकता है। चीन सीमा के फॉरवर्ड बेसों पर अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर तैनात किए गए हैं। ये रात के समय भी पूर्वी लद्दाख के इलाके में गश्त कर सकते हैं।

राफेल की तैनाती से वायुसेना की ताकत बढ़ेगी
फ्रांस से इसी महीने के आखिर में राफेल फाइटर जेट मिलने हैं, इसकी तैनाती को लेकर भी कॉन्फ्रेंस में चर्चा होगी। अधिकारियों ने बताया कि इन राफेल जेट की तकनीक बेहद एडवांस है और ये पूरी तरह हथियारों से लैस होंगे। इनकी जल्द से जल्द तैनाती से वायुसेना की ताकत बढ़ जाएगी।

राफेल की दो स्क्वॉड्रन तैनात होने से भारत को लंबी दूरी तक ऑपरेशन में आसानी होगी। इसके साथ ही वायुसेना में फाइटर जेट्स की कमी की भी भरपाई हो सकेगी।

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