Lockdown ruined more than 200 million flowers business in Navratri; Some farmers made gulakanda from rose and some made tractors on standing crop | लॉकडाउन ने नवरात्रि में फूलों का 20 करोड़ से ज्यादा का बिजनेस बर्बाद किया; कुछ किसानों ने गुलाब से गुलकंद बनाया तो कुछ ने खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाया

Lockdown ruined more than 200 million flowers business in Navratri; Some farmers made gulakanda from rose and some made tractors on standing crop | लॉकडाउन ने नवरात्रि में फूलों का 20 करोड़ से ज्यादा का बिजनेस बर्बाद किया; कुछ किसानों ने गुलाब से गुलकंद बनाया तो कुछ ने खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाया


  • एमपी, यूपी, राजस्थान, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र के कई किसान करते हैं फूलों की खेती
  • कोरोना से बचाव के लिए देश में 21 दिन का लॉकडाउन, छोटे-बड़े सभी मंदिर और तीर्थ स्थल श्रद्धालुओं के लिए बंद हैं

दैनिक भास्कर

Apr 02, 2020, 03:20 PM IST

भोपाल. आज चैत्र नवरात्रि का अखिरी दिन है। इन नौ दिनों अमूमन देशभर में फूलों की खपत बढ़ जाया करती थी। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। लॉकडाउन ने फूलों का कारोबार ठप कर दिया। छोटे से लेकर बड़े मंदिर, देवालय और तीर्थस्थल तक, सब बंद पड़े हैं। हर तरह के आयोजनों पर पूरी तरह रोक है। ऐसे में फूल किसानों और कारोबारियों का यह सीजन बर्बाद हो गया है। मजबूरी में कुछ किसानों ने गुलाब से गुलकंद बनाना शुरू कर दिया है, पर उनके बाकी फूल बर्बाद हो चुके हैं। कुछ किसानों ने तो फूलों की खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चला दिया है और उन खेतों में सब्जी बुवाई की तैयारी शुरू कर दी है। भास्कर ने नौ राज्यों के 11 शहरों में फूलों की खेती करने वाले किसानों और इसके कारोबार में लगे लोगों से बातचीत की। इनका कहना है कि नवरात्रि के दौरान 20 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। पूरी रिपोर्ट…

जयपुर से विष्णु शर्मा… रोज 25 लाख का नुकसान

जयपुर शहर की सबसे बड़ी और पुरानी जनता मार्केट फूल मंडी लॉकडाउन के चलते वीरान पड़ी है। गुलाब, मोगरा, नौरंगा और कई देशी-विदेशी फूलों से महकने वाली इस मंडी में ऐसा पहला मौका है जब नवरात्रों में 10 दिनों से फूलों की लगभग 500 स्थाई और अस्थाई दुकानें बंद पड़ी हैं। जयपुर फूल व्यापार मंडल के अध्यक्ष छुट्‌टनलाल सैनी बताते हैं- आम दिनों में यहां फूलों का कारोबार रोजाना करीब 10 से 12 लाख रुपए का होता था। वहीं, नवरात्र में यह कारोबार रोजाना करीब 20 से 25 लाख रुपए तक पहुंच जाता था। लेकिन, लॉकडाउन के कारण यहां एक भी फूल नहीं बिक रहा है। मंडी में रोजाना गुलाब करीब 5 से 6 टन आता था। गेंदा 10 से 12 टन, नौरंगा करीब 15 टन फूल बिकता था। लेकिन, अब मंडी तक नहीं आ पा रहा। वहीं, जयपुर की इस मंडी में महाराष्ट्र, हिमाचल, हरियाणा, दिल्ली, पुणे, बेंगलुरु व अन्य जगहों से फूल आता था। आर्चिड जैसे फूल विदेश से आते थे, जो अब मंडी तक नहीं पहुंच रहे हैं।

पटना से आशुतोष रंजन… किसानों के लिए खेत में काम करने वाले मजदूरों का खर्च निकालना मुश्किल हुआ

पटना के किसान भी लॉकडाउन से परेशान हैं। नवरात्रि में ये किसान एक दिन में 30 से 40 हजार रुपए का फूल बेच लेते थे। इस साल इन किसानों की हालत खराब है। फतुहा में पॉलीहाउस बनाकर गुलाब की खेती करने वाले नागेंद्र कुमार बताते हैं- लॉकडाउन की वजह से खेत में फूल बर्बाद हो रहे हैं। जो मजदूर खेत में काम करते हैं, उनका खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है। चिरौरा में जरबेरा और डच गुलाब की खेती करने वाले गुड्डू कुमार बताते हैं- लॉकडाउन के 20 दिन पहले से ही कारोबार ठप पड़ा है। पिछले एक महीने में करीब आठ लाख रुपए का नुकसान हो गया है। नवरात्रि के दिनों में फूलों की डिमांड ज्यादा होती है। लेकिन, इस बार सब ठप है। बिहार के कृषि मंत्री प्रेम कुमार का कहना है कि लॉकडाउन में हुई फूलों की क्षति का आकलन कराया जाएगा। इस पर विभागीय बैठक में निर्णय लिया जाएगा।

लखनऊ से आदित्य तिवारी… इस नवरात्रि में एक रुपए की आमदनी नहीं हुई

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सिर्फ नवरात्रि के दौरान दो करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित हुआ है। इससे जुड़े 1000 मजदूर सीधे तौर पर बेरोजगार हो गए हैं और अपने घरों को लौटने लगे हैं। हनुमान सेतु के दुकानदार अनुराग का कहना है कि हालत बहुत खराब है। नवरात्रि में करीब प्रत्येक दिन 10 क्विंटल से ज्यादा का कारोबार हम 16 दुकानदार करते थे। लखनऊ के सिर्फ शहरी क्षेत्र में फूलों के तकरीबन 100 काउंटर हैं।  इनसे 500 माली और मजदूर जुड़े हैं। करीब 500 लड़के अकेले नवरात्रि में 2000 से अधिक दुकानें, घर व मंदिरों में फूलों की डिलीवरी करते हैं और मंदिरों व श्रद्धालुओं के घरों में झांकियां सजाते हैं। हनुमान सेतु पर फूलों के कारोबार से जुड़े नरसिंग का कहना है कि सिर्फ नवरात्रि के दिनों में शहरी क्षेत्र में ही 10 लाख रुपये का औसत कारोबार होता है। सिर्फ नवरात्रि में ही 70 लाख रुपए डूब गए। 22 मार्च से एक रुपए की आमदनी नहीं हुई। करीब 1000 परिवारों पर इसका असर पड़ा है।

कन्नौज में इन फूलों से इत्र बनता है, लेकिन फैक्ट्रियां बंद होने से यह खराब हो रहे हैं।

कन्नौज: खेतों में सड़ रहे फूल, इत्र फैक्ट्री और बाजार दोनों बंद

इत्रनगरी के नाम से मशहूर उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले के फूलों से पूरी दुनिया महकती है, लेकिन लॉकडाउन के कारण यहां के फूल खेतों में सड़ रहे हैं। यहां सैकड़ों एकड़ खेतों में किसान तरह-तरह के फूल उगाते हैं, जिनसे यहां की फैक्ट्रियों में इत्र बनता है। लेकिन, लॉकडाउन के कारण सभी फैक्ट्रियां बंद हैं। मंदिर, धार्मिक और सामाजिक आयोजन बंद होने के कारण बाजार में फूलों की बिक्री भी नहीं हो पा रही है। ऐसे में करोड़ों रुपए के फूल खेतों में सड़ रहे हैं। फूल व्यापारी विनीत ने बताया- लॉकडाउन की वजह से सभी दुकानदारों ने दुकानें बंद कर रखी है, मंदिर-मस्जिद सभी बंद है, फूल को खरीदने वाला कोई नहीं है। काम पूरी तरह बंद चल रहा है।

जालंधर से बलराज मोर… 250 फूल वाले, किसी को 40 हजार तो किसी को 5 लाख तक का नुकसान

जालंधर में 250 से ज्यादा फूल के व्यापारी और किसान हैं। लॉकडाउन के कारण फूल न बिकने से एक-एक को 40 हजार से लेकर 5 लाख रुपए तक का नुकसान हो रहा है। शहर के बाहरी क्षेत्र से सटे खेतों में फूलों की खेती करने वाले रितेश कुमार, सुभाष चंद्र ने कहा- खेत में लगे फूल बर्बाद हो रहे हैं। नवरात्रि में सामान्य दिनों जैसी बिक्री भी नहीं हो रही है। जालंधर शहर फ्लावर मार्केट एसोसिएशन के प्रधान गिरधारी लाल का कहना है- जो लोग डेकोरेशन का काम करते थे, उन्हें 5 लाख के करीब नुकसान उठाना पड़ा है।  छोटे दुकानदारों को भी कम से कम 40 हजार रुपए का नुकसान हुआ है।

हरियाणा के खेतों में लगे इन फूलों की सप्लाई दिल्ली की गाजीपुर मंडी में होती है।

कुरुक्षेत्र से मनोज कौशिक… फूल नहीं बिके तो खड़ी फसल में चला दिए ट्रैक्टर

हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले का गांव बीड़ सुजरा फूलों की खेती के लिए मशहूर है। यहां के किसानों पर कोरोनावायरस की आर्थिक मार पड़ी है। इस गांव में पिछले 100 साल से फूलों की खेती हो रही है। करीब 300 एकड़ में किसान करोड़ों रुपए का फूल उगाते हैं। हालत ये है कि गांव में इतना फूल उगता है कि छोटी सी मंडी भी बना रखी है लेकिन इस सीजन में उनके चेहरे मुरझा गए हैं। नवरात्रि उनके लिए बड़ा सीजन होता था। गांव के किसान सतबीर उर्फ सत्तू हर साल इस सीजन का इंतजार करते थे। उनका कहना है कि फूल बहुत अच्छे खिले थे। फसल अच्छी थी लेकिन लॉकडाउन की वजह से मार्केट में ही फूल नहीं जा सका। ऐसे में उन्होंने खड़ी फसल में ट्रैक्टर चला दिया। अब सरकार के रूख को देखते हुए सब्जी की बिजाई कर दी है। फूलों के व्यापारी श्याम लाल का कहना है सारा फूल दिल्ली की गाजीपुर मंडी में जाता है। यहां से फूलों की मुख्य वैरायटी गेंदा है, इसके अलावा कुछ और फूल भी जाते हैं। हर रोज करीब 40 से 50 लाख रुपए का फूल हरियाणा से गाजीपुर व अन्य शहरों में जाता है। लॉकडाउन के वजह से करीब 8 से 10 करोड़ रुपये का नुकसान किसानों को हुआ है।

इंदौर से राजीव तिवारी… गुलाब का तो गुलकंद बन जाएगा, बाकी फूल हो गए खराब

मध्य प्रदेश का इंदौर कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों में एक है। यहां प्रतिदिन फूल लेकर आने वाली गाड़ियों के पहिए थम गए हैं। सबसे ज्यादा गुलाब, गेंदा, मोगरा और नवरंगा की खेती करने वालों को नुकसान हो रहा है। गुलाब की पंखुड़ियों भी खेतों में ही सूखकर गिर रही हैं। नवरात्रि, रामनवमी तो बीत गई, लॉकडाउन हनुमान जंयती तक रहने वाला है। यह सीजन शादियों का होता था, लेकिन वो भी टल गईं। ऐसे में प्रतिदिन किसानों को लाखों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। कुछ किसान गुलाब का तो गुलकंद बना रहे हैं, लेकिन बाकी फूल खराब हो रहे हैं। मंडी फूल व्यापारी कुसमाकर के अनुसार गेंदे की फसल का सीजन जा चुका है। अभी खेतों में बिजली, नवरंगा और मोगरे की बहार है। लॉकडाउन के कारण यह बहार खेतों में ही मुरझा रही है। नवरात्रि में हर दिन इंदौर मंडी में 25 से 30 लाख रुपए कीमत के 20 से 25 क्विंटल फूल बिकते थे। इंदौर मंडी में फूल आसपास के करीब 50 गांव से आता है। इसमें दातोदा, शकरखेड़ी, मगरखेड़ा, नैनोद हातोद, मिर्जापुर, बिजलपुर क्षेत्र शामिल हैं। महू तहसील का मेमदी गांव तो जिले के फूलों के गांव (फ्लॉवर विलेज) के रूप में प्रसिद्ध हो चुका है। यहां के 120 किसान हर साल 10 हजार क्विंटल से अधिक फूलों की खेती कर रहे हैं। लेकिन, अब सब मंदा है।

भोपाल में खरीदार नहीं आने के कारण पड़े गुलाब के फूल।

भोपाल से नवीन मिश्रा… नवरात्रि के बाद शादी का सीजन भी खराब होने का डर

कोरोनावायरस से बचाव के कारण लगाए 21 दिन के लॉकडाउन के कारण फूल किसानों और व्यापारियों का नवरात्रि का व्यापार खराब हो गया है। अब उन्हें डर है- कहीं ऐसा न हो कि शादी का सीजन भी खराब हो जाए। भोपाल के करीब डेढ़ हजार एकड़ में फूलों की खेती होती है। सामान्य दिनों में 3 से 4 हजार रुपए प्रति क्विंटल की दर से करीब 150 क्विंटल फूलों की बिक्री होती है। त्योहारी सीजन में यह सप्लाई 300 क्विंटल तक पहुंच जाती है। लॉकडाउन के कारण यह सप्लाई ठप पड़ी है। गेंदा के फूलों की तो कुछ किसान खाद बना रहे हैं, लेकिन बाकी फूल बर्बाद हो रहे हैं।

पुणे से आशीष राय… मंदिर-आयोजन बंद, लॉकडाउन के बाद एक फूल नहीं बिका

पुणे के फूल विक्रेता सुनीत लोहार ने बताया कि इस कर्फ्यू ने धंधे की कमर तोड़ दी है। पिछले नवरात्रों में 2.5 लाख के फूल बिके थे, लेकिन इस बार एक रुपए का भी फूल नहीं बिका है। अचानक लॉकडाउन की घोषणा के कारण 10 हजार रुपए से ज्यादा के फूलों को कूड़े में फेंकना पड़ा था। इंडियन फ्लोरिस्ट एसोसिएशन के एडमिन रंजीत मंडल ने बताया- 21 मार्च से राज्य में किसी फूल व्यापारी ने एक भी फूल नहीं बेचा है। किसान और फ्लावर शॉप चलाने वाले लगातार उनसे संपर्क कर अपनी व्यथा बता रहे हैं। यह धंधा भी रोज कमाने और रोज खाने जैसे है। लोगों के पास जो सेविंग थी वह खत्म होने को आ गई है।

रायपुर के बाजार में रखे बर्बाद हुए फूल।

रायपुर से सुमन पांडेय… 10 हजार एकड़ में खड़ी गेंदे की फसल बर्बाद

कृषि वैज्ञानिक संकेत ठाकुर ने बताया रायपुर से लगे महासमुंद, बागबहरा में करीब 10 हजार एकड़ में गेंदे की खेती होती है, जो लॉकडाउन के कारण बर्बाद होने के कगार पर है। इससे एक-एक किसान को 5 से 10 लाख रुपए तक का नुकसान हुआ है। फूलों की खेती करने वाले तुषार चंद्राकर ने बताया- जो भी उत्पादन हुआ वो अब किसी का काम का नहीं रह गया। सब्जी का बाजार तो खुला है, फल वाले भी दुकान लगाए हुए हैं, मगर मंदिर वगैरह बंद होने से बिक्री नहीं हो रही है। फूलों को फेंकने के सिवा कोई चारा नहीं है।

रांची से ओम प्रताप सिंह… पहले मौसम की मार अब लॉकडाउन ने बर्बाद किया फूलों का व्यापार

इस साल फूलों की खेती करने वाले किसानों की स्थिति बेहद ही खराब है। पहले मौसम की मार फिर लॉकडाउन का असर। हालात ऐसे रहे कि नवरात्रि में फूलों की सप्लाई ना के बराबर हुई। रांची के चान्हो में किसान विकास प्रसाद ने बताया कि उन्होंने जरबेरा और ग्लैड की खेती की है। लॉकडाउन के दौरान नवरात्रि, सहुल व रामनवमी में इसकी डिमांड बिल्कुल नहीं रही। हर साल रांची के विभिन्न क्षेत्र समेत लोहरदगा, गुमला फूलों की सप्लाई करते हैं। हर साल डिमांड इतनी होती थी कि वो पूरी नहीं कर पाते थे। इस बार लॉकडाउन ने ऐसी स्थिति उत्पन्न कर दी कि खेतों में फूल मुरझा रहे हैं और खरीदार नहीं मिल रहे हैं।

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