‘More water from the roof drips from our eyes, after going to Ayodhya our Raju has not returned till today’ | कारसेवक की मां बोलीं- ‘छत से ज्यादा पानी तो हमारी आंखों से टपकता है, अयोध्या जाने के बाद हमारा राजू आज तक नहीं लौटा, अब उसकी आत्मा को शांति मिलेगी’

‘More water from the roof drips from our eyes, after going to Ayodhya our Raju has not returned till today’ | कारसेवक की मां बोलीं- ‘छत से ज्यादा पानी तो हमारी आंखों से टपकता है, अयोध्या जाने के बाद हमारा राजू आज तक नहीं लौटा, अब उसकी आत्मा को शांति मिलेगी’


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अहमदाबाद7 घंटे पहले

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गोधराकांड में जान गंवाने वाले बेटे की तस्वीर लिए हुए माता-पिता।

  • राम जन्मभूमि अयोध्या में कल राम मंदिर के शिलान्यास के साथ ही करोड़ों देशवासियों के साथ अहमदबाद के एक परिवार का सपना भी पूरा हो जाएगा
  • अहमदाबाद के इस परिवार के लिए यह बात इसलिए भी खास है, क्योंकि राम मंदिर के लिए ही इस परिवार के इकलौते चिराग राजेश की जान चली गई थी

राम जन्मभूमि अयोध्या में 5 अगस्त को राम मंदिर के शिलान्यास के साथ करोड़ों देशवासियों के साथ अहमदबाद के एक परिवार का सपना भी पूरा हो जाएगा। इस परिवार के लिए यह बात इसलिए भी खास है, क्योंकि राम मंदिर के लिए ही इस परिवार के इकलौते चिराग राजेश की जान चली गई थी। बात 27 फरवरी 2002 की है, जब अयोध्या से राम जन्मभूमि का पूजन कर कारसेवक साबरमती एक्सप्रेस से अपने घर गुजरात लौट रहे थे। इसी समय ट्रेन के एस-6 कोच में आग लगा दी गई थी, जिसमें कारसेवकों की जान चली गई थी।

बेटे को हवन के लिए दिया था चोखा
अहमदाबाद के खोखरा की एक चाली में एक बूढ़े माता-पिता रहते हैं। कभी इस परिवार में इनके साथ एक बेटा और 6 बेटियां रहा करती थीं। उस समय बेटे राजेश (प्यार से राजू) की उम्र 27 साल थी और वह एक मिल में काम करके घर खर्च चलाता था। फरवरी 2002 में राजेश रामजन्म भूमि का पूजन करने अयोध्या गया था। मां राधा बा बताती हैं कि राजेश जब अपने 5 दोस्तों के साथ अयोध्या के लिए जा रहा था, तब वह बहुत खुश था। मैंने बेटे के लिए खाने के साथ आलू का चोखा भी बनाकर बेटे से कहा था कि वहां हवन में इस चोखे का भोग याद से लगा देना।

बेटे ने कुछ देर पहले ही किया था आखिरी फोन
राजेश अयोध्या में पूजन करके साबरमती एक्‍सप्रेस ट्रेन से घर वापस लौट रहा था। यह 27 फरवरी का दिन था और ट्रेन जैसे ही गोधरा रेलवे स्टेशन पहुंची तो उसके कोच में आग लगा दी गई। जिस कोच में आग लगाई गई, राजेश अपने दोस्तों के साथ उसी में सवार था। ट्रेन में आग लगने की बात पड़ोसियों से पता चली, लेकिन यह नही पता था कि जिस बोगी में आग लगी, उसी में राजेश भी बैठा था। हमें यह बात दोपहर तक मालूम हुई। इस दिन से आज तक परिवार के आंसू नहीं सूखे।

रो-रोकर मुश्किल से ही बोल पाईं राधा बा
दैनिक भास्कर की टीम ने राधाबाई से बात की, लेकिन वह मुश्किल से ही बोल पा रही थीं। उनकी आंखों में सिर्फ आंसू थे। पति लकवाग्रस्त हैं। घर की माली हालत बहुत ही खराब है। राधा बा ने बताया कि उसी दिन राजेश ने पड़ोसी के यहां फोन कर बताया था कि वो आज घर पहुंच जाएगा, लेकिन हमें नहीं पता था हम उससे आखिरी बार बात कर रहे हैं। राधा बा ये भी कहती हैं कि हमें अपने बेटे पर गर्व है। मेरा बेटा मंदिर के लिए गया था और आज उसके सपना पूरा होने जा रहा है। अब जाकर उसकी आत्मा को शांति मिलेगी।

सरकार से आज तक कोई मदद नहीं मिली
दैनिक भास्कर ने जब राधा बा से उनकी आर्थिक स्थिति के बारे में बात की तो उन्होंने बताया कि आज तक हमें कोई सरकारी सहायता नहीं मिली। बेटे के जाने के बाद घर की माली हालत खराब होती चली गई। आज भी हम इस झोपड़ी में रह रहे हैं। जरा सी बरसात में भी पानी टपकने लगता है। पति लकवाग्रस्त हैं, इसलिए आय का कोई साधन नहीं। आज तक कोई हमारे बारे में जानने नहीं आया कि किस तरह जी रहे हैं। पड़ोसी खाना दे जाते हैं तो खा लेते हैं, नहीं तो भूखे रहते हैं। जिंदगी जैसी भी थी गुजर गई। बेटा खोया है, लेकिन बेटा तो भगवान राम के लिए गया… अब खुश हैं कि उसका सपना पूरा हो रहा है।

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