narendra Modi took blessings from Man Kaur, 103 years old, said – now we have to fight against malnutrition | मोदी ने 103 साल की एथलीट मान कौर से आशीर्वाद लिया, वे राष्ट्रपति से सम्मान लेने के लिए भी दौड़ते हुए ही गई थीं


  • नारी शक्ति सम्मान से सम्मानित महिलाओं ने पीएम मोदी से साझा की कहानी
  • 105 साल की भागीरथी अम्मा ने मोदी से कहा- मैं अब कम्प्यूटर भी सीख रही हूं
  • मोदी ने कहा- महिलाओं को अब कुपोषण को खत्म करने का संकल्प लेना चाहिए

Dainik Bhaskar

Mar 08, 2020, 11:43 PM IST

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार 8 मार्च को महिला दिवस पर राष्ट्रीय नारी शक्ति सम्मान से नवाजी गई महिलाओं से मुलाकात की। इन महिलाओं ने मोदी को अपनी कहानी बताई। इन महिलाओं में 103 साल की एथलीट मान कौर और 105 साल की भागीरथी अम्मा भी शामिल थीं। मान कौर से मोदी ने आशीर्वाद लिया। मान कौर को राष्ट्रपति ने नारी शक्ति सम्मान से नवाजा है। वे राष्ट्रपति से सम्मान लेते वक्त भी दौड़ते हुए ही गई थीं और उन्हें अपने कुछ डांस मूव्स भी दिखाए थे। उनके अलावा भागीरथी अम्मा ने भी मोदी को अपनी कहानी बताई। उन्होंने कहा कि वे दसवीं पास करना चाहती हैं और अब कम्प्यूटर भी सीख रही हैं।

इस मौके पर मोदी ने कहा- महिलाओं की मदद के बिना देश का विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मुहिम की सफलता के पीछे महिलाओं का ही परिश्रम है। उन्होंने कहा कि माताएं और बहनें कुपोषण के खात्मे के लिए अच्छा काम कर सकती हैं और महिला दिवस पर महिलाओं को इसका संकल्प लेना चाहिए।

महिलाओं के संघर्ष की कहानी दुनियाभर की यूनिवर्सिटी के लिए केस स्टडी- मोदी

प्रधानमंत्री ने सम्मानित महिलाओं से कहा, “जल जीवन मिशन भी बिना माताओं और बहनों की मदद के सफल नहीं हो सकता। पानी का मूल्य जितना महिलाओं को पता होता है, उतना किसी और को नहीं। आप लोग अपने आप में एक अच्छी केस स्टडी हैं। अगर दुनिया भर की यूनविर्सिटीज को आपकी कहानी पता चल जाए तो वह इसे केस स्टडी के तौर पर लेंगे। अध्ययन करेंगे। आप लोगों ने खुद के साथ दूसरों की जिंदगी भी बनाई। आपकी प्रेरणा  से यह देश काफी आगे बढ़ेगा।”

महिलाओं ने साझा कीं कहानियां

1) भागीरथी अम्मा: केरल की 105 साल की भागीरथी अम्मा ने चौथी कक्षा की परीक्षा अच्छे नंबरों के साथ उत्तीर्ण की है। उन्होंने बताया कि नौ वर्ष की उम्र में मां के देहांत के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। अब इतने वर्ष बाद फिर पढ़ाई शुरू की तो गणित विषय में 75 में से 75 नंबर हासिल किए। उन्होंने कहा कि अब मैं 10वीं पास करना चाहती हूं। कंप्यूटर भी सीख रही हूं।

2) आरिफा: जम्मू कश्मीर के श्रीनगर की आरिफा ने कहा, “क्राफ्ट मैनेजमेंट के बाद मैंने देखा कि इस क्षेत्र में कामगारों को सही कीमत नहीं मिलती। इसलिए यहां के क्राफ्ट की पहचान खत्म हो रही है। 28 महिलाओं का एक समूह बनाकर मैंने कश्मीर के परंपरागत पश्मीना शॉल, दरी और अन्य क्राफ्ट बनाना शुरू कर दिया। सात साल से यह काम कर रही हूं। आज पीएम मोदी के सामने आकर मुझे काफी खुशी मिल रही है।”

3) बीना देवी: बिहार की बीना देवी को मशरूम की खेती को लोकप्रिय बनाने के लिए ‘मशरूम महिला’ के रूप में जाना जाता है। वे पांच साल तक सरपंच भी रहीं। बीना ने खुद के संघर्ष की कहानी भी साझा की। बताया कि कैसे उन्होंने मशरूम की खेती शुरू की और बाकी महलाओं को जोड़ा। 

4) रश्मि: महाराष्ट्र के पुणे की रहने वाली रश्मि ने बताया कि वह 60 सालों से रिसर्च एंड डेवलपमेंट के क्षेत्र में काम कर रही हैं। एमिशन मेजरमेंट में योगदान दिया और भारत की पहली एमिशन लेबोरेटरी शुरू कराई।

5) निल्जा: लद्दाख की निल्जा लद्दाखी किचन चला रही हैं। बताती हैं कि वह लद्दाख के खास लजीज और भूले-बिसरे पकवानों को परोसती हैं। इसके लिए कई युवतियों को प्रशिक्षित भी किया, जो साथ में काम करती हैं। 

6) नौंगशी और ताशी मलिक: उत्तराखंड के देहरादून की रहने वाली जुड़वा बहनों, नौंगशी मलिक और ताशी मलिक ने कई वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए हैं। नौंगशी और ताशी ने बताया कि उन्होंने दुनियाभर की सात सबसे ऊंची चोटियों, जिसमें एवरेस्ट भी शामिल है, पर फतह हासिल की। इसके अलावा उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव की स्कीइंग भी पूरी की। 

7) कौशिकी चक्रवर्ती: पश्चिम बंगाल के कोलकाता की रहने वाली कौशिकी चक्रवर्ती ने बताया कि वह शास्त्रीय संगीत का गायन करती हैं। उन्होंने दूसरी महिलाओं को भी जोड़ा। ‘सखी वुमन’ नाम से देश के पहले महिला शास्त्रीय बैंड की शुरुआत की। इस बैंड के जरिए वह और उनकी टीम कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी परफॉर्म कर चुके हैं।

8) भूदेवी: ओडिशा की भूदेवी को आदिवासी इलाकों में महिलाओं को मदद करने और उन्हें अपना व्यवसाय विकसित करने में मदद करने के लिए नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने बताया कि ‘मैं 25 वर्ष से काम कर रही हूं। मेरे पिता एक संस्थान बनाकर यही काम करते थे। मेरी शादी छोटी उम्र में हो गई थी। तीन बेटियां हुईं तो पति ने छोड़ दिया। बेटियों के साथ मुझे घर से निकाल दिया। मां-बाप के घर गई तो उन्हें काफी दुख हुआ। लेकिन, मैंने हार नहीं मानी। पिताजी के साथ उनके काम पर जाने लगी। उन्होंने मुझे भी काम सिखाया और वहीं से मुझे जीने का सही उद्देश्य मिल गया।”

9) चामी मुर्मू: लेडी टार्जन नाम से मशहूर झारखंड के राजनगर की रहने वाली चामी मुर्मू ने खुद की कहानी साझा की। बताया कि वह जंगलों और प्राकृतिक संपदा को संरक्षित रखने के लिए काम कर रही हैं। इसके लिए उन्हें काफी परेशानियों का सामना भी करना पड़ा। लेकिन, उन्होंने हार नहीं मानी। 

10) कलावती देवी: उत्तर प्रदेश के कानपुर की रहने वाली कलावती देवी ने बताया कि वह पेशे से राजमिस्त्री हैं। उन्होंने अब तक 4000 से अधिक शौचालय बनाए हैं। कानपुर को खुले में शौच से मुक्त बनाने में कलावती ने अहम योगदान दिया है। पति व दामाद की मौत के बाद भी कलावती का हौसला नहीं टूटा। परिवार में कमाने वाली कलावती इकलौती सदस्य हैं। वे खुले में शौच से होने वाली बीमारियों के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए घर-घर जाती हैं।