#Nirbhaya Case full coverage of this case at one shot in one URL with dainik bhasakar | Ground report from Tihar to the village of miscreants, every news of justice received after 2 thousand 651 days at one place, together | तिहाड़ से लेकर दुष्कर्मियों के गांव तक, 87 महीने बाद मिले न्याय की हर बड़ी खबर एक जगह, एक साथ


दैनिक भास्कर

Mar 20, 2020, 08:28 AM IST

दैनिक भास्कर कलेक्शन.  तमाम कानूनी दांव-पेंच के बावजूद निर्भया केस में आखिर फैसला आ ही गया। 20 मार्च, सुबह 5:30 बजे तिहाड़ जेल के फांसी घर में चारो दुष्कर्मियों को फांसी पर चढ़ा दिया गया। दैनिक भास्कर ने इस घटना को हर एंगल से कवरेज किया है। हमारे रिपोर्टर निर्भया के परिजनों से लेकर दुष्कर्मियों के गांव तक पहुंचे और वहां से अपने पाठकों के लिए फांसी के पहले और बाद का लाइव कवरेज किया। हमारी डेस्क और रिसर्च टीम ने नॉलेज और टॉकिंग पाइंट देने वाले हर पाइंट पर काम किया।

नतीजा, ये तमाम खबरें जो हम आपके लिए एक साथ, एक जगह संजो रहे –
 

#1. तिहाड़ से लाइव

7 साल, 3 महीने और 4 दिन के बाद वह सुबह आ ही गई, जब निर्भया सच में मुस्कुराई। शुक्रवार सुबह साढ़े पांच बजे उसके सभी दोषियों को एक साथ तिहाड़ जेल में फांसी पर लटका दिया गया।

पढ़ें – निर्भया मुस्कुराई / 7 साल, 3 महीने और 4 दिन बाद निर्भया को इंसाफ मिला; तिहाड़ में चारों दुष्कर्मियों को फांसी पर लटकाया गया, मौत से पहले दोषी विनय रोने लगा


#2. मां की प्रतिक्रिया

निर्भया की मां आशा ने कहा- मैंने बेटी की तस्वीर को गले से लगाकर कहा कि आज तुम्हें इंसाफ मिल गया। बेटी जिंदा रहती तो डॉक्टर की मां कहलाती। आज निर्भया की मां के नाम से जानी जा रही हूं।

पढ़ें –इंसाफ पर मुस्कुराईं आशा / निर्भया की मां बोलीं- मैंने बेटी की तस्वीर को गले से लगाकर कहा कि आज तुम्हें इंसाफ मिल गया


#3.निर्भया के गांव से ग्राउंड रिपोर्ट

दरिंदों को फांसी दिए जाने से पूरे गांव में जश्न का माहौल है। निर्भया के गांव के वीरेंद्र कहते हैं कि आज का दिन बहुत खुशी का दिन है। इस फांसी से पूरे गांव को खुशी मिली है,अमित मुखर्जी की रिपोर्ट –

पढ़ें – यूपी में निर्भया के गांव से रिपोर्ट / दरिंदों को फांसी की हर अपडेट लेते रहे परिजन; गांव में जश्न का माहौल, लोगों ने मिठाइयां बांटी


#4.दोषी मुकेश के गांव से ग्राउंड रिपोर्ट

राजस्थान के करौली जिले के छोटे से गांव कल्लादेह में कुल 5 से 6 छप्परवाले घर ही हैं। दुष्कर्मी मुकेश सिंह का घर नदी के किनारे ही बना है, जो लंबे समय से बंद पड़ा है, विष्णु शर्मा की रिपोर्ट –

पढ़ें –राजस्थान में निर्भया के दोषी मुकेश के गांव से रिपोर्ट / लोग मुकेश का नाम भी नहीं लेना चाहते; बोले- बचपन में ही चला गया था, पर दाग लगा गया


#5.दोषी अक्षय गांव से ग्राउंड रिपोर्ट

दिल्ली से 900 किमी, बिहार के औरंगाबाद जिला मुख्यालय से 35 किमी दूर अक्षय के गांव कर्मालहंग में सन्नाटा है। पत्रकारों ने जब वहां अक्षय का नाम लिया, तो लोग लाठी लेकर हमला करने आ गए, विवेक कुमार की रिपोर्ट

पढ़ें –निर्भया के दोषी अक्षय के गांव कर्मालहंग(बिहार) से रिपोर्ट / गांव में पसरा सन्नाटा, कवरेज करने पहुंचे मीडियाकर्मियों को लोगों ने खदेड़ा


#6.दोषी पवन के गांव से ग्राउंड रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से 20 किमी दूर जगन्नाथपुर गांव है। अल सुबह जब भास्कर इस गांव में दोबारा पहुंचा तो सुबह 4 बजे से ही गांव में जगह-जगह लोग इकट्ठा होकर मोबाइल-टीवी देख रहे थे, रवि श्रीवास्तव की रिपोर्ट

पढ़ें –यूपी में निर्भया के दोषी पवन के गांव से रिपोर्ट / महिलाएं बोलीं- गांव के लड़के की मौत का गम तो होगा ही; कुछ ने कहा- गलत करने वाले का यही हश्र होना था


#7.फांसी में देरी पर गुस्सा

फांसी का काउंटडाउन शुरू होते ही न केवल दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल के बाहर, बल्कि सोशल मीडिया पर भी लोगों का जश्न शुरू हो गया, लोग इसे न्याय की अंगड़ाई बताकर आगे बड़ी लड़ाई के संदेश दे रहे हैं।

पढ़ें –सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया / निर्भया के न्याय को अधूरा बता रहे लोग, कहा- ये तो अभी अंगड़ाई है, आगे बड़ी लड़ाई है


#8.फांसी की तैयारी

फांसी देने के लिए जल्लाद पवन 17 तारीख को ही तिहाड़ पहुंच चुका था। लेकिन फांसी से कुछ घंटे पहले इन दरिंदों के साथ क्या-क्या हुआ? फांसी पर चढ़ाने की पूरी प्रोसेस क्या है?  

पढ़ें –फांसी से पहले क्या होता है / निर्भया के दोषी पहले नहाए, फिर नाश्ता किया; सुबह 5:30 बजे सुपरिंटेंडेंट का इशारा मिलते ही चारों को फांसी दी गई


#9.दुष्कर्मियों के दांव

निर्भया गैंगरेप मामले में चारों दोषियों की छह अर्जियों पर आखिरी 15 घंटे में चार अदालतों में सुनवाई हुई। उनके वकील की ओर से आखिरी कोशिश देर रात दो बजे की गई।

पढ़ें – निर्भया के दोषियों की आखिरी कोशिशें / 15 घंटे में 4 अदालतों में 6 याचिकाएं लगाई गईं, लेकिन सब खारिज, जीत निर्भया की ही हुई


#10.निर्भया केस के अहम किरदार

निर्भया का बयान लेनी वाली एसडीएम उषा चतुर्वेदी, उनके साथ अंत तक रही तत्कालीन एसआई प्रतिभा शर्मा, डॉ. अरुणा बत्रा, अहम सबूत जुटाने वाले डॉ. बीके महापात्रा और डॉ.असित बी. आचार्या से बातचीत ।

पढ़ें – निर्भया के आखिरी वक्त के 5 साथी / कुछ शब्द और कुछ इशारों के साथ जब उसने कहा- नहीं! फांसी नहीं… सभी को जिंदा जला देना चाहिए


#11.खोजबीन की खबर

दरिंदों ने निर्भया के साथ किस हद तक हैवानियत की थी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दुष्कर्मी उसके कपड़े उतार कर ले गए। बाद में इन्हीं कपड़ों से बस भी साफ की।

पढ़ें – भास्कर रिसर्च / निर्भया का सारा सामान और कपड़े तक ले गए थे दुष्कर्मी; राजस्थान से स्मार्टफोन तो बिहार से सोने की अंगूठी बरामद हुई थी


#12.नॉलेज पैक

 35 साल तक तिहाड़ में नौकरी करने के दौरान सुनील गुप्ता ने 8 फांसियां देखीं। इसमें रंगा-बिल्ला से लेकर इंदिरा गांधी के हत्यारे सतवंत सिंह और केहर सिंह की फांसी भी शामिल थी।

पढ़ें – भास्कर खास / 8 फांसी देख चुके तिहाड़ के पूर्व लॉ अफसर सुनील गुप्ता ने बताया- आतंकी अफजल ने मरने से पहले गाना गाया था


#13.कोर्ट रूम लाइव

दरअसल, दुष्कर्मी पवन ने दया याचिका खारिज करने के फैसले को चुनौती दी थी। रात ढाई बजे सुप्रीम कोर्ट खुला, सवा तीन बजे तक सुनवाई हुई। इसके बाद तीन जजों की बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया। 

पढ़ें – निर्भया को इंसाफ / सुप्रीम कोर्ट में तड़के 3:15 बजे तक सुनवाई हुई, दोषी पवन ने दया याचिका खारिज करने को चुनौती दी थी


#14.भास्कर आर्काइव से

क्या होता है फांसी के वक्त? कौन क्या करता है? आखिरी के दो घंटे कैसे होते हैं? फांसी के बाद माहौल कैसा होता है? 23 साल 7 महीने पहले हुई इस फांसी की आंखों देखी रिपोर्ट सिर्फ भास्कर के पास थी।

पढ़ें – फांसी लाइव भास्कर आर्काइव से / 23 साल 7 महीने पहले इंदौर में हत्या के दोषी को दी गई फांसी की आंखों देखी रिपोर्ट


#15.जेल से लाइव

निर्भया के चारों दुष्कर्मियों की बिहैवियर स्टडी कर रहे डॉक्टरों के मुताबिक फांसी से एक दिन पहले चारों अजीबोगरीब हरकत कर रहे थे। वे अपनी बैरक से बार-बार बाहर झांकते रहे थे।
पढ़ें – चारों दोषी फांसी से 12 घंटे पहले तक अजीब हरकतें कर रहे थे, विनय अनाप-शनाप बोल रहा, पवन जेल स्टाफ को गालियां दे रहा था


#16.सजा-ए-मौत का बहीखाता
इस सदी की पहली फांसी धनंजय चटर्जी को हुई थी, वह नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म और हत्या का दोषी था, नवंबर 2012 से जुलाई 2015 के बीच 3 आतंकियों को फांसी हुई, जिनमें याकूब मेमन की फांसी सबसे ज्यादा विवादित रही

पढ़ें – फांसी / 21वीं सदी के भारत में 8 लोगों को फांसी पर लटकाया गया, इनमें 3 आतंकी और 5 दुष्कर्मी