Nirbhaya convict’s mother’s last wish for her son – ‘puri, sabzi, kachori’ | फांसी से एक दिन पहले दोषी विनय की मां बोलीं- बेटे को आखिरी बार अपने हाथ की बनी पूड़ी-सब्जी और कचौड़ी खिलाना चाहती हूं


  • विनय की मां ने कहा- भगवान ही तय करता है कौन जिएगा कौन मरेगा, कोरोना को ही देख लो
  • नए डेथ वॉरंट के मुताबिक- निर्भया के चारों गुनहगारों को शुक्रवार सुबह 5:30 बचे फांसी होनी है

दैनिक भास्कर

Mar 19, 2020, 03:38 PM IST

नई दिल्ली. निर्भया के गुनहगार विनय शर्मा की मां ने फांसी से पहले बेटे को अपने हाथ की बनी पूड़ी-सब्जी और कचौड़ी खिलाने की इच्छा जताई है। विनय समेत निर्भया के चारों दोषियों को शुक्रवार सुबह 5:30 बजे तिहाड़ जेल में फांसी दी जानी है। सुप्रीम कोर्ट ने 14 जनवरी को विनय की क्यूरेटिव पिटीशन खारिज कर दी थी। वहीं, फरवरी में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उसकी दया याचिका भी ठुकरा दी थी। इस मामले के चारों दोषियों के सभी कानूनी विकल्प खत्म हो चुके हैं।

न्यूज एजेंसी के रिपोर्टर ने दक्षिणी दिल्ली के रविदास नगर में विनय के घर पहुंचकर उसकी मां से बात की। दरवाजे पर दस्तक देते ही विनय की मां ने कहा, ‘‘कौन हो तुम? घर में कोई नहीं है। मेरे पति काम पर गए हैं। मैं विनय की मां हूं।’’ विनय की मां अपना नाम नहीं बतातीं। कई साल से वह यही सुन रही है कि बेटा घिनौने अपराध में दोषी है। मीडिया के सवालों से निपटने के लिए वह चाहती हैं कि कोई उनका नाम न पूछे और उन्हें केवल विनय की मां के रूप में ही जाना जाए।

भगवान चाहेगा, तो वो बच जाएगा: विनय की मां

विनय की मां 50 साल की हैं, लेकिन उम्र से ज्यादा बुजुर्ग दिखती हैं। वह घर में किसी को घुसने नहीं देतीं। सवाल पूछने पर कहती हैं, ‘‘क्या लिखोगे तुम? कुछ होता है तुम्हारे लिखने से। अगर भगवान चाहेगा तो वह बच जाएगा।’’ वह आगे कहती हैं, ‘‘सब भगवान की इच्छा है। कोरोनावायरस को ही देख लो। भगवान ही तय करता है कि कौन जिएगा और कौन मरेगा। यह आदमी के बस के बाहर है।’’

मुझे कभी उसके लिए खाना नहीं ले जाने दिया

बेटे की फांसी से पहले उससे मिलने और उनकी किसी इच्छा के बारे में पूछने पर विनय की मां के चेहरे पर उम्मीद की एक झलक दिखती है। उन्होंने कहा, ‘‘तिहाड़ जेल के कर्मचारियों ने मुझे कभी खाना और दूसरी चीजें नहीं ले जाने दीं। अगर वे इजाजत दें तो मैं आखिरी बार बेटे को सब्जी-पूड़ी और कचौड़ी खिलाना चाहूंगी।’’

दोषियों के बारे में बात करते ही चुप्पी साध लेते हैं लोग

संकरी गलियों, खुली सीवर लाइनों और और जर्जर घरों वाली रविदास नगर नाम की स्लम कॉलोनी में निर्भया के 6 दोषियों में से 4 का घर है। इस कॉलोनी का नजारा किसी भी आम स्लम की तरह ही दिखाई देता है। यहां सुबह लोग काम पर जाते हैं। बच्चे खेलते हैं, महिलाएं घरेलू काम करती हैं और कुछ लोग आपस में बात करते नजर आते हैं। यह सब तभी तक चलता है, जब तक विनय शर्मा और पवन गुप्ता के बारे में न पूछा जाए। इनके बारे में पूछते ही सबकुछ बदल जाता है। हंसी और बातचीत एक अजीब चुप्पी में बदल जाती है।

निर्भया के साथ दरिंदगी को 7 साल 3 महीने बीते

दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को चलती बस में निर्भया के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना को 7 साल 3 महीने बीत चुके हैं। 26 साल के विनय शर्मा को मुकेश सिंह (32), पवन गुप्ता (25) और अक्षय सिंह (31) के साथ फांसी दी जानी है। ट्रायल कोर्ट ने पांच मार्च को 20 तारीख के लिए डेथ वॉरंट जारी किया था। मामले के 5वें दोषी राम सिंह ने 2015 में तिहाड़ जेल में फांसी लगा ली थी। छठा दोषी नाबालिग था। वह सुधार गृह में 3 साल की सजा काटने के बाद रिहा हो चुका है।