Nirbhaya’s mother said – On March 20, she will celebrate as ‘Nirbhaya Day’, fight for other daughters of the country | निर्भया की मां ने कहा- देश की दूसरी बेटियों के लिए लड़ाई लड़ेंगी, 20 मार्च को वह ‘निर्भया दिवस’ के रूप में मनाएंगी

Nirbhaya’s mother said – On March 20, she will celebrate as ‘Nirbhaya Day’, fight for other daughters of the country | निर्भया की मां ने कहा- देश की दूसरी बेटियों के लिए लड़ाई लड़ेंगी, 20 मार्च को वह ‘निर्भया दिवस’ के रूप में मनाएंगी


  • आशा देवी ने कहा- निर्भया के साथ पूरे देश को इंसाफ मिला। यह सात साल का संघर्ष था
  • बोलीं-  मैं मेरी बेटी को बचा नहीं पाई, यदि वो होती तो डॉक्टर बेटी की मां कहलाती

दैनिक भास्कर

Mar 21, 2020, 04:08 AM IST

नई दिल्ली (पवन कुमार). निर्भया के चारों दरिंदे पवन, मुकेश, अक्षय और विनय शुक्रवार सुबह 5:30 बजे फांसी पर लटका दिए गए। दोषियों की फांसी के बाद  निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि 20 मार्च को वह निर्भया दिवस के रूप में मनाएंगी। देश की दूसरी बेटियों के लिए लड़ाई लड़ेंगी। फांसी मिलते ही तिहाड़ जेल के बाहर लोग जमा हो गए। इन्होंने ‘निर्भया अमर रहे…’ के नारे लगाए।

निर्भया के नाम मां का पत्र

बेटी! 16 दिसंबर 2012 की रात जो कुछ भी तुमने सहा, उसका न्याय हो गया। इंतजार लंबा था। पर, एक तसल्ली है- जैसे दरिंदों के साथ तुम्हारे लिए एक-एक पल नर्क जैसा था…वैसे ही उन गुनहगारों ने मौत के खौफ में एक-एक पल गुजारा है। आज तुम होती तो हम तुम्हें ससुराल विदा कर चुके होते। तुम भी तो कॉलेज के बाद सपने पूरे करना चाहती थीं। लेकिन, नियति…। खैर, एक गुनहगार कानून की आड़ में आजाद है, चैन उसे भी नहीं मिलेगा। उसे ईश्वर सजा देगा.. तुम बस इत्मीनान रखना…!

मां बेटी को याद कर गुड़िया को चिपका लेती हैं 

निर्भया को यह गुलाबी गुड़िया भाई ने जन्मदिन पर दी थी। उसे इससे इतना लगाव था कि वह इसे पढ़ाई के दौरान अपने साथ देहरादून लेकर गई थी। आज निर्भया की मां आशा को जब भी बेटी की याद आती है, वह इस गुड़िया को बांहों में भर लेती हैं।

निर्भया के साथ पूरे देश को इंसाफ मिला: आशा देवी
आशा देवी ने कहा, ‘एक ना एक दिन सच बाहर आता है और अपना रंग दिखाता है। देर आए दुरुस्त आए। देर से ही सही, लेकिन पहली बार आज चारों दोषियों को फांसी हुई। निर्भया के साथ पूरे देश को इंसाफ मिला। यह सात साल का संघर्ष था। 20 मार्च का दिन महिला और बच्चियों के नाम है, जिस दिन पूरे देश को न्याय मिला।

अपराधी के खिलाफ खड़े होने का साहस दीजिए: आशा देवी

आशा देवी ने कहा, ‘मुझे दु:ख है। मैं मेरी बेटी को बचा नहीं पाई। यदि वो होती तो डॉक्टर बेटी की मां कहलाती। लेकिन आज मैंने अपनी ममता का धर्म निभाया। जब तक हम सहते रहेगे तब तक हमारे साथ अपराधी अपराध करते रहेंगे। मैं सभी पीड़ित परिवार और मां-बाप से कहना चाहती हूं कि आपके आसपास या घर में कही भी किसी बच्ची या महिला के साथ अपराध हो तो उसका साथ दीजिए। अपराधी के खिलाफ खड़े होने का साहस दीजिए। आगे मेरी लड़ाई कानून की खामियों को दूर करने के लिए जारी रहेंंगी।’

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