Ranjan Gogoi Rajya Sabha | Ranjan Gogoi Former Chief Justice of India Rajya Sabha Nomination Latest News and Updates | पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई बोले- शपथ लेने के बाद विस्तार से बताऊंगा कि मैंने राज्यसभा का प्रस्ताव क्यों स्वीकारा


  • जस्टिस रंजन गोगोई 13 महीने चीफ जस्टिस रहे, 17 नवंबर को रिटायर हुए
  • राफेल मामले में जस्टिस गोगोई ने केंद्र को क्लीन चिट दी थी, अयोध्या पर फैसला भी उन्हीं ने सुनाया

दैनिक भास्कर

Mar 17, 2020, 04:29 PM IST

नई दिल्ली. पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को सोमवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्यसभा के लिए नामित किया। मंगलवार को जस्टिस गोगोई ने इस मामले पर मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, ‘‘संभवतः कल मैं दिल्ली जाऊंगा। पहले मुझे शपथ ले लेने दीजिए। इसके बाद मैं मीडिया से विस्तार में बात करूंगा कि आखिर क्यों मैंने राज्यसभा जाने का प्रस्ताव स्वीकार किया है।’’

जस्टिस गोगोई 13 महीने चीफ जस्टिस रहे। 17 नवंबर 2019 को वे रिटायर हुए। उनके द्वारा सुनाए गए अहम फैसलों में अयोध्या और राफेल विवाद हैं। इससे पहले जस्टिस रंगनाथ मिश्रा भी कांग्रेस से जुड़कर संसद तक पहुंचे थे, जबकि पूर्व सीजेआई पी.सतशिवम को मोदी सरकार ने केरल का राज्यपाल बनाया था।

रिटायर होने से पहले जस्टिस गोगोई ने 10 दिन में दिए थे 5 फैसले
पहला फैसला: अयोध्या रामजन्मभूमि विवाद मामले में जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने विवादित भूमि पर राम मंदिर बनाने का फैसला दिया। मुस्लिमों को मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ जमीन दूसरी जगह दिए जाने का भी आदेश दिया। 

दूसरा मामला: राफेल विमान सौदे में लगे घोटाले के आरोपों को लेकर जस्टिस गोगोई ने मोदी सरकार को बड़ी राहत दी। सीजेआई की अगुआई वाली बेंच ने राफेल मामले में दायर हुईं सभी पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया था।
तीसरा फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को ‘चौकीदार चोर है’ वाले बयान पर माफी मांगने को कहा था। इस मामले में भाजपा प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने याचिका दाखिल की थी। 

चौथा फैसला: सबरीमाला मंदिर महिलाओं के प्रवेश को लेकर था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 2018 के फैसले को बरकरार रखा था और मामला सात सदस्यीय संविधान पीठ को भेज दिया था।
पांचवा मामला: वित्त कानून-2017 के संशोधन को लेकर था। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने कानून में संशोधनों को लेकर रोक लगा दी थी और मामला सात सदस्यीय पीठ को भेज दिया था।