Sachin Pilot BJP Joining Update | Ex-Deputy CM and Rajasthan Congress President Sachin Pilot On Ashok Gehlot | ‘भाजपा में शामिल नहीं हो रहा हूं, राजद्रोह के आरोप के नोटिस से मेरे आत्मसम्मान को ठेस पहुंची है’

Sachin Pilot BJP Joining Update | Ex-Deputy CM and Rajasthan Congress President Sachin Pilot On Ashok Gehlot | ‘भाजपा में शामिल नहीं हो रहा हूं, राजद्रोह के आरोप के नोटिस से मेरे आत्मसम्मान को ठेस पहुंची है’


  • पायलट ने कहा- मैं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से गुस्सा नहीं हूं, न ही किसी तरह का पद या पॉवर चाहता हूं
  • सचिन पायलट ने बताया कि मैं भाजपा के किसी नेता से नहीं मिला हूं, करीब छह महीने में सिंधिया से भी नहीं मिला

दैनिक भास्कर

Jul 15, 2020, 10:38 AM IST

जयपुर. राजस्थान में चल रहे सियासी घमासान के बीच सचिन पायलट की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने एक अंग्रेजी मैगजीन को दिए इंटरव्यू मे बताया कि मैं साफ कर दूं, भाजपा में शामिल नहीं हो रहा हूं। मैं इस समय कह सकता हूं कि अपने लोगों के लिए काम करना जारी रखूंगा।

पायलट ने कहा कि राज्य पुलिस ने मुझे एक नोटिस दिया, जिसमें राजद्रोह के आरोप थे। जिससे मेरे आत्मसम्मान को ठेस पहुंची। यदि आपको 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए कांग्रेस पार्टी का घोषणापत्र याद है, तो हमने ड्रैकियन राजद्रोह कानून का खंडन करने की बात की थी। यहां कांग्रेस सरकार अपने ही मंत्री के खिलाफ इसे इस्तेमाल कर रही थी। मेरा कदम अन्याय के खिलाफ एक आवाज थी। 

मैं किसी तरह की पॉवर नहीं चाहता

मैं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से गुस्सा नहीं हूं, न ही किसी तरह का पद या पॉवर चाहता हूं। हमने अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाई। वसुंधरा राजे सरकार पर अवैध खनन की लीज को खत्म करने का दबाव बनाया। वहीं, सत्ता में आने के बाद मैं चाहता था कि चुनावों में जनता से किए गए हमारे वादे पूरे किए जाएं, लेकिन गहतोल जी ने कुछ नहीं किया है। वे भी उसी रास्ते पर चल दिए। 

पिछले साल राजस्थान उच्च न्यायालय ने उस नियम में संशोधन किया, जिसके माध्यम से राजे ने अपने पूरे जीवन के लिए जयपुर में एक सरकारी बंगला आवंटित किया। जिसमें गहलोत सरकार से उनसे बंगला खाली करवाने के लिए कहा गया। आदेश का पालन करने के बजाय गहलोत ने सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी। इस दौरान उन्होंने मुझे और मेरे साथ कार्यकर्ताओं को राजस्थान के विकास के लिए काम करने की अनुमति नहीं दी। अधिकारियों को मेरे निर्देशों की पालन नहीं करने के लिए कहा गया था, फाइलें मेरे पास नहीं भेजी गई।  कैबिनेट की बैठकें महीनों तक नहीं होती थीं। ऐसे पद का क्या मतलब जहां बैठकर में जनता से किए वादे पूरे नहीं कर सकता?

कई बार सीनियर नेताओं को सूचित किया
सचिन पायलट ने कहा कि उन्होंने इसके बारे में कई बार अविनाश पांडे और पार्टी के बड़े नेताओं को जानकारी दी। मैने गहलोत जी से भी इस बारे में बात की, लेकिन कोई बैठकें ही नहीं होती थी। सरकार में बहस और चर्चा के लिए कोई जगह नहीं थी।

यह मुख्मंत्री बनने की बात नहीं
इसके साथ सचिन पायलट ने बताया कि यह मुख्यमंत्री बनने की बात नहीं है। मैंने 2018 में पार्टी को जीत के लिए नेतृत्व करने के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए हिस्सेदारी का दावा किया था। मेरे पास सही कारण थे। मैंने पार्टी का कार्यभार तब संभाला जब हम 200 सीटों में से से 21 पर सिमट गए थे। अगले पांच वर्षों तक, गहलोत जी ने एक भी शब्द नहीं बोला, जबकि मैंने लोगों के साथ काम किया, कैडर को मजबूत किया।

6 महीने से सिंधिया से नहीं मिला
सचिन पायलट ने बताया कि मैं भाजपा के किसी नेता से नहीं मिला हूं। करीब छह महीने में सिंधिया से भी नहीं मिला हूं। माथुर से भी नहीं मिला हूं।

प्रियंका गांधी से फोन पर बात हुई

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी जी और राहुल गांधी जी से मेरा कोई बात नहीं हुई है। प्रियंका गांधी जी ने मुझसे फोन पर बात की थी। यह एक व्यक्तिगत बातचीत थी। 

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