The brother killed the brother while walking out of the house in lockdown; If the car was not found, the hungry laborer walked 135 kilometers on foot | लॉकडाउन में घर से बाहर निकलने पर भाई ने भाई को मार डाला; गाड़ी नहीं मिली तो भूखा मजदूर 135 किलोमीटर पैदल चलकर घर पहुंचा


  • लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों पर पड़ा
  • बड़ी संख्या में मजदूरों, नौकरीपेशा वालों की नौकरी छूटी, खाने के लिए भी हुए परेशान

दैनिक भास्कर

Mar 26, 2020, 08:11 PM IST

मुंबई. कोरोनावायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन ने लोगों के सामने मुसीबत खड़ी कर दी है। बड़ी संख्या में लोगों की नौकरियां छूट गई हैं। खासतौर पर मजदूरी करने वाले ज्यादा परेशान हैं। दो वक्त की रोटी जुटाना भी इनके लिए मुश्किल हो गया है। ऐसे में गुरुवार को इससे जुड़े दो हैरतअंगेज मामले सामने आए। पहला लॉकडाउन में मना करने के बावजूद घर से निकलने पर भाई ने भाई को मार डाला। वहीं दूसरी ओर 150 किलोमीटर दूर अपने घर जाने के लिए एक मजदूर भूखा निकल पड़ा। 135 किलोमीटर का सफर भी पैदल पूरा कर लिया। पुलिस को जानकारी हुई तो उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।  

नौकरी छूटने पर भाई के घर आया था, मिली मौत
कोरोना के चलते देश में मर्डर का यह पहला मामला है। मुंबई के कांदिवली ईस्ट में रहने वाले 28 साल के राजेश ठाकुर ने 21 साल के अपने छोटे भाई दुर्गेश को मार डाला। पुलिस के मुताबिक राजेश ने उसे लॉकडाउन में घर से बाहर निकलने के लिए मना किया था। इसके बावजूद वह घर से निकला था। घटना बुधवार की है। राजेश अपनी पत्नी के साथ रहता था। जबकि दुर्गेश पुणे में वेटर का काम करता था। लॉकडाउन के चलते एक सप्ताह पहले की उसकी नौकरी चली गई थी। वह भी मुंबई में राजेश के पास आ गया। बुधवार से लॉकडाउन हुआ तो राजेश ने उसे घर से बाहर निकलने से मना किया। इसके बावजूद दुर्गेश बाहर निकल पड़ा। इसपर दोनों के बीच झगड़ा हुआ। इसी बीच राजेश ने पैन (तवे) से दुर्गेश के सिर पर हमला कर दिया। खून निकलने पर उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने राजेश को गिरफ्तार कर लिया है। 

गाड़ी नहीं मिली तो भूखा मजदूर घर के लिए पैदल निकल पड़ा
लॉकडाउन के दौरान यात्रा पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। मजदूरी करने वालों के लिए यह मुसीबत का सबब है। नौकरी छूटी तो बड़ी संख्या में मजदूर मुंबई, दिल्ली, पुणे से सैकड़ों किलोमीटर दूर अपने-अपने घरों के लिए निकल पड़े हैं। कुछ ऐसा ही 26 साल के मजदूर नरेंद्र शेलके के साथ हुआ। नरेंद्र ने भूखे रहकर 135 किमी की यात्रा पूरी की। वह महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में स्थित जम्भ गांव का रहने वाला है। नागपुर में मजदूरी करता था। यहां से उसके गांव की दूरी 150 किलोमीटर दूर है। लॉकडाउन से नौकरी छूटी तो वह परेशान हो गया। खाने को भी कुछ नहीं था तो वह भूखा ही पैदल अपने गांव के लिए निकल पड़ा। बुधवार रात वह नागपुर से लगभग 135 किमी दूर एक खाली कैंप में पहुंचा तो पुलिस ने उससे पूछताछ शुरू कर दी। इस पर उसने बताया कि वह अपने घर तक पहुंचने के लिए पिछले दो दिनों से चल रहा है। पुलिसकर्मियों ने उसे तत्‍काल सिंधेवाही के ग्रामीण अस्‍पताल में भर्ती कराया। मेडिकल चेकअप के बाद उसे एक लंच बॉक्स दिया और फिर गाड़ी का इंतजाम करवाकर उसे घर भिजवाया। जहां उसे 14 दिनों के लिए होम क्वारैंटाइन में रखा गया है।