US China | US China Nuclear Test Latest News Updates Amid Coronavirus Disease (COVID-19) Crisis | अमेरिका ने लगाया चीन पर परमाणु परीक्षण करने का आरोप, चीन ने कहा- झूठ बोल रहा अमेरिका


  • अमेरिका ने कहा- चीन के लोप नूर टेस्ट साइट पर हुआ छोटा परमाणु परीक्षण
  • 2019 में मई में अमेरिका ने रूस पर इसी तरह के आरोप लगाए थे, जो कभी साबित नहीं हुए

दैनिक भास्कर

Apr 16, 2020, 09:31 PM IST

वाशिंगटन. अमेरिका ने दावा किया है कि चीन ने जमीन के अंदर कम क्षमता वाले परमाणु बम का परीक्षण किया है। हालांकि, चीन ने अमेरिका के इस दावे को नकारा है। आर्म्स कंट्रोल कंप्लाइंस की रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है। लेकिन, इस परीक्षण का कोई सबूत नहीं दिया गया है। रिपोर्ट में चीन के लोप नूर टेस्ट साइट परीक्षण स्थल पर खुदाई और अन्य गतिविधियों के सबूत पेश किए गए हैं।   

वॉल स्ट्रीट जर्नल पर अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि चीन के लोप नूर टेस्ट साइट पर साल भर से इसकी तैयारियां चल रही थीं।

चीन और पाकिस्तान मिलकर काम कर रहे

अमेरिका को चिंता है कि चीन ब्लास्ट्स के दौरान ‘जीरो ईल्ड’ का उल्लंघन कर सकता है। जीरो ईल्ड ऐसा न्यूक्लियर टेस्ट होता है, जिसमें कोई चेन रिएक्शन नहीं होता है, जैसा न्यूक्लियर हथियार के डिटोनेशन पर होता है। बता दें कि जिन कम तीव्रता वाले परमाणु बमों के परीक्षण का शक अमेरिका ने जताया है, उन पर चीन और पाकिस्तान साथ में काम कर रहे हैं। इनसे किसी छोटे इलाके को निशाना बनाना आसान होता है।

चीन परमाणु हथियारों की ताकत बढ़ा रहा- सांसद कॉटन
अमेरिका और चीन दोनों ने 1996 में कंप्रिहेंसिव बैन ट्रीटी (सीटीबीटी) साइन की थी। रिपब्लिकन सांसद टॉम कॉटन ने कहा, ‘‘जहां एक ओर अमेरिका इस ट्रीटी का पालन कर रहा हैं, वहीं चीन इसको तोड़कर अपने परमाणु हथियारों की ताकत बढ़ा रहा है। चीन ने यह सिद्ध किया है कि वह ईमानदारी से काम नहीं कर सकता।’’

अमेरिकी डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी ने पिछले साल मई में इसी तरह के आरोप रूस पर लगाए थे, जो कभी साबित नहीं हो पाए। यूएस हॉक ने कई बार ट्रम्प प्रशासन से सीटीबीटी ट्रीटी को तोड़ने की मांग की है, ताकि अमेरिका स्वतंत्र रूप से नए परमाणु परीक्षण कर सके। 

चीन ने ब्लॉक किया डेटा ट्रांसमिशन
अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट ने दावा किया है कि चीन ने इंटरनेशनल एजेंसी के मॉनिटरिंग सेंटर से जुड़े सेंसर्स से आने वाले डेटा ट्रांसमिशन को ब्लॉक किया है। यह एजेंसी ही इस बात को सुनिश्चित करती है कि न्यूक्लियर टेस्ट पर प्रतिबंध लगाए जाने के समझौते का पालन किया जा रहा है या नहीं। वॉल स्ट्रीट जर्नल को एजेंसी की प्रवक्ता ने बताया कि 2018 से लेकर अगस्त 2019 के बीच चीन से डेटा ट्रांसमिशन में ब्लॉक आए, लेकिन उसके बाद कोई ब्लॉक नहीं आया।

चीन ने कहा- गलत आरोप लगा रहा अमेरिका
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजिआन ने कहा कि अमेरिका झूठे आरोप लगा रहा है। चीन परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, ‘‘चीन ने हमेशा एक जिम्मेदार रवैया अपनाया है और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने के लिए ईमानदारी से वादों को पूरा किया है। अमेरिका का दावा पूरी तरह आधारहीन है।’’