Uttar pradesh News In Hindi : Nirbhaya Rapist Pawan Gupta Hanging | Nirbhaya Rape Case Convict Village Basti Uttar Pradesh Latest News And Updates | महिलाएं बोलीं- गांव के लड़के की मौत का गम तो होगा ही, युवा बोले- फांसी देना ठीक नहीं; कुछ ने कहा- गलत करने वाले का यही हश्र होना था

Uttar pradesh News In Hindi : Nirbhaya Rapist Pawan Gupta Hanging | Nirbhaya Rape Case Convict Village Basti Uttar Pradesh Latest News And Updates | महिलाएं बोलीं- गांव के लड़के की मौत का गम तो होगा ही, युवा बोले- फांसी देना ठीक नहीं; कुछ ने कहा- गलत करने वाले का यही हश्र होना था


  • दोषी पवन के परिवार ने उसे निर्दोष बताया, उसके चाचा ने मीडिया को धमकाया
  • 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में निर्भया से दिल्ली में हुई थी ज्यादती
  • 6 लोगों ने की थी निर्भया से दरिंदगी, एक की मौत, चार को आज हुई फांसी

रवि श्रीवास्तव

रवि श्रीवास्तव

Mar 20, 2020, 07:32 AM IST

बस्ती(उत्तर प्रदेश). उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से 20 किमी दूर जगन्नाथपुर गांव है। 2012 के बाद यह गांव उस समय चर्चा में आया, जब इस गांव के पवन गुप्ता ने दिल्ली में निर्भया के साथ ज्यादती की। पवन के जीवन की आखिरी रात से पहले इस गांव में सन्नाटा रहा। अल सुबह जब भास्कर इस गांव में दोबारा पहुंचा तो सुबह 4 बजे से ही गांव में जगह-जगह लोग इकट्ठा होकर मोबाइल-टीवी देख रहे थे। पवन का घर का दरवाजा सुबह 6 बजे तक बन्द ही रहा। हालांकि, अंदर से टीवी की आवाज आती रही जबकि बगल के घर मे आसपास की महिलाएं और पुरुष टीवी पर अपडेट देखते नजर आए।

इस गांव में पहुंचने से पहले हमें रास्ते में मनोरमा नदी का पुल पार करना पड़ा। यहां से करीब डेढ़ किमी पैदल चलकर हम गांव पहुंचे। गांव में करीब 2200 मतदाता हैं। ज्यादातर लोग निषाद और मल्लाह बिरादरी से हैं। अन्य जातियों से भी तालुक रखने वालों का भी गांव में घर है। गांव में दाखिल होने पर एक गली मिलती है, जिसके मोड़ पर छोटी सी दुकान है। जहां कैमरा देखते ही बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवकों की भीड़ लग गई। वैसे अब गांव में पवन का परिवार नहीं रहता है। पवन के पिता हीरालाल तीन भाई हैं। इनमें से दो जुग्गिलाल और सुभाष दिल्ली में फल का कारोबार करते हैं जबकि, दोनों का परिवार गांव में ही रहता है। सुभाष इस समय गांव में ही है।

पवन का चाचा गांव के मुहाने पर लाठी लेकर बैठ गया
सुबह 5.30 पर फांसी के बाद पवन का चाचा सुभाष लाठी लेकर गांव के मुहाने पर बैठ गया। उसकी गांव के कुछ लोगों से कहासुनी भी हुई। सुभाष ने दैनिक भास्कर की टीम को भी गांव से जाने के लिए धमकाया। पूछने पर कहा कि आसाराम, कुलदीप सेंगर जैसे लोग आज भी जेल में रह रहे हैं जबकि पवन को फांसी पर चढ़ा दिया गया। ये सब मीडिया के दबाव में हुआ है। मैं मीडिया को बर्दाश्त नहीं करूंगा। उसने कहा कि कुछ गांव वाले भी मना रहे थे कि हमारे भतीजे को फांसी हो जाए। दरअसल, पवन के चाचा-चाची आज भी गांव में ही मौजूद थे। पूरा परिवार फांसी का कवरेज टीवी पर लाइव देख रहा था।

महिलाओं ने कहा- अगर फांसी से दुष्कर्म रुक जाए तो ठीक

महिलाओं का कहना था कि गांव का लड़का है तो उसकी मौत पर गम तो होगा ही। वहीं, कुछ महिलाओं का कहना था कि अगर फांसी से दुष्कर्म रुक जाए तो ठीक लेकिन जो गलत लोग हैं, उन्हें इससे डर नहीं लगता है। कुछ महिलाओं ने यह भी कहा कि पवन ने गलत किया, तभी उसकी ये हालत हुई। गांव में जगह-जगह लोग इकट्ठा होकर पवन की फांसी पर ही चर्चा कर रहे थे। कोई राम सिंह को दोषी बता रहा था तो कोई मुकेश को। कुछ लोग निर्भया के चरित्र पर भी सवाल खड़े कर रहे थे। दोषी पवन के वकील एपी सिंह का नाम तो हर किसी जुबान पर था। सबने एक स्वर में वकील के प्रयासों की सराहना की।

गांव वालों ने यह भी कहा- पवन के साथ गलत हुआ
पूरे गांव में पवन की फांसी की चर्चा हो रही है। कुछ लोग फांसी का समर्थन करते दिखे तो ज्यादातर ऐसे भी थे जो यह कह रहे थे कि पवन के साथ गलत हुआ। गांव के कुछ लोग एक जगह इकट्ठा हैं, वे कहते हैं कि फांसी दिया जाना गलत है। इनका कहना था कि पवन ने गलत किया, सही किया ये किसने देखा। वहीं, गांव में पवन के घर से कुछ दूरी पर खड़े अशोक का कहना था कि पवन ने कुछ ऐसा काम नहीं किया है, जिससे गांव का नाम रोशन हुआ हो। ऐसे लोगों को मर जाना ही बेहतर है।  

15 साल पहले दिल्ली जाकर बस गया था परिवार
पवन का परिवार 15 साल पहले अपना घर बेचकर दिल्ली चला गया था। परिवार में माता-पिता, छोटा भाई और दो बहनें हैं। निर्भया कांड के बाद पवन की बहन की मौत हो गई थी। पवन के पिता निर्भया कांड से पहले गांव आते रहते थे। उन्होंने महादेवा चौराहे के पास घर बनवाना शुरू किया था। लेकिन, निर्भया कांड के बाद निर्माण ठप हो गया। इसके बाद वे दोबारा लौटकर नहीं आए। गांव में अब पाटीदार रहते हैं। पवन के गांव के राम जनम और पड़ोसी उमेश ने कहा- पवन ने कक्षा छह तक लालगंज में द्वारिका प्रसाद चौधरी इंटर कॉलेज में पढ़ाई की थी। वह क्रिकेट खेलने का शौकीन था।

एपी सिंह एक अच्छे वकील, उन्होंने बचाने का पूरा प्रयास किया
इससे पहले जब हम गुरुवार की रात पवन के गांव में पहुंचे तो गांव के तमाम युवक मोबाइल पर फांसी से जुड़ी जानकारियों को देखते नजर आए। उनसे बातचीत हुई तो सभी ने एक स्वर में फांसी को गलत ठहराया। उन्होंने कहा- कोर्ट को फांसी की सजा नहीं देना चाहिए थी। क्या इसके बाद दुष्कर्म रुक जाएंगे? हम उस बेटी का भी दर्द समझते हैं, लेकिन फांसी नहीं होनी चाहिए थी। वह हमारे गांव का लड़का था। वकील एपी सिंह अच्छे वकील हैं, जो उन्होंने अब तक बचाए रखा। इसके पीछे कोई चमत्कार भी था। गांव वाले इस आस में भी थे कि शायद सुबह कोई चमत्कार हो जाये और फांसी रुक जाए।

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